मध्यप्रदेश सरकार ने बुधवार (29 जुलाई 2026) को मूंग खरीद की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी। यह फैसला राज्य के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद लिया गया।
यह घोषणा तब हुई जब करीब 2,000 किसान पुलिस बैरिकेड तोड़कर राजधानी भोपाल पहुंच गए और मुख्यमंत्री मोहन यादव के निवास के पास डेरा डाल दिया।

सरकार ने मांगी किसानों की मांगें
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 29 जुलाई की रात एक्स पर पोस्ट कर इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि यह किसानों के हित में मध्यप्रदेश सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय है और अब मूंग उपार्जन 60 प्रतिशत तक होगा। साथ ही उन्होंने बताया कि स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अगस्त और मूंग उपार्जन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 20 अगस्त कर दी गई है।
मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने मीडिया से कहा कि यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू किया जा रहा है और कोशिश रहेगी कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसका लाभ मिले।
भारतीय किसान यूनियन, नर्मदापुरम के जिलाध्यक्ष राजेश जाट ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि खरीद की सीमा 3 क्विंटल प्रति एकड़ होने से क्षेत्र के किसानों को बड़ा लाभ होगा।
ऐदल सिंह कंसाना ने कहा कि खाद वितरण में लागू एमएसपी ई-टोकन व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी, जो ई-टोकन व्यवस्था की समीक्षा करेगी और सुधार के सुझाव देगी।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब करीब 2,000 किसान पुलिस बैरिकेडिंग पार कर भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास के पास डेरा डाले हुए हैं। बुधवार सुबह किसान बिस्तर, खाना पकाने का सामान और लंबे समय तक रुकने की तैयारी के साथ नर्मदापुरम रोड पर पुलिस बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़े। शाम तक प्रदर्शनकारी पॉलिटेक्निक चौराहे तक पहुंच गए, जो मुख्यमंत्री निवास से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। इसके बाद प्रशासन ने बसों और बैरिकेड लगाकर रास्ता रोक दिया।
19 से ज्यादा किसान संगठनों के प्रतिनिधि इस मार्च में शामिल थे, जिनमें संयुक्त किसान मोर्चा भी शामिल है। कृषि मंत्री के साथ बैठक बेनतीजा रहने के बाद किसानों ने बुधवार दोपहर फिर से मार्च शुरू किया। भोपाल, नर्मदापुरम, विदिशा और रायसेन के किसान सोमवार (27 जुलाई) से ही ‘किसान क्रांति पदयात्रा’ के तहत राजधानी की ओर कूच कर रहे थे।

सीहोर जिले के भैरूंदा से आए किसान नेता सूर्या प्रताप सिंह सिसोदिया ने ग्राउंड रिपोर्ट से कहा कि मूंग खरीद के साथ ई-टोकन खाद वितरण प्रणाली खत्म करने की मांग भी मान ली गई है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि 10 घंटे बिजली जैसी कुछ मांगों पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसान सरकार के इस कदम का स्वागत करते हैं।

केंद्र और राज्य के बीच अब भी है मतभेद
केंद्र और राज्य के बीच खरीद को लेकर मतभेद भी सामने आया। केंद्र सरकार ने पहले 2026-27 के विपणन सीजन के लिए मध्यप्रदेश से 8,780 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदने पर सहमति दी थी। यह मात्रा राज्य के अनुमानित कुल उत्पादन 20.16 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले काफी कम थी, जिससे खरीद सीमा करीब 25 प्रतिशत पर सीमित हो गई थी।
मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग में उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, राज्य सरकार ने केंद्र से खरीद सीमा बढ़ाकर 8 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा करने की मांग की थी। इस संबंध में कंषाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भी लिखा था।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस स्थिति पर कहा कि, केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आशा (PM-AASHA) योजना के तहत केवल 25 प्रतिशत मूंग खरीद की ही मंजूरी दे सकती है। इसके बाद की खरीद राज्य सरकारों को अपने स्तर पर करनी होती है।
उन्होंने लिखा कि पीएम आशा योजना के दिशा-निर्देश केंद्रीय मंत्रिमंडल तय करता है और केंद्रीय कृषि मंत्री अलग से किसी राज्य के लिए खरीद का लक्ष्य तय नहीं करते। पोस्ट में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार केवल पीएम आशा योजना के तहत राज्य सरकार के प्रस्ताव के अनुसार खरीद की स्वीकृति देती है।
साथ ही शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश सरकार से अपील की कि केंद्र से स्वीकृत लक्ष्य के अनुसार मूंग खरीदी सुनिश्चित की जाए। केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह जानकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे अपने पत्र का हवाला देते हुए एक्स पर साझा की।
मुख्यमंत्री यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार कृषक कल्याण वर्ष में सभी किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि किसानों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है, जिसमें कृषि मंत्री कंषाना के अलावा लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और राज्यमंत्री कृष्णा गौर शामिल हैं।

फिलहाल, किसान अपना आंदोलन समाप्त कर के वापस जा चुके हैं। सिसोदिया कहते हैं कि वे पूरी तैयारी के साथ भोपाल आए थे। अगर उनकी मांगें नहीं मानी जाती तो वे अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करते। चूंकि, सरकार ने समय रहते उनकी प्रमुख मांगों को तवज्जो दी है, इसलिए अब वे घर वापस लौट गए हैं।
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