यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-199 है। गुरुवार, 23 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद की धीमी चाल का पीडीएस पर असर और सतना में कुपोषण के चलते हुई मौत के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित शेखा झील को रामसर साइट घोषित किया गया है. यह भारत की 99वीं रामसर साइट हो गई है।
ओडिशा के रायगड़ा जिले में बॉक्साइट खदानों के विरोध में आदिवासियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प के कुछ ही दिनों बाद, केंद्र सरकार ने इन खदानों से खनिज परिवहन के लिए एक समर्पित रेल कॉरिडोर की अधिसूचना जारी कर दी है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मसूरी में 30 डिग्री से अधिक ढलान वाले संवेदनशील स्थानों पर हो रहे अवैध निर्माण को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इन निर्माणों से भूकंप और भूस्खलन का भारी खतरा उत्पन्न हो गया है।
केंद्र सरकार ने विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) में इथेनॉल और अन्य सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन की ब्लेंडिंग की अनुमति दे दी है। हालांकि इसके लिए अभी कोई अनिवार्य लक्ष्य तय नहीं किया गया है।
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि पर किसानों को मिलने वाले मुआवजे को बाजार मूल्य से चार गुना तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
मध्य प्रदेश में पीजी डॉक्टरों को बिना नींद या आराम के लगातार 36-36 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है, जिससे वे गहरे तनाव और अवसाद का शिकार हो रहे हैं। यह स्थिति नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
विस्तृत चर्चा
मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन का संकट
राष्ट्रीय भंडार पर प्रभाव स्रोतों के अनुसार, मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन की धीमी गति का सीधा असर देश के गेहूं भंडारण पर पड़ रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार सेंट्रल पूल में 16% कम गेहूं पहुंचा है।
चूंकि ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट 2013’ के तहत देश में लोगों को इसी सेंट्रल पूल से मुफ्त राशन दिया जाता है और मध्य प्रदेश इसका दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता राज्य है, इसलिए यह कमी खाद्य संकट की स्थिति पैदा कर सकती है।
जहां पंजाब और हरियाणा जैसे अन्य प्रमुख राज्यों ने अपनी गति बनाए रखी है और क्रमशः 91% और 70% गेहूं खरीदने में सफल रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश में पिछले साल की तुलना में लगभग 85% कम खरीदी हुई है।
सरकारी निर्देश इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बैठक में किसानों को फसल बेचने में आ रही परेशानियों को रेखांकित किया। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि स्लॉट बुकिंग, पंजीकरण और सत्यापन से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना चाहिए ताकि समन्वय के साथ इस पूरी प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
जमीनी हकीकत और किसानों के लिए चुनौतियां
देरी से खरीदी: राज्य में फसल की खरीदी देरी से शुरू होने के कारण, कई छोटे किसान अपनी फसल पहले ही मंडियों में कम दाम पर बेच चुके हैं। उन्हें अगली बुवाई की तैयारी या कर्ज चुकाने के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी।
भ्रष्टाचार और दूर स्थित उपार्जन केंद्र: भ्रष्टाचार की खबरों के अनुसार, वेयर हाउस मालिक अपने रसूख का इस्तेमाल करके किसानों को दूर के उपार्जन केंद्र चुनने पर मजबूर कर रहे हैं। देवास जिले के थूरिया का उदाहरण सामने आया है, जहां कलेक्टर के आदेश पर किसानों को 2 कि.मी. दूर स्थित केंद्र के बजाय 12 से 14 कि.मी. दूर जाने के लिए मजबूर किया गया। छोटे किसान इतना परिवहन और ईंधन (डीजल/पेट्रोल) का खर्च उठाने को तैयार नहीं हैं क्योंकि इससे उनका मुनाफा खत्म हो जाता है।
सामग्री की कमी: स्लॉट बुकिंग न होने और विशेष रूप से बारदाने की कमी की वजह से किसानों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया धीमी हो गई है।
सरकार ने पहले छोटे किसानों से फसल खरीदने का फैसला किया है, जो पहले ही मंडियों में फसल बेच चुके हैं। इसके कारण जब बड़े किसान अपनी फसल बेचने आएंगे, तो इस प्रक्रिया के और अधिक धीमा होने की आशंका है।
मध्य प्रदेश में भूमि अधिग्रहण मुआवजे में वृद्धि
बढ़े हुए मुआवजे पर कैबिनेट का फैसला मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कृषि भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में चार गुना बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। ‘भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम’ (Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition Act) के तहत एक संशोधन के माध्यम से ग्रामीण भूमि के लिए गुणांक (multiplication factor) को दोगुना कर दिया गया है।
इस बदलाव के बाद, सार्वजनिक या सरकारी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि के लिए किसानों को अब पंजीकृत बाजार मूल्य से चार गुना अधिक मुआवजा दिया जाएगा।
रणनीतिक लक्ष्य और लाभ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस निर्णय को सुधारात्मक और रणनीतिक कदम बताया है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास परियोजनाएं बिना किसी बाधा के समय पर पूरी हों, साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो और किसान अधिक समृद्ध बनें।
बुनियादी ढांचा और पुनर्वास स्वीकृतियां कैबिनेट ने इसके साथ ही सिंचाई, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे के लिए ₹33,985 करोड़ की राशि भी स्वीकृत की है। इन परियोजनाओं में छिंदवाड़ा सिंचाई परिसर से जुड़ा ₹969 करोड़ का पुनर्वास पैकेज भी शामिल है।
इस पैकेज को केन-बेतवा लिंक परियोजना के पैमाने के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसे विस्थापन मुआवजे के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल माना जाता है।
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