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भारत में गर्मी से 15 हज़ार अतिरिक्त मौतों की आशंका

ओडिशा में डीप डिप्रेशन के प्रभाव से लेकर मप्र के पॉलीहाउस घोटाले तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

डीप डिप्रेशन के चलते ओडिशा में अलर्ट, बंदरगाह-हार्बर परियोजनाओं को 20 साल की ईसी, क्रूड और रिफाइंड खाद्य तेलों पर कस्टम्स ड्यूटी में कटौती, मप्र में साढ़े 9 करोड़ का पॉलीहाउस घोटाला। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


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मुख्य सुर्खियां

बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन के चलते ओडिशा में संवेदनशील इलाकों की पहचान, स्कूल बंद करने और राहत शिविर तैयार रखने जैसे कदम उठाए गए। IMD ने कालाहांडी, नबरंगपुर, कोरापुट और मलकानगिरी समेत कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश, आंधी और 50–60 किमी/घंटे तक हवाओं की चेतावनी दी है। 33 ODRAF टीमें तैनात हैं और नौ टीमें स्टैंडबाय पर रखी गई हैं। 


केंद्र ने बंदरगाह और हार्बर परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी की शुरुआती वैधता 10 साल से बढ़ाकर कम-से-कम 20 साल कर दी है। इसके बाद शर्तों के आधार पर दो बार पांच-पांच साल का विस्तार भी मिल सकता है, बशर्ते पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जाए। यह बदलाव EIA Notification, 2006 में संशोधन के जरिए किया गया है। 

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कर्नाटक सरकार ने तेलंगाना के लिए कृष्णा नदी का 3 TMC पानी चरणों में छोड़ने पर सहमति व्यक्त की है। तेलंगाना प्रतिनिधिमंडल ने महबूबनगर जिले के 5.5 लाख एकड़ क्षेत्र में खड़ी फसलों की सुरक्षा के लिए 30 दिनों तक रोजाना 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का अनुरोध किया था।


केंद्र सरकार ने घरेलू कीमतों को घटाने के उद्देश्य से कच्चे (crude) और रिफाइंड खाद्य तेलों पर बेसिक सीमा शुल्क (customs duty) कम कर दी है। क्रूड सोयाबीन और क्रूड पाम ऑयल पर शुल्क 10% से घटाकर 5% किया गया है, जबकि रिफाइंड सोयाबीन और रिफाइंड पाम ऑयल पर शुल्क 32.5% से घटाकर 27.5% कर दिया गया है। 


मध्य प्रदेश कृषि विभाग की 6 वर्षों (2020-21 से 2025-26) की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 35,169 बीजों के नमूने अमानक पाए गए हैं। निजी कंपनियों के 1 लाख 93 हज़ार से अधिक नमूनों में से 18,000 अमानक निकले जबकि सरकारी संस्थाओं और समितियों के भी 16००0 से अधिक नमूने फेल हुए हैं। सीड एक्ट के तहत बोवनी से 15 दिन पहले जांच रिपोर्ट आनी चाहिए, लेकिन सैंपल देर से भेजे जाने के कारण रिपोर्ट में देरी हुई।

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प्रदेश के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने खरगोन में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत पॉलीहाउस निर्माण में ₹9.70 करोड़ के घोटाले में बैंक अधिकारियों और 4 सप्लायर कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यहां 33 किसानों के नाम पर पॉलीहाउस निर्माण के लिए ₹7.80 करोड़ के ऋण मंजूर किए गए, लेकिन वास्तव में केवल 3 पॉलीहाउस ही बने और राशि निजी कंपनियों को ट्रांसफर कर दी गई।

विस्तृत चर्चा

एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भारत में सामान्य वर्षों की तुलना में करीब 15,800 अतिरिक्त गर्मी से संबंधित मौतें हो सकती हैं। यह रिपोर्ट किसने प्रकाशित की है और क्या कहती है विस्तार से जानिए वाहिद भट से। 

दुनिया भर में बढ़ती गर्मी से मौत

अमेरिकी संस्थान क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब (Climate Impact Lab) की एक नई रिपोर्ट में सुपर अल नीनो (Super El Niño) के कारण वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर गर्मी से जुड़ी मौतों में भारी वृद्धि की चेतावनी दी गई है। सुपर अल नीनो के प्रभाव से भूमध्यरेखीय महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिसका सीधा असर वैश्विक तापमान और भारतीय मानसून पर पड़ता है। 

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस अवधि के दौरान दुनिया भर में ज़मीनी सतह का तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है और अत्यधिक गर्मी वाले दिनों में सामान्य वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। 

इस पूरे अल नीनो प्रकरण के दौरान वैश्विक स्तर पर गर्मी के कारण लगभग 4,51,000 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है, जिनमें से लगभग 2,39,000 मौतें सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के छह महीनों के दौरान होने की आशंका है।

भारत में 15 हजार से ज्यादा मौत की आशंका

भारत के संदर्भ में, सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच सामान्य वर्ष की तुलना में लगभग 15,800 अतिरिक्त गर्मी से संबंधित मौतों का अनुमान लगाया गया है। इसमें से केवल दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के सर्दियों के महीनों में ही लगभग 7,400 अतिरिक्त मौतों की आशंका है। गर्मी से जुड़ी अनुमानित मौतों के मामले में भारत दुनिया भर में चौथे स्थान पर आता है, केवल नाइजीरिया, इंडोनेशिया और सूडान ही भारत से ऊपर हैं। 

भारत के भीतर क्षेत्रीय भिन्नता भी देखी गई है; जहाँ दक्षिण भारत में सर्दियों के दौरान भी तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण स्वास्थ्य जोखिम बढ़ेंगे, वहीं उत्तर भारत में सर्दियों के मौसम में ठंड बनी रहेगी। शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूर्वानुमान अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में यह स्वास्थ्य जोखिम जारी रह सकता है।

अग्रिम तैयारी की ज़रूरत

यह अध्ययन शोधकर्ताओं द्वारा दुनिया भर के 24,378 क्षेत्रों के तापमान, स्थानीय मौसम की स्थिति, क्षेत्रीय संवेदनशीलता और कूलिंग सुविधाओं तक लोगों की पहुंच का गहन विश्लेषण करके तैयार किया गया है। इस रिपोर्ट का मुख्य संदेश यही है कि यदि तापमान सामान्य से ऊपर बना रहता है, तो गर्मी से जुड़ी बीमारियों और मौतों को रोकने के लिए पहले से ही अग्रिम स्वास्थ्य तैयारियां और सुरक्षात्मक नीतियां लागू करना अनिवार्य है।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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