हर गुरुवार केंद्रीय जल आयोग (CWC) एक बुलेटिन जारी करता है, जिसमें देश के 166 प्रमुख जलाशयों के जलस्तर की जानकारी होती है। 30 जुलाई 2026 के बुलेटिन के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश के कई बड़े बांधों में मानसून के इस चरण में सामान्य से कम पानी है।
30 जुलाई तक केंद्रीय जल आयोग की निगरानी वाले मध्य प्रदेश के 11 जलाशयों में कुल 13.463 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) लाइव स्टोरेज दर्ज किया गया। यह उनकी कुल 31.175 BCM क्षमता का 43.19 प्रतिशत है। एक साल पहले इसी तारीख को इन जलाशयों में 72.63 प्रतिशत पानी था। हालांकि राज्य का कुल आंकड़ा उसके 10 साल के सामान्य स्तर 49.66 प्रतिशत से अभी भी नीचे है।
सबसे चिंताजनक स्थिति होशंगाबाद जिले के तवा बांध की है। 30 जुलाई तक तवा में उसकी लाइव स्टोरेज क्षमता का 13.58 प्रतिशत पानी था। पिछले साल इसी तारीख को यहां 83.62 प्रतिशत पानी था, जबकि इसका 10 साल का सामान्य स्तर 62.35 प्रतिशत है। यानी यह अपने सामान्य स्तर से करीब 49 प्रतिशत अंक नीचे है। तवा नदी पर बना यह बांध होशंगाबाद और हरदा के सिंचित क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराता है।
अन्य प्रमुख जलाशयों की स्थिति भी कमजोर रही। जबलपुर के पास स्थित बरगी जलाशय अपनी क्षमता के 42.45 प्रतिशत पर है, जबकि इसका सामान्य स्तर 58.77 प्रतिशत है। पिछले साल इसी समय यहां 68.59 प्रतिशत पानी था। राज्य के सबसे बड़े जलाशयों में शामिल इंदिरा सागर में 26.40 प्रतिशत पानी है, जबकि इसका सामान्य स्तर 42.06 प्रतिशत और पिछले साल का स्तर 79.81 प्रतिशत था।
बेतवा पुनर्जीवन कार्यक्रम से जुड़े सेवानिवृत्त वरिष्ठ नौकरशाह डॉ. आर.के. पालीवाल कहते हैं कि जलाशयों में कम पानी भरने की मुख्य वजह कमजोर मानसून है, न कि जलाशयों का खराब संचालन। उनके अनुसार, सामान्य मानसून में जलाशय अपने कैचमेंट से आने वाले अधिकतम पानी को रोकने के लिए बनाए जाते हैं। यदि बारिश कम होगी तो वे क्षमता के अनुसार नहीं भर पाएंगे। खराब संचालन तब माना जाएगा जब तकनीकी गड़बड़ी या अनियोजित पानी की हानि जैसी स्थिति हो। इस बार असली वजह कम और अनियमित बारिश है, जिसकी आशंका वैज्ञानिक पहले ही एल नीनो के प्रभाव के कारण जता चुके थे।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल को जारी अपने दीर्घकालिक मानसून पूर्वानुमान में मध्य भारत में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई थी। पूर्वानुमान में एल नीनो के मानसून के दौरान विकसित होने की भी संभावना व्यक्त की गई थी।
22 जुलाई तक भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के आधार पर प्रकाशित हुई द प्रिंट की एक रिपोर्ट अनुसार, मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान सामान्य से 14 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। राज्य के 55 जिलों में केवल 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई। अलीराजपुर में वर्षा 78 प्रतिशत कम दर्ज की गई, जबकि रीवा में 64 प्रतिशत और तवा बांध के जलग्रहण क्षेत्र वाले नर्मदापुरम में 33 से 45 प्रतिशत की कमी रही।
डॉ. पालीवाल के अनुसार, सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि मानसून के बाकी हिस्से में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो अगले साल पानी की कमी की स्थिति बन सकती है। इन जलाशयों से पूरे साल सिंचाई और पेयजल के लिए पानी छोड़ा जाता है।
केंद्रीय जल आयोग के बुलेटिन में शामिल वर्षा के आंकड़े भी इसी स्थिति की पुष्टि करते हैं। 16 जुलाई के केंद्रीय जल आयोग के बुलेटिन में शामिल IMD के वर्षा आंकड़े भी इसी प्रवृत्ति की पुष्टि करते हैं। उस समय पूर्वी मध्य प्रदेश उप-विभाग में सामान्य से 26 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एल नीनो (El Niño) के मजबूत होने और प्रतिकूल मैडन-जूलियन ऑसिलेशन (Madden-Julian Oscillation) जैसी व्यापक मौसमी परिस्थितियां इस साल कमजोर मानसून की प्रमुख वजह रही हैं। जून के दौरान मध्य भारत में देश का सबसे बड़ा वर्षा घाटा दर्ज किया गया था। जुलाई में कुछ सुधार हुआ, लेकिन वह पर्याप्त नहीं रहा।
इसरो के रिवर बेसिन एटलस के मुताबिक अकेले तवा बांध का सिंचाई कमांड क्षेत्र लगभग 2.47 लाख हेक्टेयर है और इससे एक जलविद्युत परियोजना भी जुड़ी है। बरगी और इंदिरा सागर भी बड़े सिंचाई क्षेत्रों और जलविद्युत उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. पालीवाल कहते हैं कि जलाशयों में कम पानी का असर भूजल पुनर्भरण पर भी पड़ता है। जलाशय में जितना अधिक पानी होगा, उतना अधिक रिसाव होगा और आसपास के कुएं तथा बोरवेल रिचार्ज होंगे। पानी कम रहने पर भूजल पुनर्भरण घट सकता है और आसपास का भूजल स्तर नीचे जा सकता है।
मध्य प्रदेश की स्थिति अकेली नहीं है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, देश के 166 निगरानी वाले जलाशयों में 30 जुलाई तक कुल लाइव स्टोरेज उनकी क्षमता का 44.39 प्रतिशत था। यह पिछले साल के इसी समय उपलब्ध स्टोरेज का 65.37 प्रतिशत तथा 10 साल के सामान्य स्तर का 92.99 प्रतिशत है।
मध्य प्रदेश के लिए अब मानसून के आने वाले सप्ताह अहम होंगे। यदि अगस्त तक बारिश की कमी कम नहीं हुई, तो तवा, बरगी और इंदिरा सागर जैसे प्रमुख जलाशय सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच पाएंगे और राज्य को खरीफ सीजन के दूसरे हिस्से में अपने प्रमुख जल स्रोतों में कम पानी के साथ आगे बढ़ना पड़ सकता है।
बैनर इमेज: जबलपुर के पास स्थित बरगी जलाशय अपनी क्षमता के 42.45 प्रतिशत पर है, जबकि इसका सामान्य स्तर 58.77 प्रतिशत है। फोटो क्रेडिट: ग्राउंड रिपोर्ट
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