...
Skip to content

खजुराहो: जहां हर गर्मी में तापमान का रिकॉर्ड टूटता है

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का पर्यटन नगर खजुराहो हर साल गर्मी के मौसम में राज्य का सबसे तपता शहर बन जाता है। साल 2026 की गर्मी भी इससे अलग नहीं रही। 23 अप्रैल को खजुराहो का तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस ...

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का पर्यटन नगर खजुराहो हर साल गर्मी के मौसम में राज्य का सबसे तपता शहर बन जाता है। साल 2026 की गर्मी भी इससे अलग नहीं रही।

तेज धूप के बावजूद खजुराहो मंदिर परिसर घूमते पर्यटकों का एक समूह। स्थानीय लोगों के अनुसार बढ़ती गर्मी का सीधा असर पर्यटन पर पड़ रहा है, जिससे होटल और दुकान चलाने वालों की आजीविका प्रभावित हो रही है। फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी

23 अप्रैल को खजुराहो का तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। दैनिक जागरण में प्रकाशित आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, 27 अप्रैल को यह बढ़कर 46 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। यह पिछले दस वर्षों में अप्रैल महीने का सबसे अधिक तापमान था।

मई आते-आते हालात और गंभीर हो गए। ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, 19 मई को खजुराहो का तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। यह 29 अप्रैल 1993 के तत्कालीन सर्वकालिक रिकॉर्ड से केवल 0.1 डिग्री कम था, जब यहां तापमान 46.9 डिग्री सेल्सियस पहुंचा था। कुछ ही दिन बाद यह पुराना रिकॉर्ड भी टूट गया। आईएएनएस के अनुसार, 20 और 21 मई को तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो 1993 के 46.9 डिग्री के रिकॉर्ड से अधिक था और इस मौसम का सबसे ऊंचा तापमान साबित हुआ।

khajuraho 1
खजुराहो मंदिर परिसर में तेज धूप के बीच पानी पीता एक बच्चा। इस साल यहां तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी

भारतीय गर्मी के सबसे कठोर दौर, नौतपा के दौरान भी खजुराहो राज्य में शीर्ष पर रहा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 25 मई को यहां तापमान 47.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

यह सिलसिला पिछले वर्षों जैसा ही रहा है। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, 26 मई 2024 को खजुराहो में 46 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ था। उसी दिन सागर और गुना में भी तापमान 46.2 डिग्री सेल्सियस रहा। यानी खजुराहो की भीषण गर्मी कोई एक बार की घटना नहीं, बल्कि दोहराया जाने वाला पैटर्न है।

जून 2026 के आंकड़े मध्य प्रदेश के दूसरे प्रमुख शहरों की तुलना में खजुराहो की स्थिति को और साफ दिखाते हैं। डीडी न्यूज में प्रकाशित आईएमडी भोपाल के आंकड़ों के अनुसार, 11 जून को खजुराहो का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। उसी दिन भोपाल में 42.6 डिग्री, उज्जैन में 42.8 डिग्री, इंदौर में 41.6 डिग्री और जबलपुर में 40.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।

भीषण गर्मी से राहत की उम्मीद में खजुराहो के एक लॉन पर पानी छिड़कता व्यक्ति। कर्क रेखा के समीप स्थित होने के कारण यहां की चट्टानें देर से ठंडी होती हैं, जिससे गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है। फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी

मई के अधिकतर दिनों में भी खजुराहो और भोपाल के तापमान में यही अंतर बना रहा। फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार, 20 मई को भोपाल का तापमान 44.2 डिग्री सेल्सियस था, जबकि खजुराहो में 46.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। दोनों शहरों के बीच दो डिग्री से अधिक का अंतर था।

हालांकि छतरपुर जिले का ही छोटा शहर नौगांव मई के कुछ दिनों में खजुराहो से भी अधिक गर्म रहा। फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार, 20 मई को नौगांव का तापमान 47 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबकि उसी दिन खजुराहो में 46.4 डिग्री सेल्सियस तापमान था।

भौगोलिक बनावट और मानवीय हस्तक्षेप, दोनों जिम्मेदार

महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के अध्यक्ष डॉ आर एन सिसोदिया बताते हैं कि किसी भी जगह का तापमान वहां की भौगोलिक संरचना और स्थिति से तय होता है। खजुराहो कर्क रेखा के समीप है और यहां की चट्टानें गर्म होने के बाद देर से ठंडी होती हैं। इसी वजह से यहां गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है। डॉ सिसोदिया बढ़ते निर्वनीकरण को भी तापमान बढ़ने का एक बड़ा कारण मानते हैं।

भीषण गर्मी के बीच खजुराहो का ऐतिहासिक मंदिर परिसर। कर्क रेखा के नजदीक होने और इलाके की चट्टानों के देर से ठंडा होने के कारण यह शहर हर साल मध्य प्रदेश का सबसे तपता स्थान बन जाता है। फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी

सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर इस भौगोलिक कारक में विकास परियोजनाओं की भूमिका भी जोड़ते हैं। वे बक्स्वाहा और पन्ना-सिंगरौली रेल लाइन जैसी परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई क्षेत्र की गर्मी को और बढ़ा रही है।

तपिश का असर आम जिंदगी और कारोबार पर

खजुराहो के सेवाग्राम इलाके में किराने की दुकान चलाने वाले मुकेश कुमार मिश्रा बताते हैं कि यहां हर साल तापमान बहुत अधिक रहता है। कई बार तो तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। इसका सीधा असर उनके कारोबार पर पड़ता है। उन्हें दुकान का एक शटर गिराकर रखना पड़ता है, जिससे ग्राहक अंदर बैठ ही नहीं पाते। दिनभर लगातार गर्मी रहने से उनका व्यापार भी कमजोर हो जाता है।

खजुराहो निवासी मनीष सिंह कहते हैं कि यह शहर मुख्यतः पर्यटन से चलता है, लेकिन भीषण गर्मी की वजह से पर्यटकों की संख्या अचानक घट जाती है। इसका सीधा नुकसान उन स्थानीय लोगों को उठाना पड़ता है जो होटल, रेस्टोरेंट या अन्य दुकानें चलाकर अपनी आजीविका कमाते हैं।

खजुराहो की गर्मी अब सिर्फ मौसम का आंकड़ा नहीं रही। यह भौगोलिक बनावट, वनों की कटाई और बड़ी परियोजनाओं के आपसी जुड़ाव की कहानी बन चुकी है, जिसका असर सीधे स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है।


भारत में स्वतंत्र पर्यावरण पत्रकारिता को जारी रखने के लिए ग्राउंड रिपोर्ट को आर्थिक सहयोग करें।

यह भी पढ़ें 

एफपीओ: साथ आए तो बढ़ी आमदनी, मिलकर करोड़ों कमा रहे ये किसान

इंटिग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट: कुछ की लागत बची, विस्तार का सवाल अनुत्तरित

पर्यावरण से जुड़ी खबरों के लिए आप ग्राउंड रिपोर्ट को फेसबुकट्विटरइंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सएप पर फॉलो कर सकते हैं। अगर आप हमारा साप्ताहिक न्यूज़लेटर अपने ईमेल पर पाना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें। 

Author

  • Journalist, focused on environmental reporting, exploring the intersections of wildlife, ecology, and social justice. Passionate about highlighting the environmental impacts on marginalized communities, including women, tribal groups, the economically vulnerable, and LGBTQ+ individuals.

    View all posts

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

Connect With Us

Send your feedback at greport2018@gmail.com

Newsletter

Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.

When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.

Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.

EXPLORE MORE

LATEST

mORE GROUND REPORTS

Environment stories from the margins