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भीषण बारिश के बाद सूरत में बाढ़, कम से कम 21 की मौत   

सूरत की बाढ़ से लेकर सिंधु जलसंधि तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

बिजली उत्पादन पर एल नीनो के प्रभाव पर केंद्र सतर्क, ‘हफ्ते में एक बार’ लगने वाली इंसुलिन ‘एविक्ली’, देश में कपास की बुवाई ने रफ़्तार पकड़ी, मप्र में देश की सबसे अधिक बारिश। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


मुख्य सुर्खियां

केन्द्रीय बिजली मंत्रालय एल नीनो के कारण पनबिजली और पवन ऊर्जा उत्पादन पर पड़ने वाले अनिश्चित प्रभाव की निगरानी कर रहा है। मंत्रालय ने राज्यों को कोयले का पर्याप्त स्टॉक रखने और बिजली की मांग को संतुलित करने के लिए थर्मल पावर स्टेशनों के उचित रखरखाव के निर्देश दिए हैं।


नोवो नॉर्डिक ने भारत में दुनिया की पहली ‘हफ्ते में एक बार’ लगने वाली इंसुलिन ‘एविक्ली’ (Awiqli) लॉन्च की है, जिसकी कीमत 3.73 रुपये प्रति यूनिट है। इस नई खोज से मरीजों को साल में 365 इंजेक्शन के बजाय केवल 52 इंजेक्शन लगाने होंगे, जिससे खर्च में भी 42% तक की कमी आएगी।


मानसून की सक्रियता के साथ भारत में कपास की बुवाई ने रफ्तार पकड़ी है और 5 जुलाई तक 63.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है। महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में बेहतर बारिश के बाद खेती की गतिविधियों में सुधार हुआ है, जिससे अच्छी पैदावार की उम्मीद है।


हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में भारी बारिश और फ्लैश फ्लड के कारण लिप्पा गांव के पास का 100 फीट लंबा लोहे का पुल जलमग्न हो गया है। पुल के असुरक्षित होने से क्षेत्र का संपर्क कट गया है और कई घर भी खतरे की जद में हैं।


जुलाई के पहले सप्ताह में मध्यप्रदेश में देश की सबसे अधिक बारिश (लगभग 9 इंच) दर्ज की गई है। राज्य के देवास में 18 इंच और हरदा में 15 इंच बारिश हुई, हालांकि मौसम विभाग के अनुसार 11 जुलाई के बाद मानसून की गति धीमी हो सकती है।


मध्यप्रदेश के 12 जिलों में किसान मूंग की सरकारी खरीदी सीमा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और मंडियों में 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के घाटे पर फसल बेच रहे हैं। सरकार द्वारा कुल उत्पादन का केवल 25% ही एमएसपी (8,768 रुपये) पर खरीदने के नियम से किसानों में भारी रोष है।

विस्तृत चर्चा

आज की चर्चा में हमारे एडिटर इन चीफ पल्लव जैन से जानिए सूरत की बाढ़ सहित बारिश से जुड़े हुए महत्वपूर्ण अपडेट। 

सूरत में बाढ़ से जन-जीवन अस्त-व्यस्त

हम लगातार बात करते हैं कि कैसे जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनियाभर में चरम मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं। भारत में भी हम लगातार इस तरह के एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स देख रहे हैं और यह इससे देश का हर राज्य पीड़ित है।

गुजरात के सूरत में मॉनसून सीज़न की 30 फीसदी बारिश एक हफ्ते में ही हो गई। यह मामला एक्सट्रीम रेनफॉल का है जब बेहद कम समय में बहुत ज्यादा बारिश हो जाती है। ऐसी कई घटनाएं हमने पिछले वर्ष भी देखी थी और रिपोर्ट की थी।

सूरत में पिछले एक हफ्ते से हो रही बारिश की वजह से कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए, एक हफ्ते बाद जब पानी उतरना शुरु हुआ तो मौत का आंकड़ा 21 तक पहुंच गया। आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि यह कितना भयावह रहा होगा।

राहत और बचाव का कार्य किया जा रहा है, वहीं मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सूरत शहर के लिए 500 करोड़ रुपए अलॉट किये हैं। इसका उद्देश्य बार-बार आने वाली बाढ़ की दिक्कत का ठोस और स्थाई हल निकालना है।

हम लगातार इस बात पर ज़ोर देते रहे हैं कि हमारे शहरों का डेवलपमेंट चरम मौसमी घटनाओं को ध्यान में रखकर किया जाना बेहद ज़रुरी है। अगर हो सके तो उसमें सुधार और रेट्रोफिटिंग कर भविष्य के लिए इन शहरों को तैयार करना होगा। 

अन्य महत्वपूर्ण ख़बरें

अगर हम मॉनसून से ही संबंधित अन्य महत्वपूर्ण खबरों की बात करें तो। अल नीनो की वजह से हायड्रो पॉवर और विंड एनर्जी जनरेशन प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए ऊर्जा मंत्रालय ने सभी हितधारकों को मिटिगेशन मेशर्स प्लान करने को कहा है। 

इस साल बारिश कम होने की आशंका है। ऐसे में हायड्रोपावर जनरेशन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में बिजली की कमी न हो और लोगों को सुचारु रुप से बिजली मिल सके इसके लिए बैकअप प्लान तैयार करना होगा। प्रधानमंत्री के ऑफिस ने भी मंगलवार को देश को एल नीनो से पैदा होने वाली स्थिति के लिए तैयार रहने के लिए बैठक की थी। 

इंडस वॉटर सिस्टम में कम हो रहा पानी

इसीसे जुदा हुआ एक नया अध्ययन सामने आया है कि कैसे जलवायु परिवर्तन हमारे इंडस वॉटर सिस्टम में पानी की उपलब्धता को प्रभावित कर रहा है। 

स्टडी के मुताबिक वर्ष 1951 से 2024 के बीच पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलज नदियों का कैचमेंट एरिया 20 फीसदी घट गया है। 

वहीं पश्चिमी नदियां जैसे इंडस झेलम और चेनाब में 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। 

यह अध्ययन इंडस वॉटर ट्रीटी को सस्पेंड करने के भारत के फैसले को बरकरार रखने में महत्वपूर्ण हो सकती है। भारत चाहता है कि जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर इंडस वॉटर ट्रीटी की शर्ते भारत और पाकिस्तान के बीच दोबारा तय की जाएं।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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