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4 साल की लड़ाई के बाद ‘सप्त सागर’ कितने बदले, क्या होना बचा है?

उज्जैन के सप्त सागरों का महत्त्व धार्मिक स्नान से जुड़ा हुआ है। मगर 4 साल की क़ानूनी लड़ाई के बाद भी ये पूरी तरह साफ़ नहीं हो पाए।
Rudra Sagar Lake Mahakaleshwar Ujjain
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित रुद्र सागर तालाब | फ़ोटो: शिशिर अग्रवाल

उज्जैन के सामाजिक कार्यकर्ता बाकिर अली रंगवाला मुझे अगस्त के पहले हफ्ते में शहर के सप्त सागर दिखा रहे थे। ये सात तालाब हैं, जो उज्जैन शहर और उसके आस-पास स्थित हैं। इनमें से एक उंडासा या रत्नसागर तालाब नगर निगम की सीमा से बाहर उंडासा गांव में स्थित है। जबकि बाकी 6 शहर के अंदर हैं। लगभग हर तालाब के पास मंदिर है।

उज्जैन 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और अकेले दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग, महाकालेश्वर के लिए प्रसिद्द है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार अधिक मास— हिंदू कैलेंडर के अनुसार एक अतिरिक्त महीना— के दौरान इन तालाबों में नहाने के बाद दान करने की परंपरा है।

अधिक मास के दौरान इन सात सागरों में तीर्थयात्रा, पवित्र स्नान, दान और पूजा करने से कई गुना आध्यात्मिक पुण्य, पापों से मुक्ति और भगवान विष्णु एवं भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है। यही कारण है कि अधिकमास के दौरान आयोजित होने वाली सप्त सागर यात्रा में लोग इन तालाबों में पवित्र स्नान करने आते हैं। 

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रंगवाला ने बताया कि पहले इन तालाबों की स्थिति बेहद ख़राब थी। अतिक्रमण, गंदगी और सीवेज मिलने के कारण इनका महत्त्व ख़त्म होता जा रहा था। 

Bakir Ali rangwala Ujjain NGT Activist
उज्जैन में विष्णु सागर के पास खड़े होकर, बाकिर अली रंगवाला इसके इतिहास और महत्व के बारे में बता रहे हैं | फोटो: शिशिर अग्रवाल

2022 में इसे देखते हुए उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में याचिका दाखिल की। रंगवाला के अनुसार 4 सालों में इन तालाबों की स्थिति बेहतर हुई है। मगर इनके आस-पास रहने वाले लोगों का कहना है कि तालाब अब भी गंदगी का शिकार है। रंगवाला भी मानते हैं कि इनके पानी की स्थिति अब भी पीने योग्य नहीं है। 

उज्जैन में 2028 में सिंहस्त कुंभ मेले का आयोजन होने वाला है। यह हिंदू अनुयायियों का एक धार्मिक आयोजन है जिसमें लगभग 30 करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान है। इसके लिए शिप्रा नदी के किनारे 864 करोड़ की लागत से 29.21 किमी घाट और स्टॉपडैम बनाए जा रहे हैं। 

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हमने अब तक की कार्रवाइयों, योजनाओं, प्लान और सिंहस्त से जुड़ी घोषणाओं को खंगाल कर यह जानने की कोशिश की के अब तक सप्त सागर को कितनी जगह मिली, कितना बदलाव हुआ और आगे इसके लिए क्या-क्या करना ज़रूरी है?

तालाबों का हाल पहले कैसा था?

