मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में हाथियों की आवाजाही के बीच एक हाथी की करंट लगने से मौत हो गई। घटना मलकपुर गांव के पास शुक्रवार रात की बताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हाथियों का जोड़ा गांव के पास पहुंचा था। इसी दौरान एक हाथी बिजली के तार के संपर्क में आ गया। बताया जा रहा है कि बिजली का तार उसकी सूंड में फंस गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले में वैधानिक कार्रवाई शुरू की है। रीवा के वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) लोकेश नीरापुरे के अनुसार, हाथी का पोस्टमार्टम मलकपुर के पास ही कराया जाएगा। पोस्टमार्टम और जांच के बाद मौत की परिस्थितियां अधिक स्पष्ट हो सकेंगी।
छह महीने से क्षेत्र में घूम रहा था हाथियों का जोड़ा
हाथियों का यह जोड़ा पिछले करीब छह महीने से मऊगंज, रीवा और सीधी जिलों के अलग-अलग वन क्षेत्रों में घूम रहा था। हाल के दिनों में दोनों हाथी मऊगंज के हनुमना क्षेत्र में पहुंचे थे। यहां करीब छह दिन तक हाथियों की आवाजाही रही।
इस दौरान कुछ गांवों में फसलों को नुकसान पहुंचने और घरों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं भी सामने आई थीं। इसके बाद 14 सितंबर को हाथियों का जोड़ा हनुमना क्षेत्र के तुर्रा पहाड़ को पार कर सीधी जिले के मधुगांव के जंगल क्षेत्र में पहुंच गया था।
पिछले करीब पांच दिनों से दोनों हाथी मऊगंज और सीधी की सीमा से लगे जंगलों में घूम रहे थे। शुक्रवार रात वे दोबारा मऊगंज की ओर आए और मलकपुर के पास पहुंच गए। इसी दौरान एक हाथी करंट की चपेट में आ गया।

पहले भी बिजली को लेकर सामने आई थी समस्या
हाथियों की इस आवाजाही को लेकर बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्या पहले भी सामने आ चुकी है। इससे पहले ग्राउंड रिपोर्ट ने हाथियों की इस गतिविधि को विस्तार से कवर किया है। हाथियों के गांव में आवागमन से गांव में बिजली की लगातार कटौती होती थी। इस वजह से गांव के लोग परेशान थे। 2 सितंबर को रीवा के डीएफओ, नीरापुरे ने ग्राउंड रिपोर्ट से कहा था कि हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभी भी उनके आवागमन वाले क्षेत्र की बिजली काटी जा रही है।
अब मलकपुर में हाथी की मौत के बाद यह सवाल फिर उठ रहा है कि हाथियों की लगातार आवाजाही वाले क्षेत्रों में बिजली लाइनों और खुले तारों की सुरक्षा को लेकर क्या व्यवस्था थी।
हालांकि इस पूरी घटना की पुष्टि बिजली लाइन की जांच, घटनास्थल के निरीक्षण और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
इस घटना के बाद वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हाथियों की करंट से हो रही मौतों को लेकर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और अन्य संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने मऊगंज की घटना समेत ऐसे मामलों में वन विभाग और बिजली विभाग के बीच बेहतर समन्वय, हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में बिजली लाइनों की सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
दुबे ने ज्ञापन में कहा है कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में कम ऊंचाई पर लटक रहे बिजली तार और खेतों में लगाए गए अवैध करंट वाले तार गंभीर खतरा हैं। उन्होंने मऊगंज की घटना के बाद बचे हुए नर हाथी की निगरानी के लिए विशेष टीम बनाने, संवेदनशील क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को लेकर विशेष प्रोटोकॉल लागू करने और खुले तथा असुरक्षित तारों को सुरक्षित करने की मांग की है।
जांच से स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
हाथी की मौत के बाद वन विभाग ने वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। घटनास्थल वन विकास निगम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में बताया जा रहा है। अब जांच में यह देखा जाएगा कि जिस बिजली तार की चपेट में हाथी आया, उसकी स्थिति क्या थी और वह निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप था या नहीं।
साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्र में हाथियों की लंबे समय से मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद वन्यजीवों को बिजली के तारों से बचाने के लिए क्या सुरक्षा उपाय किए गए थे।
जांच और पोस्टमार्टम के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हाथी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए किसी विभाग या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होती है या नहीं।
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