...
Skip to content

मैहर में हाथी के हमले में एक व्यक्ति की मौत, तीन घर क्षतिग्रस्त 

मैहर प्रशासन और वन विभाग के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता हाथी और ग्रामीणों के बीच संभावित टकराव को रोकना है।
Maihar elephant
त में सड़क पर घूमता रेडियो-कॉलर वाला हाथी E-5। फोटो: वन विभाग, मैहर

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से निकला रेडियो-कॉलर वाला जंगली हाथी E-5 बाणसागर बांध का जलभराव पार कर मैहर जिले के अमरपाटन क्षेत्र में पहुंच गया है। हाथी के हमले में 50 वर्षीय कंछेदी यादव की मौत हो गई, जबकि करीब तीन घरों को नुकसान पहुंचा और दो बकरियों की दबकर मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग और जिला प्रशासन ने आसपास के गांवों में निगरानी बढ़ा दी है।     

मैहर कलेक्टर, बिदिशा मुखर्जी की ओर से 8 सितंबर 2026 को जारी पत्र के अनुसार, हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उमरिया क्षेत्र से निकलकर बाणसागर बांध के करीब पांच किलोमीटर चौड़े जलभराव वाले हिस्से को पार कर मैहर वनमंडल में दाखिल हुआ। वन विभाग के मुताबिक, उसकी गतिविधियों की निगरानी जीपीएस कॉलर के जरिए की जा रही है।

पत्र के मुताबिक, हाथी ने 7 सितंबर की रात करीब 9:30 बजे बाणसागर के जलभराव वाले हिस्से को पार किया और मैहर वनमंडल के कक्ष क्रमांक 637 में पहुंचा। इसके बाद वह ललुआ बीट और ग्राम पंचायत पुरैना के आसपास से होते हुए गोरसरी पहाड़ी क्षेत्र के करीब विचरण कर रहा था। प्रशासन ने हाथी के व्यवहार को आक्रामक और हिंसक बताते हुए ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

Advertisements

इस विषय पर वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने हाथी को ‘हिंसक’ कहे जाने पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, किसी जंगली जानवर के व्यवहार को उसके संदर्भ से अलग करके देखना ठीक नहीं है। “हाथी के लिए यह कहना कि वह ‘हिंसक’ है, सही शब्द नहीं है। अगर कोई उसके करीब जाएगा, उसका रास्ता रोकेगा या उसे परेशान करेगा, तो वह प्रतिक्रिया करेगा। यह उसका स्वाभाविक व्यवहार है।” दुबे ने आगे जोड़ा। 

हाथी के हमले में 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत

मैहर वन विभाग के सब डिवीजनल ऑफिसर ( एसडीओ) सिद्धार्थ दीपांकर के अनुसार, 7 सितंबर की देर रात रामनगर पुरैना पंचायत के सिंगपुर मौहारी में हाथी के सामने आने के बाद कंछेदी यादव की मौत हुई। कंछेदी घर के बाहर निकले थे और अपने बैलों को बचाने की कोशिश कर रहे थे। हाथी ने उन्हें कुचल दिया।

maihar elephant
हाथी के हमले में मारे गए कंछेदी यादव के शव के पास मौजूद वनकर्मी और परिजन। फोटो: वन विभाग, मैहर

मृतक के भाई रामदत्त यादव के मुताबिक, घर के पास बंधा बैल रस्सी टूटने के बाद भाग गया था। उसे बचाने के लिए कंछेदी भी बाहर निकले और खेत की ओर जाने के दौरान हाथी के सामने आ गए। उनके भाई के अनुसार, हाथी ने इसके बाद आसपास के मकानों को भी नुकसान पहुंचाया।

Advertisements

कंछेदी यादव की मौत के बाद परिजनों ने मुआवजे की राशि को लेकर वन विभाग से लिखित आश्वासन की मांग की। उनके भाई रामदत्त यादव ने कहा कि परिवार को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि शासन के प्रावधानों के तहत कितना मुआवजा मिलेगा।

एसडीओ सिद्धार्थ दीपांकर के मुताबिक, विभाग ने परिजनों को 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता दी है। आवश्यक दस्तावेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आगे की मुआवजा प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

एसडीओ दीपांकर ने बताया कि हाथी ने करीब तीन घरों को नुकसान पहुंचाया है और दो बकरियों की भी दबकर मौत हुई है। वहीं   ओबरा गांव के निवासी लीलाधर तिवारी ने भी बताया कि हाथी ने उनके घर को नुकसान पहुंचाया। तिवारी ने बताया कि, “हाथी ने मेरा घर तोड़ दिया। घर में जो कुछ सामान था, उसका भी नुकसान हुआ है।”

जंगल की ओर भेजने की कोशिश जारी

घटना के बाद वन विभाग की टीम हाथी को आबादी वाले इलाके से दूर जंगल की ओर भेजने की कोशिश कर रही है। एसडीओ दीपांकर के मुताबिक, इसके लिए विभाग की गाड़ियां और दूसरे संसाधन लगाए गए हैं। “अभी हाथी को गाड़ियों की लाइट और पटाखों की मदद से वापस जंगल की ओर भेजने की कोशिश की जा रही है। हमने आसपास के लोगों को सचेत किया है और हमारी गाड़ियां लगातार इलाके में जा रही हैं। लोगों से कहा गया है कि वे घरों से बाहर न निकलें।” दीपांकर ने आगे जोड़ा।      

