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जुलाई में भी देश के कई जलाशय खाली

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पर्यावरण आज में उत्तराखंड में पेड़ काटने पर रोक, जम्मू-कश्मीर और नागालैंड में बाढ़-भूस्खलन से हुई मौतें, हिमाचल में बारिश का रेड अलर्ट, यमुना नदी के सिकुड़ते बाढ़ क्षेत्र पर नई स्टडी, छत्तीसगढ़ की नदियों में प्रदूषण रोकने की योजना, और भारतीयों में बढ़ते लिपिड असंतुलन की खतरनाक रिपोर्ट शामिल है। साथ ही जानेंगे देश के जलाशयों की मौजूदा हालत।

आज की प्रमुख हेडलाईन्स


उत्तराखंड के देहरादून में भनियावाला ऋषिकेश सड़क के चौड़ीकरण का विरोध कर रहे दर्जनों लोगों पर एफआईआर करने के बाद सरकार ने यहां पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री धामी ने मुख्य सचिव और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पेड़ काटने का काम दोबारा शुरू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों, स्थानीय निवासियों, जन-प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ विस्तार से बातचीत करें।

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के इस प्रोजेक्ट में एयरपोर्ट के पास 19 किलोमीटर लंबी सड़क को चौड़ा करने का प्रस्ताव है और इसके लिए 4,369 पेड़ों को काटने की योजना बनाई गई थी, जिसका लोग विरोध कर रहे हैं।


जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी में रविवार सुबह भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन हुआ। इसमें कई बच्चों समेत कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई, बड़ी संख्या में वाहन बह गए और कई रिहायशी व कमर्शियल इमारतों को नुकसान पहुंचा है। अकेले पुंछ जिले में 16 लोगों की मौत हुई, और राजौरी शहर में संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है।

वहीं नागालैंड के मोन ज़िले में भी भारी बारिश के कारण कई जगहों पर हुए भूस्खलन में रविवार को कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए हैं।

इसके साथ ही मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में 20 और 21 जुलाई को चंबा, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में एक्सट्रीम रेनफॉल का रेड अलर्ट जारी किया है। संभावित खतरों को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट किया गया है।


पिछले दो दशकों में यमुना नदी का बाढ़ क्षेत्र एक तिहाई सिकुड़ा है। इसके ऐतिहासिक मैप्स और सैटेलाइट इमेजरी की स्टडी से पता चला कि बराज, तटबंध, और शहरीकरण की वजह से यमुना का नैचुरल सीज़नल फ्लो और बारिश में फैलाव प्रभावित हुआ है। यह स्टडी दिल्ली यूनिवर्सिटी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च भोपाल द्वारा इस साल अप्रैल में प्रकाशित की गई।


छत्तीसगढ़ में शिवनाथ और खारुन नदियों में बिना ट्रीट किए औद्योगिक कचरा बहाया जा रहा था जिससे नदी का पानी काला पड़ गया था और मछलियां मरने लगी थीं, इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी। अब सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए नदियों के उद्गम स्थलों की जियो-टैगिंग, ज़िले के हिसाब से नदियों को पुनर्जीवित करने की योजनाएँ, नदी के बहाव, भूजल स्तर और पानी की गुणवत्ता की वैज्ञानिक निगरानी, और विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा तकनीकी जाँच करने का फैसला किया है।


ICMR-INDIAB के अध्ययन के नतीजों से पता चला है कि भारत में 87% भारतीय वयस्कों में कम से कम एक लिपिड लेवल असामान्य होता है, जिससे डिस्लिपिडेमिया — यानी खून में फैट का असंतुलित स्तर — जैसी स्थिति बन जाती है। इसे बिना लक्षणों वाली ‘साइलेंट महामारी’ कहा गया है।


आज की चर्चा: जुलाई में भी कई जलाशयों में नहीं सुधरा जलस्तर

जुलाई महीने में मॉनसून ने फिर से रफ्तार पकड़ी है, जिससे कुछ इलाकों में बारिश बढ़ी और जलाशयों के जलस्तर में सुधार हुआ है। लेकिन इसके बावजूद, हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं।

रिपोर्ट: चंद्रप्रताप तिवारी


Mohanpura Dam Rajgarh
राजगढ़, मध्य प्रदेश का मोहनपुरा जलाशय

जुलाई के पहले पखवाड़े में मॉनसून ने रफ्तार पकड़ी, जिससे कुछ इलाकों में बारिश बढ़ी और जलाशयों के जलस्तर में थोड़ा सुधार हुआ। लेकिन हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं।

केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार, 16 जुलाई 2026 तक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में 63.249 अरब घन मीटर (BCM) पानी था, यानी कुल क्षमता का केवल 34.46%। पिछले साल इसी समय यह भंडारण 103.955 BCM था, जबकि सामान्य भंडारण 64.427 BCM माना जाता है। इस तरह मौजूदा भंडारण पिछले साल की तुलना में सिर्फ 60.84% और सामान्य स्तर का 98.17% है। दो हफ्ते पहले, 2 जुलाई को स्थिति और खराब थी, जब जलाशयों में केवल 26% पानी था।

17 प्रमुख जलाशयों में अब भी सामान्य से 50% से कम पानी है। इनमें बिहार का चंदन बांध, गुजरात का उंड-1, हिमाचल का कोल बांध, कर्नाटक के कृष्णराज सागर, नारायणपुर, तट्टीहल्ला और तुंगभद्रा, केरल का पेरियार, मध्य प्रदेश का तवा, तमिलनाडु के अलियार, लोअर भवानी और वैगई, तेलंगाना के कड्डम, नागार्जुन सागर और सिंगूर, उत्तर प्रदेश का माउदहा और पश्चिम बंगाल का कंगसाबती जलाशय शामिल हैं। दो हफ्ते पहले ऐसे जलाशयों की संख्या 34 थी, जो अब घटकर 17 रह गई है।

166 में से 57 जलाशयों में सामान्य क्षमता का 80% से कम पानी है, जिनमें कर्नाटक सबसे आगे (10 जलाशय) है, उसके बाद महाराष्ट्र (8), तेलंगाना (7) का स्थान है।

सबसे चिंताजनक स्थिति पश्चिम बंगाल की है, जहां भंडारण सामान्य से 55.83% कम है। तेलंगाना में भी भंडारण सामान्य से 46.59% कम है। बिहार का चंदन बांध सबसे बुरी हालत में है, जहां सामान्य जलस्तर का केवल 5.47% पानी बचा है। पंजाब का इकलौता प्रमुख जलाशय भी क्षमता के 29.65% पर है।

झारखंड में स्थिति में हल्का सुधार हुआ है, लेकिन अब भी सामान्य से करीब 19% कम भंडारण है। CWC के अनुसार महानदी-पेन्नार, कावेरी और पश्चिम की ओर बहने वाली नदी घाटियों में भंडारण सामान्य से 20-60% कम है।

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