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मशहूर ईकोलॉजिस्ट माधव गाडगिल का 83 की उम्र में निधन

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-110 है। गुरुवार, 08 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए माधव गाडगिल के पर्यावरण के योगदान और मध्य प्रदेश में प्रदूषण को लेकर एनजीटी के निर्देश के बारे में।


मुख्य सुर्खियां

कुत्तों के काटने के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्होंने आवारा कुत्तों को मारने का आदेश नहीं दिया है। कोर्ट ने कहा कि सड़कें संस्थान लोगों के हित में कुत्तों से मुक्त होना चाहिए। 


अमेरिका ने रूस के झंडे वाले तेल टैंकर ‘मरीनेरा’ को उत्तरी अटलांटिक महासागर में जब्त कर लिया। यह वेनेजुएला से आ रहा दूसरा ऑइल टैंकर है जिसे अमेरिका ने जब्त किया है।


झारखण्ड में एक ही रात में एक हाथी के हमले में 6 लोगों की मौत हो गई। वहीं करीब 7 लोग घायल हैं।


दिल्ली में बुधवार को अधिकतम तापमान 16.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। एक्सपर्ट्स ने कहा कि 15 जनवरी तक उत्तर भारत में ठंड और बढ़ेगी।


मध्य प्रदेश में बीती रात शहडोल का कल्याणपुर सबसे सर्द रहा। यहां न्यूनतम तापमान 2.7 डिग्री दर्ज किया गया।


मध्य प्रदेश में विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) कानून का दायरा बढ़ा दिया गया है। इसके तहत गोशाला निर्माण, डेयरी, उद्यानिकी और गंगा जल संवर्धन अभियान को शामिल किया गया है। 

चर्चा 

माधव गाडगिल का पर्यावरण में योगदान

मशहूर ईकोलॉजिस्ट माधव गाडगिल का 82 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने अपना जीवन पारिस्थितिकी (ecology) और संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया।

जन-केंद्रित संरक्षण: माधव गाडगिल हमेशा ‘पीपल सेंट्रिक कंजर्वेशन’ के समर्थक रहे, जहां स्थानीय लोगों को पर्यावरण संरक्षण का हिस्सा बनाया जाता है। उन्होंने विकास के उन मॉडलों के खिलाफ चेतावनी दी थी जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।

गाडगिल रिपोर्ट और पश्चिमी घाट: 2010 में, केंद्र सरकार ने पश्चिमी घाट (Western Ghats) के पारिस्थितिक प्रभाव के अध्ययन के लिए एक पैनल बनाया था, जिसके अध्यक्ष गाडगिल थे। ‘गाडगिल रिपोर्ट’ ने पश्चिमी घाट को बेहद संवेदनशील इलाका बताते हुए वहाँ खनन, बड़े बांधों और भारी निर्माण कार्यों पर सख्त पाबंदी लगाने की सिफारिश की थी।

विवाद और कस्तूरीरंगन समिति: गाडगिल रिपोर्ट की सिफारिशों को कई राज्यों ने गंभीरता से नहीं लिया। बाद में, गाडगिल रिपोर्ट की समीक्षा के लिए कस्तूरीरंगन समिति बनाई गई, जिसने एक ‘सॉफ्ट रिपोर्ट’ पेश की। स्रोतों के अनुसार, कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट को मान लिया गया, लेकिन बाद में पश्चिमी घाट में वही विनाशकारी प्रभाव देखे गए जिनकी चेतावनी गाडगिल ने दी थी।

पद्म पुरस्कार: 2011 में उन्होंने पद्मश्री पुरस्कार लेने से मना कर दिया था।

‘जॉइनिंग द डॉट्स’ रिपोर्ट: गाडगिल उस समिति का भी हिस्सा थे जिसने सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों के खत्म होने के कारणों की जांच की थी। यह रिपोर्ट वन्यजीव संरक्षण में मानवीय प्रभाव और महत्व को दर्शाती है।


मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण पर एनजीटी का आदेश

7 जनवरी को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मध्य प्रदेश में बढ़ते वायु प्रदूषण, विशेष रूप से भोपाल के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है।

वायु प्रदूषण का संकट और प्रभावित शहर: मध्य प्रदेश के आठ शहरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, देवास, सागर और सिंगरौली—में वायु प्रदूषण का संकट बहुत गहरा है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने इन शहरों को ‘नॉन-अटेनमेंट’ (Non-attainment) घोषित कर दिया है, जिसका अर्थ है कि ये शहर पिछले 5 वर्षों से स्वच्छ हवा के मानकों को पूरा करने में विफल रहे हैं।

भोपाल में प्रदूषण के खतरनाक आंकड़े: भोपाल में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक है। यहां PM 10 का स्तर 130 से 190 के बीच है, जबकि सुरक्षित मानक 60 है। इसी तरह, PM 2.5 का स्तर 80 से 100 तक पहुँच गया है, जो 40 से नीचे होना चाहिए। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) दिन में 280 से ऊपर और रात में 300 को पार कर जाता है, जो इसे ‘वेरी पुअर’ से ‘सीवियर’ कैटेगरी में डाल देता है।

प्रदूषण के मुख्य कारण

पराली जलाना: 2025 की शुरुआत में ही आसपास के इलाकों में पराली जलाने की 31,000 से अधिक घटनाएँ दर्ज की गईं।

निर्माण कार्य और धूल: कंस्ट्रक्शन साइट्स पर धूल नियंत्रण के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

वाहनों का धुआं: अकेले भोपाल में 13 लाख से अधिक गाड़ियां हैं, जिनमें से कई के पास वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं हैं।

कचरा जलाना: भानपुर लैंडफिल जैसी जगहों पर और खुले में कचरा जलाना भी एक बड़ा कारण है।

भौगोलिक स्थिति: भोपाल की बनावट एक कटोरे (bowl) की तरह है, जिससे प्रदूषित हवा वहीं फंसी रह जाती है।

NGT की सख्त टिप्पणी और निर्देश: ट्रिब्यूनल ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार प्रदूषण नियंत्रित करने में विफल रही है और यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। एनजीटी ने सात सदस्यों की एक विशेष समिति बनाई है, जिसमें सरकारी अधिकारी और सीपीसीबी के विशेषज्ञ शामिल होंगे। राज्य सरकार को अब दिल्ली की तर्ज पर ‘ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान’ (GRAP) तैयार करना होगा और हर जिले के लिए विशिष्ट योजना बनानी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को होगी।

माधव गाडगिल की चेतावनियां और मध्य प्रदेश के शहरों की स्थिति हमें याद दिलाती हैं कि प्रकृति एक बैंक खाते की तरह है; यदि हम केवल बिना सोचे-समझे निकासी (संसाधनों का दोहन) करते रहेंगे और उसमें कुछ जमा (संरक्षण) नहीं करेंगे, तो अंततः खाता खाली (पर्यावरणीय आपदा) हो जाएगा।

ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।

Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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