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2.5 करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं: राष्ट्रपति मुर्मु

राष्ट्रपति ने मध्य प्रदेश सरकार की सराहना करते हुए कहा कि रोग के स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले पूरा हो गया है।
President Droupadi Murmu sickle cell

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विश्व सिकल सेल दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश सरकार के काम की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत तय किया गया स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले पूरा हो गया है।

राष्ट्रपति मुर्मु 19 जून को खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 के तहत हुआ। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष की आयु तक के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा हो चुका है। उन्होंने इसे आनुवंशिक रोगों की जांच से जुड़ी देश की सबसे बड़ी पहलों में से एक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इस उपलब्धि में मध्य प्रदेश का बड़ा योगदान है, जहां सवा करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग तीन साल पहले मध्य प्रदेश के शहडोल से इस मिशन की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि यह मिशन केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि जनजातीय स्वास्थ्य, आनुवंशिक जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़ा प्रयास है।

उन्होंने आगे कहा कि आईसीएमआर, ट्राइबल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट, एम्स, एनएचएम और डब्ल्यूएचओ जैसी संस्थाओं के अध्ययन से पता चला कि भारत में लगभग 2 से 2.5 करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस रोग का असर मध्य भारत की जनजातीय पट्टी में सबसे ज्यादा है।

President Droupadi Murmu Dr Mohan Yadav
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विश्व सिकल सेल दिवस के मौके पर ओंकारेश्वर में कार्यक्रम में शामिल हुईं | खंडवा | फ़ोटो: जनसंपर्क विभाग मप्र

राष्ट्रपति मुर्मु ने बताया कि अब तक लगभग ढाई लाख लोगों में सिकल सेल से जुड़ा रोग पाया गया है। साथ ही 20 लाख से अधिक लोग इस रोग के वाहक के रूप में पहचाने गए हैं। उन्होंने कहा कि वाहकों में बीमारी के लक्षण नहीं दिखते, इसलिए उन्हें भविष्य के खतरे का अंदाजा नहीं होता।

राष्ट्रपति मुर्मु ने मध्य प्रदेश में हुए कई कदमों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पॉइंट ऑफ केयर टेस्ट की सुविधा आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक पहुंचाई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल चले “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” में 4 लाख से ज्यादा महिलाओं की स्क्रीनिंग हुई। उन्होंने प्रदेश में चल रही “सिकल मित्र” पहल का भी उल्लेख किया, जिसके तहत स्वयंसेवी संगठनों और एनसीसी कैडेट्स को प्रशिक्षित किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मिशन में मध्य प्रदेश ने रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 32 लाख लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को चिह्नित कर परामर्श और इलाज दिया जा रहा है, और भावी पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए सिकल सेल कार्ड बांटे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 3700 से अधिक सिकल मित्र जन जागरूकता अभियान में शामिल हैं।

डॉ. यादव ने यह भी कहा कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है, जबकि पिछली सरकारों के 55 साल के दौर में यह संख्या सिर्फ 5 थी।

उप-मुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि मध्य प्रदेश ने इस मिशन में सबसे अच्छा काम किया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 के अंत तक 1 करोड़ 60 लाख लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बयान में कहा, “सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन के लिए हमारी सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है। अब तक 1 करोड़ 32 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। रोग प्रबंधन के तहत गर्भवती महिलाओं को समुचित उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही, जेनेटिक काउंसलिंग के माध्यम से सिकल सेल कार्ड प्रदान किए जा रहे हैं। प्रदेश में 3,700 से अधिक सिकल सेल मित्र जागरूकता, पहचान एवं उपचार संबंधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।”


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