सूरत की बाढ़ में 9 लोगों की मौत, पोषण ट्रैकर से जुड़े साढ़े 8 करोड़ से ज्यादा लोग, कचरे के ढेर में दबे 18 लोग, हाई कोर्ट ने दी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को राहत। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
गुजरात के सूरत में हुई भीषण बारिश के कारण शहर का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है और इस आपदा में 9 लोगों की जान जा चुकी है। प्रशासन ने करीब 3,400 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है, जबकि व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान हुआ है।
एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ऊर्जा भंडारण की क्षमता 2035-36 तक बढ़कर 888 GWh होने का अनुमान है। अक्षय ऊर्जा के लक्ष्यों को हासिल करने और ग्रिड को मजबूत बनाने के लिए ऊर्जा भंडारण अब एक प्रमुख स्तंभ बन गया है।
भारत सरकार के ‘पोषण ट्रैकर’ प्लेटफॉर्म ने 8.93 करोड़ लाभार्थियों का आंकड़ा पार कर लिया है। इस मोबाइल आधारित तकनीक के माध्यम से 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में बच्चों के विकास और पोषण स्तर की वास्तविक समय में निगरानी की जा रही है।
पुणे के मोशी में भारी बारिश के कारण कचरे का एक विशाल ढेर पास की इमारत पर गिर गया, जिससे 18 लोग मलबे में दब गए। सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर अब तक 8 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है और बचाव कार्य जारी है।
जबलपुर हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश की करीब 1.80 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 4 साल का रुका हुआ एरियर देने का बड़ा फैसला सुनाया है। इस आदेश के तहत कार्यकर्ताओं को 1.20 लाख रुपये और सहायिकाओं को 63 हजार रुपये की एकमुश्त राशि दी जाएगी।
भोपाल के लगभग 2 लाख परिवार बोरिंग के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें सीवेज रिसाव के कारण प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। नगर निगम ने लोगों को निजी जल स्रोतों की जांच कराने की सलाह दी है क्योंकि सैंपलों में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं।
विस्तृत चर्चा
आज की चर्चा में हमारे असोसिएट एडिटर वाहिद भट से जानिए मध्य प्रदेश कैबिनेट के पर्यावरण, अधोसंरचना और स्वास्थ्य से जुड़े हुए प्रमुख फैसले।
मध्य प्रदेश की डिजिटल, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय सुधार नीतियां
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने राज्य के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने, स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने और पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी है। स्रोतों के आधार पर इन सुधार नीतियों का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:
राज्य डेटा सेंटर का उन्नयन
सरकार ने सरकारी सेवाओं के डिजिटल परिवर्तन को प्राथमिकता दी है ताकि वे नागरिकों के लिए अधिक कुशल और सुलभ हो सकें।
निवेश और अपग्रेड: राज्य डेटा सेंटर को अपडेट करने के लिए लगभग ₹800 करोड़ की मंजूरी दी गई है। इसमें कंप्यूटर स्टोरेज, सर्वर, नेटवर्क और एक मजबूत डिजास्टर रिकवरी सिस्टम का विस्तार शामिल है।
उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी खराबी या प्राकृतिक आपदा के समय भी सरकारी सेवाएं प्रभावित न हों।
नागरिकों पर प्रभाव: इस अपग्रेड के बाद, सरकार का लक्ष्य 24 घंटे ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करना है। इससे नागरिकों को प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
स्वास्थ्य सुधार: विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती
राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की समस्या को दूर करने के लिए कैबिनेट ने भर्ती के एक नए निजाम (प्रणाली) को मंजूरी दी है।
विकेंद्रीकृत भर्ती: विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती की जिम्मेदारी अब सीधे संबंधित संस्थानों और विभिन्न विभागों की होगी।
लक्ष्य: सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से भर्ती प्रक्रिया आसान होगी और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेषज्ञ इलाज के लिए दूसरे शहरों में नहीं भटकना पड़ेगा।
पर्यावरणीय पहल: शहरी वन
शहरी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी और गिरती वायु गुणवत्ता को देखते हुए कैबिनेट ने एक बड़ी हरित पहल शुरू की है।
शहरी वन परियोजना: 65 शहरों में “शहरी वन” स्थापित करने के लिए ₹100 करोड़ की लागत की मंजूरी दी गई है।
पर्यावरणीय लक्ष्य: इन वनों का उद्देश्य हरियाली बढ़ाना, हवा की गुणवत्ता में सुधार करना और शहरों के बढ़ते तापमान को कम करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये परियोजनाएं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी मददगार साबित हो सकती हैं।
समय सीमा: सरकार ने इन शहरी वनों को 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा था।
केन-बेतवा नदी परियोजना
कैबिनेट ने केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना के सामाजिक प्रभाव पर चर्चा की, जिसे देश की सबसे बड़ी कनेक्टिविटी परियोजनाओं में से एक माना जाता है।
मुआवजे में वृद्धि: यह निर्णय लिया गया है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों को दिए जाने वाले मुआवजे में इजाफा किया जाएगा।
ग्रामीण पुनर्वास: इसका उद्देश्य प्रभावित गांवों के लोगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना और उनकी समस्याओं को कम करना है।
बड़े पैमाने की परियोजनाओं के अलावा, कैबिनेट ने शहरी और नगर निकायों के लिए भी वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है। इस सहायता का उद्देश्य शहरी सेवाओं को बेहतर बनाना और स्थानीय प्रशासन को सशक्त करना है ताकि वे राज्य के विकास लक्ष्यों को पूरा कर सकें।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।
ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।
Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India
We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.
Connect With Us
Send your feedback at greport2018@gmail.com
Newsletter
Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.
When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.
Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.