2022 में याचिका लगाते हुए रंगवाला ने गोवर्धन सागर में अतिक्रमण और प्रदूषण का मुद्दा उठाया। याचिका में कहा गया कि 36 बीघा का यह तालाब कब्जे और रिहायशी सोसाइटी के चलते आधा सिकुड़ गया। याचिका में यह भी कहा गया कि अनुपचारित पानी तालाब में छोड़े जाने से तालाब और भूजल दोनों दूषित हुए। 

ट्रिब्यूनल ने फरवरी 2022 को इसकी सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया। साथ ही उज्जैन कलेक्टर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तीन सदस्यीय जांच दल का गठन कर मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। 

कमिटी ने एतिहासिक रिकॉर्ड के हवाले से बताया कि 1950 के बाद गैर क़ानूनी तरीके से तालाब की भूमि को कब्जाने के प्रयास हुए थे। कमिटी ने पाया कि तालाब का बेसिक स्ट्रक्चर बदल रहा है और आस-पास के लैंड यूज़ की वजह से एरिया कम हो रहा है। 

कमिटी ने उज्जैन डेवेलपमेंट प्लान 2021 के हवाले से बताया कि तालाब को गार्बेज डंपिंग और शौचालय की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

Govind Sagar Talab Lake Ujjain
पटेल नगर के पास स्थित गोवर्धन सागर तालाब के किनारे मौजूद गंदगी और तालाब से लगा पक्का निर्माण | फ़ोटो: शिशिर अग्रवाल

मार्च 2022 में इस तालाब और आस-पास के हैंडपंप के पानी के सैंपल भी लिए गए। इसकी रिपोर्ट के अनुसार तालाब के पानी में टोटल कॉलिफोर्म की मात्रा 1600 (MPN/100ml) से अधिक थी। वहीं फीकल कॉलिफोर्म की मात्रा 920 (MPN/100ml) थी। जबकि भारतीय मानक के अनुसार बाहर नहाने (Outdoor bathing) के लिए फीकल कॉलिफोर्म की अधिकतम वांछित (Desirable) सीमा 500 MPN/100ml ही है।

वहीं हैण्डपंप के पास से लिए सैंपल में पीएच, टोटल डिसोल्वड सॉलिड, क्लोराइड सहित कई गुण ड्रिंकिंग वाटर स्पेसिफिकेशन (IS 10500:2012) की स्वीकार्य सीमा से ज्यादा थे। 

रंगवाला ने बताया कि उस वक़्त इस तालाब के किनारे देर तक खड़े होना भी मुमकिन नहीं था। उन्होंने कहा, “पानी पीना तो दूर, कोई भी व्यक्ति इस पानी से नहा भी नहीं सकता था।” 

मगर ये हालत केवल एक तालाब की नहीं थी। उज्जैन के डेवेलपमेंट प्लान 2021 के अनुसार रुद्र सागर में भी अतिक्रमण, कचरा और सीवेज की स्थिती थी। विष्णु सागर में वनस्पति उगी थीं और पाल का कटाव हो रहा था। वहीं क्षीर सागर और पुरुषोत्तम सागर में गाद जमा थी। जबकि पुष्प सागर में अतिक्रमण और पानी के स्रोत बंद हो जाने की स्थिति थी। 

शुरूआती कार्रवाई के बाद सुस्त पड़ा निगम    

5 मई 2022 को एनजीटी ने उज्जैन कलेक्टर को कब्ज़े हटाने के निर्देश दिए। इसके अलावा कलेक्टर और नगर निगम को ठोस अपशिष्ट प्रदूषण से बचाने और किसी भी तरह के अनुपचारित पानी को मिलने से रोकने के निर्देश दिए गए। पर्यावरणीय नियमों का पालन करवाने के लिए मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मेंबर सेकेट्री को मॉनिटरिंग करने के लिए भी कहा गया। 

रंगवाला ने बताया कि गोवर्धन सागर के आस-पास स्थित दुकानों को हटाना एक कठिन काम था क्योंकि यहां कई राजनीतिक दबाव थे।  मगर जुलाई 2023 को जिला प्रशासन ने ट्रिब्यूनल को बताया कि गोवर्धन सागर से 28 अस्थाई दुकानों, 7 स्थाई निर्माण, वीडी मार्केट के पार्किंग की दीवार और औषधालय द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाया जा चुका है। 

शहर के सीवेज के उपचार के लिए अमृत मिशन (AMRUT Mission) के तहत 92.5 एमएलडी का पंप हाउस और एसटीपी भी प्लान किए गए। जुलाई 2023 को जिला प्रशासन ने ट्रिब्यूनल से बताया कि गोवर्धन सागर में कोई भी अनुपचारित पानी नहीं मिल रहा था। 

