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मझगांय चिता आंदोलन में बड़ा मोड़, अमित भटनागर समेत प्रभावितों ने दी गिरफ्तारी 

मझगांय बांध प्रभावितों का चिता आंदोलन 19वें दिन गिरफ्तारी तक पहुंच गया। अमित भटनागर समेत कुछ प्रभावित गिरफ्तार हुए। आंदोलनकारी मुआवजे और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। 
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चिता आंदोलन एवं जल सत्याग्रह कर रहे रुंझ-मंझगांय बांध के प्रभावित। फोटो: पवन पटेल

अपने प्रदर्शन के 19वें दिन सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर, कुछ प्रभावितों के साथ गिरफ्तार कर लिए गए है। उनका कहना है कि पिछले तीन दिनों से पुलिस द्वारा आंदोलनकारियों, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, के साथ लाठीचार्ज और अभद्रता की जा रही है। भटनागर ने अपने समर्थकों के साथ यह गिरफ्तारी स्वयं दी है। यह उनका कहना है कि जेल के अंदर से भी उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। 

पन्ना जिले में निर्माणाधीन मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों का आंदोलन अब भी जारी है। 27 सितम्बर की रात आए वीडियो में प्रदर्शन स्थल में पुलिस एवं प्रदर्शनकारियों के बीच मुठभेड़ दिखाई दी। भटनागर ने पुलिस बल द्वारा महिलाओं पर अत्याचार का आरोप लगाया है। उन्होंने  28 सितम्बर को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आमरण अनशन का ऐलान किया है। 28 सितंबर की शाम आंदोलन का नेतृत्व कर रहे दिव्या अहिरवार एवं हिसाबी राजपूत को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार, 30 सितंबर को, भटनागर सैकड़ों प्रभावितों के साथ पन्ना जिले के अजयगढ़ में गिरफ्तारी देने पहुंचे थे। भटनागर और उनके साथ कुछ प्रभावितों को पन्ना जिले की हनुमतपुर चौकी में गिरफ्तार कर लिया गया है।

प्रभावित आदिवासियों के साथ अमित भटनागर। फोटो: पवन पटेल

जुलाई के प्रदर्शन से सितंबर के चिता आंदोलन तक

जुलाई में छतरपुर जिले के कूपी गांव में अमित भटनागर ने लंबा प्रदर्शन और आमरण अनशन किया था। इसमें केन-बेतवा रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट, रुंझ-मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना और बरेठी सौर परियोजना से प्रभावित विस्थापित परिवार शामिल हुए थे। 19 जुलाई को पुलिस कार्रवाई के बाद यह प्रदर्शन समाप्त हो गया था। इसके बाद रुंझ-मझगांय परियोजना से प्रभावित लोगों को बसों से छतरपुर से पन्ना भेजा गया था।

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प्रदर्शन खत्म होने के बाद केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित गांवों में दोबारा सर्वे शुरू हुआ। मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने भी प्रभावित इलाकों का दौरा किया। हालांकि, रुंझ-मझगांय परियोजना से प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनकी मुआवजे और पुनर्वास से जुड़ी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद 11 सितंबर को जय किसान संगठन के बैनर तले अमित भटनागर के नेतृत्व में पन्ना में मौजूदा चिता आंदोलन शुरू हुआ।      

बारिश और जलभराव के बीच जारी है सत्याग्रह

लगातार बारिश और जलभराव के बावजूद प्रभावित परिवारों ने पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील में आने वाले बांध के कैचमेंट क्षेत्र के बनहरीकला टपरिया में सत्याग्रह किया। आंदोलनकारी लंबे समय से लंबित मुआवजे, पुनर्वास और नुकसान के आकलन की मांग कर रहे हैं।

पन्ना में सांकेतिक चिता एवं फांसी आंदोलन के लिए तैयार की गई चिताएं एवं फांसी के फंदे। फोटो: पवन पटेल

आंदोलन के दौरान प्रभावित लोगों ने अलग-अलग तरीके से विरोध दर्ज कराया है। इनमें चिता सत्याग्रह और जल सत्याग्रह शामिल हैं। 24 सितंबर को आंदोलनकारियों ने प्रतीकात्मक रूप से हाथ-पैरों में लोहे की बेड़ियां पहनकर ‘बेड़ी सत्याग्रह’ भी किया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही डूब क्षेत्र में पानी पहुंच रहा है।

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प्रदर्शनकारियों के अनुसार, परियोजना से प्रभावित मंडलिया, टपरिया और कुंवरपुर समेत कई गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। उनका दावा है कि कुछ घरों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया है, जिससे अनाज, कपड़े और घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा है। आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि कई महिलाएं और अन्य प्रदर्शनकारी लगातार बारिश और पानी में रहने के कारण बीमार पड़े हैं तथा कुछ लोगों के पैरों में घाव और त्वचा संबंधी समस्याएं हुई हैं। 

क्या है मंझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना 

मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजना का उद्देश्य लगभग 1,360 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए लगभग 693 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। बताया गया है कि इससे पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील के लगभग 38 गांवों को लाभ मिलेगा।

मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग के एक परियोजना दस्तावेज़ के अनुसार मझगाय परियोजना के तहत लगभग 1,523 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई है जिसमें राजस्व भूमि, निजी भूमि और वन भूमि शामिल है। इस परियोजना के कारण 930 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है और लगभग 999 परिवारों के विस्थापित होने का अनुमान लगाया गया है।

मुआवजा और पुनर्वास पर लंबे समय से विवाद

प्रभावित परिवारों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अभी भी सभी पात्र परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, कुछ परिवारों को घोषित 12.5 लाख रुपये के पैकेज के मुकाबले केवल पांच लाख रुपये तक मिले हैं। मकान, कुएं, पेड़ और अन्य परिसंपत्तियों के मुआवजे से जुड़े भुगतान भी कई मामलों में लंबित होने का आरोप भी लगाया जा रहा है।

आंदोलनकारियों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए मांग की है कि प्रभावित परिवारों को पूरा मुआवजा और पुनर्वास उपलब्ध कराने के बाद ही विस्थापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। उन्होंने बारिश और जलभराव से हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराने की भी मांग की है।

प्रदर्शन करतीं प्रभावित आदिवासी महिलाऐं। फोटो: पवन पटेल

दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि पन्ना जिला प्रशासन प्रभावित परिवारों का नए सिरे से सर्वे करा रहा है और मुआवजे का वितरण किया जा रहा है। प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के दावों के बीच मुख्य विवाद मुआवजे की राशि, पात्र परिवारों की पहचान, परिसंपत्तियों के आकलन और पुनर्वास की स्थिति को लेकर है।

इस बीच आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें पूरी होने तक सत्याग्रह जारी रहेगा। मझगांय परियोजना से जुड़े इस आंदोलन में प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों का मुख्य जोर पूर्ण मुआवजा, पुनर्वास और जलभराव से प्रभावित परिवारों के नुकसान के आकलन पर है।

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  • Journalist, focused on environmental reporting, exploring the intersections of wildlife, ecology, and social justice. Passionate about highlighting the environmental impacts on marginalized communities, including women, tribal groups, the economically vulnerable, and LGBTQ+ individuals.

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