यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-176 है। शुक्रवार, 27 मार्च को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए देश में बिजली की बढ़ती खपत और मध्य प्रदेश में बढ़ते दाम के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
युद्ध के कारण कच्चे माल की कमी से खाद उत्पादन में 15% तक की गिरावट आ सकती है, जिससे सरकार का सब्सिडी बिल 25 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। संकट के बीच पीएम सभी राज्यों के सीएम से आज चर्चा करेंगे।
दिल्ली सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के आवंटन के लिए एक संशोधित नीति की घोषणा की है। इसके तहत दैनिक आपूर्ति को औसत खपत के 20% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है।
भारत के महापंजीयक ने आगामी जनगणना में शामिल होने वाले अधिकारियों को डेटा के दुरुपयोग, लापरवाही या नागरिकों से अपमानजनक सवाल पूछने के खिलाफ चेतावनी दी है। ऐसा करने पर जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत तीन साल तक की जेल या जुर्माने का प्रावधान है।
1 अप्रैल से सभी पेट्रोल पंपों पर 20% इथेनॉल मिश्रित (E20) पेट्रोल बेचना अनिवार्य होगा। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए 2 लाख से अधिक किशोरियों को एचपीवी (HPV) का टीका लगाकर मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। हालांकि प्रदेश ने 8 लाख टीकाकरण का लक्ष्य रखा है।
छिंदवाड़ा जिले में सीएम की सभा से लौट रही एक बस हादसे का शिकार हो गई। घटना में 10 लोगों की मौत हो गई, और 41 घायल हैं। सीएम ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख और घायलों को 1-1 लाख रूपए देने की घोषणा की है।
विस्तृत चर्चा
भारत में बिजली की बढ़ती मांग
भारत में बिजली की मांग में पिछले कुछ वर्षों में एक स्पष्ट और चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। जनवरी 2026 में भारत ने लगभग 143 बिलियन यूनिट बिजली का उपयोग किया, और पीक डिमांड 245 गीगावाट से ऊपर निकल गई है। पिछले 5 वर्षों में कुल मांग में करीब 28% की वृद्धि हुई है।
मांग बढ़ने का सबसे बड़ा कारण असामान्य मौसम है। फरवरी 2026 में पिछले 5 सालों में पहली बार कोई शीतलहर रिकॉर्ड नहीं की गई। इसके बजाय, फरवरी में तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री अधिक रहा, जिससे लोगों ने समय से पहले ही पंखे और एसी का उपयोग शुरू कर दिया।
पहले सर्दियों को कम बिजली मांग वाला सीजन माना जाता था, लेकिन अब हीटर और गीजर के अधिक उपयोग और शुरुआती गर्मी के कारण विंटर सीजन भी हाई डिमांड सीजन बन गया है।
बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां भी एक प्रमुख कारण हैं, क्योंकि अकेले उद्योग लगभग आधी बिजली की खपत करते हैं। साथ ही, घरों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
पावर सिस्टम के लिए अब चुनौती केवल गर्मियों की पीक डिमांड को संभालना नहीं है, बल्कि साल भर आने वाली मल्टीपल पीक्स (शीतलहर या शुरुआती गर्मी के कारण) को संभालना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली की मांग अब स्थिर रहने के बजाय अनप्रिडिक्टेबल (अप्रत्याशित) होती जा रही है।
मध्य प्रदेश में बिजली की दरों में वृद्धि
मध्य प्रदेश विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली की नई दरें निर्धारित की हैं, जिसके कारण 151 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को अब अधिक भुगतान करना होगा। बिजली की दरों में औसतन 4.80% की वृद्धि की गई है।
शहरी क्षेत्रों में 200 यूनिट तक की खपत पर फिक्स्ड चार्ज में ₹85 और 500 यूनिट तक की खपत पर ₹213 की बढ़ोतरी की गई है।
समय-आधारित बिलिंग: बिल गणना में एक बड़ा बदलाव यह है कि अब दिन और रात की दरों में अंतर होगा। यदि कूलर, एसी या वाशिंग मशीन जैसे उपकरण दिन (सोलर आवर्स) में चलाए जाते हैं, तो बिल कम आएगा। इसके विपरीत, रात में बिजली का उपयोग 10% से 20% अधिक महंगा होगा। इस गणना के लिए स्मार्ट मीटरों का उपयोग किया जाएगा।
विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव: दरों में यह वृद्धि केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। कमर्शियल और कृषि उपभोक्ताओं के लिए दरों में 4% से 5% और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए 3% से 4% की वृद्धि की गई है।
उपभोक्ताओं को अपना सेंक्शन लोड (स्वीकृत भार) चेक करवाने की सलाह दी गई है, क्योंकि फिक्स्ड चार्ज इसी पर निर्भर करता है। यदि आवश्यकता कम है, तो लोड कम करवाकर बचत की जा सकती है।
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