मध्य प्रदेश के डिंडौरी और अनूपपुर में साल के पेड़ों पर साल बोरर के प्रकोप को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जाएगी। केंद्र सरकार ने डिंडौरी में 1,46,784 और अनूपपुर के अमरकंटक क्षेत्र में 9,535 प्रभावित साल के पेड़ों को काटने की अनुमति दी है। दोनों जिलों में कुल 1,56,319 पेड़ काटे जाएंगे।
डिंडौरी में साल बोरर का सबसे ज्यादा असर करंजिया रेंज में है। जिले में साल बोरर से प्रभावित करीब 90 फीसदी पेड़ इसी रेंज में हैं। दिसंबर 2025 में प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान कई पेड़ों के नीचे बड़ी मात्रा में बुरादा मिला था, जो कीट के हमले का संकेत है।
साल बोरर साल के पेड़ के अंदर जाकर उसे नुकसान पहुंचाता है। इस कीट के प्रकोप को रोकने के लिए वन विभाग ने ट्रैप ट्री ऑपरेशन भी चलाया। इसके तहत स्थानीय लोगों से साल बोरर के कीड़े पकड़वाए गए और विभाग ने प्रति कीड़ा 2 रुपये का भुगतान किया। डिंडौरी वन विभाग के मुताबिक अब तक 19,25,118 कीड़े खरीदे जा चुके हैं। इसके लिए करीब 38.5 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।

ग्राउंड रिपोर्ट ने अगस्त में डिंडौरी के कबीर चबूतरा गांव में इस समस्या पर विस्तृत रिपोर्टिंग की थी। वन विभाग ने प्रभावित पेड़ों की पहचान और मार्किंग के लिए स्थानीय ग्रामीणों को भी काम में लगाया था। इसके बावजूद अब बड़ी संख्या में प्रभावित पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है। विभाग का कहना है कि कटाई का उद्देश्य साल बोरर के प्रकोप और उसके फैलाव को नियंत्रित करना है।
साल बोरर का प्रकोप डिंडौरी में नया नहीं है। राज्य वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर के दस्तावेजों में करंजिया क्षेत्र में इस कीट का उल्लेख एक सदी से भी पहले मिलता है। मध्य प्रदेश में इसके प्रकोप का पुराना रिकॉर्ड 1905 से मिलता है। 1997 से 2000 के बीच मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में करीब 10 लाख साल के पेड़ों को इस कीट से नुकसान पहुंचने का उल्लेख भी मिलता है।
अब केंद्र से मिली मंजूरी के बाद डिंडौरी और अमरकंटक में प्रभावित साल के पेड़ों की कटाई अगला बड़ा कदम है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार डिंडौरी में कटाई जल्द शुरू हो सकती है, जबकि अमरकंटक में अक्टूबर से कटाई शुरू होने की उम्मीद है।
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