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पन्ना में 51 दिनों से जारी आंदोलन स्थगित, कलेक्टर के दौरे के बाद फैसला 

पन्ना में केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट सहित कई अन्य परियोजनाओं में प्रभावितों को पर्याप्त मुआवजा न मिलने के खिलाफ हो रहा आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया. 
Panna protest

रविवार 1 नवंबर को पन्ना कलेक्टर हर्ष सिंह अन्य अधिकारियों के साथ प्रदर्शन स्थल पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों और आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर के साथ बातचीत की. इसके बाद आंदोलनकारियों ने आंदोलन फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया.

जय किसान संगठन द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, ‘कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि किसी भी प्रभावित परिवार के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।’ हालांकि भटनागर ने कहा कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, केवल 15 दिन के लिए स्थगित किया गया है. उन्होंने कहा कि अगर उनको न्याय नहीं मिला तो संघर्ष वापस शुरू होगा।

जिले की अजयगढ़ तहसील के मंडला टिपरिया में यह आंदोलनकारी बीते 50 से भी अधिक दिनों से केन-बेतवा रिवर लिंक परियोजना, मझगाय एवं रुंझ मध्यम सिंचाई परियोजना और ललितपुर-सिंगरौली रेलमार्ग परियोजना को केंद्र में रखकर विरोध कर रहे थे. उनका कहना था कि उचित मुआवजा मिलने तक वे अपने घर नहीं छोड़ेंगे। 

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इस बार प्रदर्शन के दौरान आंदोलन के प्रमुख चेहरों को गिरफ्तार भी किया गया. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाते हुए उनके नेताओं को झूठे मामले में फंसाने का आरोप भी लगाया. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने भटनागर को तो छोड़ दिया मगर महिला नेता दिव्या अहिरवार अब भी जेल मे हैं.

आंदोलन में अब तक क्या-क्या हुआ?   

अमित भटनागर एवं अन्य आंदोलनकारी । फोटो: चंद्रप्रताप तिवारी
अमित भटनागर एवं अन्य आंदोलनकारी । फोटो: चंद्रप्रताप तिवारी

जुलाई में छतरपुर जिले के कूपी गांव में भटनागर ने लंबा प्रदर्शन और आमरण अनशन किया था। 19 जुलाई को पुलिस कार्रवाई के बाद यह प्रदर्शन समाप्त हो गया था। प्रदर्शन खत्म होने के बाद केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित गांवों में दोबारा सर्वे शुरू हुआ। 

मगर रुंझ-मझगांय परियोजना से प्रभावित परिवारों का कहना था कि उनकी मुआवजे और पुनर्वास से जुड़ी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद 11 सितंबर को ग्रामीणों ने वापस आंदोलन शुरू कर दिया। लगभग 15 दिन बाद पुलिस इन प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची, जहां उनके बीच बहस होती दिखाई दी। पुलिस कार्रवाई के खिलाफ अगले ही दिन भटनागर ने आमरण अनशन का ऐलान कर दिया। 

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मगर 28 सितंबर की शाम को ही आंदोलन का नेतृत्व कर रहे दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जिसके विरोध में सामूहिक गिरफ्तारी देने पहुंचे भटनागर को 30 सितंबर को हनुमतपुर चौकी में गिरफ्तार कर लिया गया। 

पुलिस बर्बरता का आरोप

आंदोलन स्थल पर मौजूद पुलिस । फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी
आंदोलन स्थल पर मौजूद पुलिस । फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी

प्रदर्शनकारियों द्वारा जारी वीडियो में पुलिस के साथ कुछ लोग सादे कपड़ों और कुछ बिना नेम प्लेट के दिखाई दिए. इस पर आंदोलनकारियों ने आपत्ति जताई. पन्ना जिले के मंडलिया टिपरिया गांव में रहने वाले इंद्रपाल आदिवासी को भी दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत के साथ हिरासत में लिया गया था। इंद्रपाल आदिवासी उन प्रभावित लोगों में शामिल हैं, जो मझगाय बांध परियोजना से जुड़े मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। 

इंद्रपाल आदिवासी ने बताया कि वो आंदोलन स्थल पर अपनी मां को खाना देने गए थे तभी पुलिस ने बाकी लोगों के साथ उन्हें हिरासत में ले लिया। इंद्रपाल आदिवासी का आरोप था कि विरोध करने पर पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। इंद्रपाल ने बताया कि उन्हें करीब 17 या 18 दिन जेल में रहना पड़ा। पुलिस उन्हें पन्ना और छतरपुर ले गई जिसके बाद में उन्हें बिजावर के मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और जेल भेज दिया गया। इंद्रपाल ने अब तक उनके खिलाफ हुई एफआईआर नहीं देखी। 

ग्राउंड रिपोर्ट द्वारा हासिल इस घटना से जुड़ी एफआईआर क्र. 0510 में दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत सहित 13 नामजद और एक अज्ञात व्यक्ति पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 190, 191(2), 191(3), 109(1), 296(b) और 351(3) लगाई गई हैं. जो विधि विरुद्ध सभा, दंगा, घातक हथियार का प्रयोग, जान से मारने की नीयत से हमला, सार्वजनिक स्थल पर अभद्रता, जान से मारने की धमकी से संबंधित धाराएँ हैं। इंद्रपाल आदिवासी और हिसाबी राजपूत फिलहाल जमानत पर रिहा हैं। जबकि दिव्या अहिरवार बीते एक महीने से पन्ना जेल में हैं।