वन विभाग के मुताबिक, E5 हाथी को ट्रेस कर लिया गया है और बांधवगढ़ की टीम भी उसकी निगरानी में लगी है। दीपांकर ने बताया कि इलाके में E5 के अलावा दो अन्य हाथियों की मौजूदगी भी देखी गई है। हालांकि, वर्तमान टोपोग्राफी को देखते हुए उन्हें पकड़ने की फिलहाल कोई कार्रवाई संभव नहीं है।  उनके मुताबिक, हाथियों को सुरक्षित तरीके से ट्रैंकुलाइज करने के लिए बड़े और समतल प्लेटफॉर्म की जरूरत होगी।

दुबे ने हाथी को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे तरीकों को लेकर सावधानी बरतने की बात कही।  साथ ही उन्होंने जोड़ा कि हाथी और अन्य वन्यजीवों के साथ भी टॉर्च एवं पटाखों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। 

श्रीलंका में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि हाथियों को भगाने के लिए लगातार तेज आवाज वाले पटाखों का इस्तेमाल उनकी सुनने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। इससे हाथी ऐसे तरीकों पर प्रतिक्रिया देना बंद कर सकते हैं और परिणामस्वरूप इंसानों और हाथियों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ सकती हैं। दुबे ने आगे कहा, “हाथी को जंगल की ओर ले जाने की कार्रवाई केवल प्रशिक्षित वन्यजीव प्रबंधन टीम के निर्देश में होनी चाहिए। लोगों को दूर रखे बिना ऐसी कार्रवाई करना खतरनाक हो सकता है।”

ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील

हाथी की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने मैहर, अमरपाटन और रामनगर क्षेत्र के राजस्व, पुलिस, पंचायत और वन विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। संभावित विचरण वाले इलाकों में लाउडस्पीकर से मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है।

प्रशासन ने कच्चे मकानों और झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित पक्के भवनों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए हैं।

maihar elephant
हाथी के हमले में क्षतिग्रस्त हुआ मकान। फोटो: वन विभाग, मैहर

मैहर के डीएफओ विद्या भूषण मिश्रा ने लोगों से हाथी के करीब नहीं जाने और उसकी तस्वीर या सेल्फी लेने की कोशिश नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा “हाथी की सेल्फी या फोटो लेने की कोशिश बिल्कुल न करें। लोगों की सुरक्षा के लिए हाथी से दूरी बनाए रखना सबसे जरूरी है।”

उन्होंने कहा कि हाथी दिखाई देने पर लोग खुद उसके पीछे जाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना दें।

नए इलाकों में बढ़ रही हाथियों की दस्तक 

इस साल मध्य प्रदेश में हाथियों की आवाजाही कई नए इलाकों तक पहुंची है। मैहर के अलावा छिंदवाड़ा, सिवनी और रीवा-मऊगंज में भी हाथियों की मौजूदगी दर्ज हुई, कई बार वे खेतों और आबादी के करीब तक पहुंचे। छिंदवाड़ा और सिवनी में वन विभाग को निगरानी बढ़ानी पड़ी। फरवरी में बांधवगढ़ से  रीवा-मऊगंज पहुंचे  हाथी वापस अब तक वापस बांधवगढ़ नहीं आए हैं। 

दुबे का कहना, है कि हाथी का मैहर पहुंचना केवल एक स्थानीय घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मध्य भारत में हाथियों की आवाजाही को एक बड़े लैंडस्केप के संदर्भ में समझने की जरूरत है। दुबे ने बताया “पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश को हाथियों के लिए अलग-अलग राज्य नहीं, बल्कि एक जुड़े हुए लैंडस्केप के रूप में देखना चाहिए।”

दुबे के मुताबिक, बांधवगढ़ और संजय टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी बढ़ने के साथ उनके नए इलाकों में जाने की संभावना भी बनी रहेगी। “अगर बांधवगढ़ और संजय जैसे इलाकों में हाथियों की संख्या बढ़ती है, तो वे नए इलाकों में अपना क्षेत्र तलाश सकते हैं। इसलिए आने वाले समय में दूसरे हिस्सों में भी उनकी मौजूदगी देखने को मिल सकती है।” दुबे ने आगे जोड़ा। 

फिलहाल मैहर प्रशासन और वन विभाग के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता हाथी और ग्रामीणों के बीच संभावित टकराव को रोकना है। इसके लिए हाथी की लगातार निगरानी, ग्रामीणों को समय पर सूचना और भीड़ को उससे दूर रखना महत्वपूर्ण होगा। 


भारत में स्वतंत्र पर्यावरण पत्रकारिता को जारी रखने के लिए ग्राउंड रिपोर्ट को आर्थिक सहयोग करें। 


यह भी पढ़ें 

बढ़ती आबादी के बीच बाघों के लिए मध्य प्रदेश में पर्याप्त जगह है?

4 साल की लड़ाई के बाद ‘सप्त सागर’ कितने बदले, क्या होना बचा है?


पर्यावरण से जुड़ी खबरों के लिए आप ग्राउंड रिपोर्ट को फेसबुकट्विटरइंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सएप पर फॉलो कर सकते हैं। अगर आप हमारा साप्ताहिक न्यूज़लेटर अपने ईमेल पर पाना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें।

Author

  • Journalist, focused on environmental reporting, exploring the intersections of wildlife, ecology, and social justice. Passionate about highlighting the environmental impacts on marginalized communities, including women, tribal groups, the economically vulnerable, and LGBTQ+ individuals.

    View all posts

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

Connect With Us

Send your feedback at greport2018@gmail.com

Newsletter

Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.

When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.

Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.

EXPLORE MORE

LATEST

mORE GROUND REPORTS

Environment stories from the margins