मध्य प्रदेश के भोपाल में आंदोलनरत इंटर्न डॉक्टरों की मांगें सरकार ने मान ली है। बुधवार, 09 सितंबर को प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने वर्तमान स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत वृद्धि करने का निर्णय लिया। इसके अलावा प्रारंभिक कार्रवाई के तहत दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया।
दरअसल सोमवार से ही हमीदिया अस्पताल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के एमबीबीएस के अंतिम वर्ष के छात्र जो अस्पताल में बतौर इंटर्न काम कर रहे हैं, हड़ताल पर थे। इन छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का निर्णय लिया। मगर रास्ते में ही पुलिस ने इन्हें रोकते हुए वाटर कैनन चला दिए। इसके बाद से ये लोग कमला पार्क एक पास सड़क के एक हिस्से पर धरना दे रहे थे।
हालांकि सरकार ने इनके एक प्रतिनिधिमंडल से मिलकर बातचीत की और मांगें कुछ बदलाव के साथ मान लीं। इसके बाद बुधवार शाम तक इंटर्न्स ने अपना धरना ख़त्म कर दिया।

गौरतलब है कि 2021 के नेशनल मेडिकल कमीशन (कंपलसरी रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप) रेगुलेशन के तहत भारत के किसी भी अस्पताल में बतौर डॉक्टर प्रैक्टिस करने के लिए इंटर्नशिप अनिवार्य है। कम से कम 12 महीने तक इंटर्नशिप करने के बाद ही कोई छात्र ‘परमानेंट रजिस्ट्रेशन’ के योग्य बनता है। यह नियम भारत से अपनी मेडिकल की पढ़ाई करने वालों के साथ विदेश से इसका कोर्स करने वालों के लिए अनिवार्य है।
जीएमसी के छात्र अक्षत सोनी ने बताया कि उन्हें इंटर्नशिप के दौरान बतौर मासिक मानदेय (स्टाइफेंड) 14,775 रूपए मिलते हैं। उनका मानना था कि चूंकि पूरे महीने के खर्च को देखते हुए यह मानदेय काफी कम है इसलिए इसे बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की के इस मानदेय को कम से कम 30,000 रूपए किया जाना चाहिए ताकि उनको अपने परिवार पर निर्भर न रहना पड़े।
उन्होंने कहा कि बीते 3 महीने से यह छात्र सरकार से अपना स्टाईफेंड बढ़वाने के लिए बातचीत और ज्ञापन दे रहे थे। इस दौरान सभी इंटर्न अपनी रेगुलर ड्यूटी पूरी कर रहे थे। सोनी ने बताया कि एक महीने पहले भी सरकार ने उनको आश्वासन दिया था कि विधानसभा सत्र के दौरान चर्चा कर उनका स्टाईफेंड बढ़ाने के प्रयास होंगे। “मगर हमको केवल आश्वासन ही मिले,” सोनी ने कहा।
सोनी की तरह छवि सिंह बिट्टू भी इंटर्न हैं। उन्होंने कहा कि पुरुष और महिला दोनों ही इंटर्न कई बार 10 घंटे से भी ज्यादा काम करते हैं। जबकि सोनी के अनुसार उन्हें इमरजेंसी ड्यूटी भी करनी पड़ती है। इसके अलावा इन छात्रों पर पोस्ट ग्रेजुएशन की परीक्षा की तैयारी करने का भी दबाव होता है। ऐसे में यह काम मानसिक रूप से काफी थकाने वाला हो जाता है।
अपनी मांगों के अलावा यह छात्र उन पर पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग से भी नाराज़ दिखाई दिए। सोमवार को यह प्रदर्शनकर्ता सीएम आवास तक मार्च कर जाना चाहते थे। मगर पुलिस ने हमीदिया अस्पताल के पास ही उन्हें रोक लिया और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद ये छात्र कमला पार्क के पास सड़क का एक हिस्सा जाम कर धरने पर बैठ गए।
छात्रों के अलावा जूनियर डॉक्टर असोशिएशन और इंडियन मेडिकल असोशिएशन-जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क (IMA-JDN) ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की।

इसके बाद प्रदेश सरकार ने मंगलवार 8 सितम्बर को कार्रवाई के जांच के आदेश देते हुए पुलिस उपायुक्त जोन-2 विकास सहवाल को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया। हालांकि बुधवार को दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच करते हुए कहा गया कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि शांतिपूर्वक अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ इस प्रकार की घटना नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आश्वासन भी दिया कि मेडिकल कैंपस में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, यह सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही उन्होने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्र-छात्राओं पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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