इस मामले पर हमने हनुमतपुर चौक प्रभारी भूपाल सिंह भदौरिया से फोन पर आंदोलनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष जानने की कोशिश की तो उन्होंने जवाब दिया कि वो इस समय आधिकारिक काम में व्यस्त हैं, और खुद फोन कर जवाब देंगे। कॉपी लिखे जाने तक उनका जवाब ग्राउंड रिपोर्ट को नहीं मिला।

आंदोलन को नेताओं का समर्थन

मझगाएं परियोजना के खिलाफ चिता आंदोलन। फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी
मझगाय परियोजना के खिलाफ चिता आंदोलन। फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी

24 सितंबर को मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार आंदोलनकारियों से मिले और भटनागर का अनशन तुड़वाया। इसके बाद वो दिव्या अहिरवार से मिलने पन्ना जेल भी गए। 26 सितंबर को मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी भी अहिरवार से मिले। इसके अलावा माकपा नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद वृंदा करात ने पन्ना कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए विस्थापन, मुआवजे और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों के मुद्दे उठाए। करात ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार पर आदिवासी परिवारों को जबरन हटाने का आरोप लगाया। 

28 सितंबर को करात और भटनागर ने अहिरवार से भी मुलाक़ात की. जय किसान संगठन की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, अहिरवार ने बेल लेने से इनकार करते हुए कहा कि वो जेल से भी अपना संघर्ष जारी रखेंगी। अहिरवार ने आरोप लगाया था कि उन्हें “आदिवासियों और किसानों की तरफ से कानूनी सवाल उठाने” के लिए जेल भेजा गया है। उन्होंने “अपनी गिरफ्तारी के तरीके, पुलिस कस्टडी में कथित तौर पर हुए बुरे बर्ताव, मेडिकल जांच न होने और उनका बयान दर्ज न करने” पर भी सवाल उठाए थे।

डूबे घर और मुआवजे का सवाल 

मझगाय परियोजना की वजह से डूबे ग्रामीणों के घर । फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी
मझगाय परियोजना की वजह से डूबे ग्रामीणों के घर। फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी

इंद्रपाल आदिवासी के घर का बड़ा हिस्सा मझगाय बांध परियोजना से डूब चुका है। एक महीने से उनका परिवार बचे हुए टूटे-फूटे घर में रह रहा है। इंद्रपाल आदिवासी ने कहा कि अधिकारियों ने जन्मतिथि के आधार पर उन्हें मुआवजे के लिए अपात्र बता  दिया। जबकि उनके दस्तावेजों में जन्म का साल 2001 दर्ज है यानि उनकी उम्र 25 साल है। इंद्रपाल आदिवासी ने बताया कि उनके परिवार को खेती की जमीन का मुआवजा मिल चुका है लेकिन घर के नुकसान का मुआवजा नहीं मिला।

विवाद जिन तीन परियोजनाओं को लेकर है उनमें केन–बेतवा लिंक परियोजना के साथ पन्ना जिले की दो रुंझ और मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं। 693 करोड़ रुपये की मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजना का उद्देश्य लगभग 1,360 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके तहत लगभग 1,523 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हो सकती है और लगभग 999 परिवारों के विस्थापित होने का अनुमान लगाया गया है। प्रभावित गांवों की कुल आबादी में 16.4% अनुसूचित जाति और 22% जनजाति समुदाय शामिल है। 

जबकि 513 करोड़ रुपये से रुंझ परियोजना के तहत लगभग 14,450 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित करने की योजना है। परियोजना से अजयगढ़ तहसील के लगभग 47 गांवों को लाभ मिलने की बात कही गई है।

इंद्रपाल की मांग है कि अधिकारी नुकसान का आकलन करें और मुआवजे पर फैसला लें। उनकी मां ने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। 

आगे क्या होगा?

जय किसान संगठन की ओर से जिला प्रशासन को सौंपे गए पत्रों में रुंझ और केन-बेतवा परियोजना की कटऑफ डेट 2026 निर्धारित करना, प्रभावित परिवारों को आजीविका के लिए तीन एकड़ कृषि भूमि देना, छूटे हुए परिवारों एवं परिसंपत्तियों का निष्पक्ष पुनः सर्वे, पूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का पालन तथा मुआवजा वितरण की अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि अहिरवार सहित अन्य आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों का निष्पक्ष निराकरण भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। भटनागर ने कहा कि उनका संगठन और प्रभावित परिवार प्रशासन का सहयोग करेंगे बशर्ते वो ईमानदारी और कानून के अनुसार समस्याओं का निराकरण करें। 15 दिनों के लिए आन्दोलन को स्थगित करते हुए भटनागर ने कहा कि सिर्फ आश्वासन पर आंदोलन समाप्त नहीं होगा और मांग पूरी न होने पर संघर्ष दोबारा शुरू किया जाएगा. 

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  • Journalist, focused on environmental reporting, exploring the intersections of wildlife, ecology, and social justice. Passionate about highlighting the environmental impacts on marginalized communities, including women, tribal groups, the economically vulnerable, and LGBTQ+ individuals.

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