अक्टूबर 2023 में नगर निगम ने गोवर्धन सागर पुनरुद्धार के लिए 8.47 करोड़ रु की एक परियोजना भी तैयार की। इसका टेंडर 9 अक्टूबर 2023 को जारी हुआ। लेकिन 2 फरवरी 2024 तक न तो एसटीपी का काम पूरा हुआ न ही सीवेज लाइन बिछाई गई। जब अक्टूबर 2024 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी एक रिपोर्ट जमा की तो उसमें भी मैनहोल, और इंस्पेक्शन चेंबर बनाने की डेडलाइन दिसंबर 2024 बताई गई। साथ ही कहा गया कि सीवेज के हाउस कनेक्शन जून 2025 तक पूरे किए जाएंगे।

“प्रशासन शुरूआती कार्रवाई के बाद कुछ कर ही नहीं रहा था। बाकी 6 तालाबों से तो अतिक्रमण भी नहीं हटाए जा रहे थे,” रंगवाला ने बताया।

Purushottam Sagar Talab Ujjain
पुरुषोत्तम तालाब के किनारे पानी में पूजन सामग्री और प्लास्टिक का कचरा बिखरा हुआ था | फ़ोटो: शिशिर अग्रवाल

जनवरी 2024 को नई दुनिया में प्रकाशित खबर में बताया गया कि गोवर्धन सागर के सौन्दर्यीकरण के लिए 10 करोड़ रूपए, विष्णु सागर के लिए साढ़े 5 करोड़ रुपए और पुरुषोत्तम सागर के लिए एक करोड़ रूपए के लिए टेंडर जारी किए गए। 

मगर अक्टूबर 2025 तक भी गोवर्धन सागर में गंदगी मिलने से रोकने के लिए एसटीपी का निर्माण पूरा नहीं हो सका था। यह जानकारी मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने एफिडेविट में दी थी। लापरवाही के चलते 2024 में उज्जैन नगर निगम को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 3 करोड़ की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (environmental compensation) राशि देने का आदेश हुआ था। 

हालांकि अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट में नगर निगम ने कहा कि एसटीपी के लिए विभिन्न सरकारी विभागों से अनुमति मिलने में देरी हुई। इसके अलावा  शहर के धार्मिक महत्व की वजह से अलग-अलग धार्मिक आयोजनों और भारी पर्यटन की वजह से भी प्रोजेक्ट पूरा करने में देरी हुई। निगम ने इन तथ्यों के आधार पर यह राशि माफ़ करने की अपील की थी।

अभी तालाबों की स्थिति कैसी है?

12 फरवरी 2022 को ही तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा था कि जीर्णोद्धार होने के बाद गोवर्धन सागर अपने मूल स्वरुप में आ गया है। 13 अगस्त, 2026 को हमने इन तालाबों का दौरा कर ज़मीनी हक़ीक़त जानने की कोशिश की।

गोवर्धन सागर के सामने मुख्य सड़क से लगा हुआ कुछ हिस्सा खाली पड़ा है। रंगवाला ने बताया कि पहले यहां सेकेण्ड हैण्ड कार बेचने का बाज़ार लगता था। मगर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद वो हट गया। 

फिर भी तालाब के चारो ओर 30 मीटर का ग्रीन बेल्ट दिखाई नहीं दिया। तालाब के एक ओर पक्की इमारतें तब भी मौजूद थीं। सड़क से लगे हुए जिस किनारे पर हम खड़े थे, वहां भी ठोस कचरा, पूजा सामग्री बिखरी हुई थी। इसके पानी में भी कचरा और पूजा सामग्री दिखाई दिए। 

बसंत विहार के रहने वाले मुकेश बोरासी ने क्षीर सागर को लेकर कहा, “इतने सालों में कुछ भी नहीं बदला बस जब त्योहार आते हैं तो दीवारों को रंगरोगन हो जाता है।” 

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क्षीर सागर में पूजन सामग्री डालते एक नागरिक | फ़ोटो: शिशिर अग्रवाल

रंगवाला ने पास में बन रही एक इमारत की ओर इशारा करते हुए कहा कि क्षीर सागर से एकदम लग कर निर्माण कार्य हो रहे हैं जिन पर रोक लगनी चाहिए। इसी तरह पुरुषोत्तम सागर में भी घाट पर गंदगी और पूजन सामग्री दिखाई देती है। 

ग्राउंड रिपोर्ट के पास मौजूद मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट में केवल रत्नसागर के पानी को ‘ए’ कैटेगरी का पाया गया। इस रिपोर्ट के लिए सभी 7 तालाबों से इसी साल 9 और 10 फ़रवरी को नमूने लिए गए थे। बाकी बचे हुए 6 तालाबों में से 4 का पानी ‘डी’ कैटेगरी और 2 (रुद्र सागर और पुष्कर सागर) का पानी ‘सी’ कैटेगरी का था।   

भारतीय मानकों के अनुसार केवल ‘बी’ कैटेगरी के पानी को ही नहाने (outdoor bathing) के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी हालिया रिपोर्ट यह बताती हैं कि नगर निगम की सीमा में आने वाले सभी 6 तालाबों का पानी नहाने योग्य भी नहीं है। 

क्या बेहतरी के लिए कोई प्लान है?

उज्जैन के डेवेलपमेंट प्लान 2021 में कहा गया कि इन तालाबों का मूल स्वरुप आसपास के भू-उपयोग के कारण कम हो रहा है। इसे और आसान भाषा में कहें तो ये तालाब सिकुड़ रहे हैं। यह प्लान तालबों के चारो ओर 30 मीटर ग्रीन बेल्ट रखने की वकालत करता है। 

लेकिन इन तालाबों का नाम डिस्ट्रिक्ट एनवायरनमेंट प्लान 2024 में वॉटर बॉडीज़ में लिस्टेड भी नहीं है। यहां तक कि तालाबों की संख्या पूरे जिले में केवल 4 बताई गई है।

हमने जिले के जनसंपर्क विभाग की वेबसाईट में ‘की-वर्ड सर्च’ के ज़रिए जिले में सप्त सागर से संबंधित कार्रवाइयों की भी पड़ताल की। 

इसमें जल गंगा संवर्धन अभियान के दौरान तालाबों की बेहतरी, सफाई और गहरीकरण का ज़िक्र है। इसके अलावा कलेक्टर द्वारा विभागों को सप्त सागर की साफ़ सफाई के आदेश देने का भी ज़िक्र है। अप्रैल 2026 को संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने शिप्रा शुद्धिकरण की बैठक में इन तालाबों में वाटर रीचार्ज की विधिवत कार्ययोजना बनाने का भी निर्देश दिया है। 

मगर सिंहस्त को देखते हुए शिप्रा की तुलना में सप्त सागर के लिए कोई बड़ी योजना की घोषणा नज़र नहीं आती। इस पर और जानकारी के लिए हमने उज्जैन कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर से उनके ऑफिस जाकर और फोन पर संपर्क करने की कोशिश की मगर कोई जवाब नहीं मिला। 

हालांकि रंगवाला का मानना था कि घोषणाओं से ज़्यादा पहले से मौजूद (एनजीटी के) निर्देशों को पालन करने पर ध्यान देना होगा। वो कहते हैं, “अगर धार्मिक नगरी में धार्मिक तालाबों का पानी नहाने लायक भी नहीं है तो इसका मतलब है कि केवल दिखावे के लिए काम हुआ है।”      


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  • Shishir Agrawal is the Hindi Editor of Ground Report. However he identifies himself as a young enthusiast passionate about telling tales of unheard. He covers environment and development affairs from the tribal landscape of central India.

    He has also covered issues related to agrarian crisis, wildlife, water, waste and urban development. He has been a recipient of several fellowships and grant. This includes Gandhi Fellowship, Vikas Samvad Media Fellowship and Earth Journalism Network Grant.

    Apart from having long conversations he indulges himself in reading books, watching theater and gazing at flying objects for leisure. He can be reached at shishiragrawl007@gmail.com.

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