पर्यावरण आज में सुनिये, महाराष्ट्र के उजनी जलाशय में बाहरी मछलियों से संकट, BNHS ने सफाई अभियान शुरू किया। नई ग्रामीण रोज़गार योजना में काम 50% घटा। बारिश के चलते अमरनाथ यात्रा रोकी गई। तेलंगाना के सीएम ने बारिश के लिए यज्ञ किया, राज्य में पानी की कमी। कनाडा में जंगल की आग से आपातकाल, 22 हज़ार लोग विस्थापित। और चर्चा करेंगे मध्य प्रदेश में 237 जंगलों की अवैध मंज़ूरी का मामला जांच में, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतज़ार।
पर्यावरण हेडलाईन्स
महाराष्ट्र के उजनी जलाशय बाहरी प्रजातियों — जैसे तिलापिया और अफ़्रीकी कैटफ़िश — की वजह से पैदा हुए पारिस्थितिक (इकोलॉजिकल) संकट से जूझ रहा है। इन बाहरी मछलियों ने स्थानीय मछलियों की आबादी को खत्म कर दिया है और हज़ारों मछुआरों की आजीविका को खतरे में डाल दिया है। इसके जवाब में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने इन बाहरी मछलियों को हटाने और स्थानीय मछलियों की आबादी को फिर से बढ़ाने का एक कार्यक्रम शुरू किया है। यह भारत की ऐसी पहली पहल है जो समुदाय के सहयोग से चलाई जा रही है।
सरकार के नए ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्यक्रम “वीबीजी रामजी” के तहत रोज़गार सृजन में भारी गिरावट आई है। जुलाई में इसमें साल-दर-साल 50 फ़ीसदी की कमी दर्ज की गई। यह गिरावट तब आई जब सरकार ने 1 जुलाई से दो दशक पुरानी ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना’ (MGNREGS) को खत्म कर वीबीजी रामजी योजना शुरू की। नई योजना में ज़्यादा मज़दूरी और ज़्यादा दिनों तक काम मिलता है, फिर भी रोज़गार सृजन की रफ़्तार काफ़ी धीमी हो गई है।
रविवार को अमरनाथ यात्रा रोक दी गई। हाल की बारिश से हुई क्षति की मरम्मत और आने वाले दिनों में और बारिश के अनुमान को देखते हुए दोनों रास्तों पर सालाना अमरनाथ यात्रा स्थगित कर दी गई है। यह यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई थी और 28 अगस्त को समाप्त होने वाली थी, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इस साल 57 दिनों की यह यात्रा फिर से शुरू होने की संभावना कम है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी आज नागार्जुन सागर बांध के किनारे वरुण यज्ञ करेंगे, ताकि राज्य में अच्छी बारिश हो सके। रेड्डी का यह धार्मिक अनुष्ठान बताता है कि राज्य जल संकट के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है। तेलंगाना में मॉनसून सीज़न की शुरुआत जून में 61% कम बारिश के साथ हुई थी। जुलाई में कुछ रिकवरी के बावजूद इस मॉनसून सीज़न के पिछले दो महीनों में कुल बारिश की कमी अब भी 5% बनी हुई है।
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में भीषण गर्मी के बीच जंगलों में लगी आग अब रिहायशी इलाकों तक पहुंच गई है, जिसके चलते प्रांतीय स्तर पर आपातकाल घोषित किया गया है। आग से अब तक 9,500 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो चुका है। 22 हज़ार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है, और प्रांत में इस समय 100 से ज़्यादा जंगल जल रहे हैं।
आज की चर्चा– अब्दुल वसीम अंसारी, ग्राउंड रिपोर्ट
237 डीम्ड फॉरेस्ट पर अवैध पर्यावरण मंजूरी

भोपाल के सांसद आलोक शर्मा ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर राज्य के पर्यावरण विभाग के अफसरों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने भोपाल के पास मस्तीपुरा गांव में 17 एकड़ घने सरकारी जंगल में खनन की अनुमति दे दी, जबकि कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में वहां जंगल होने की पुष्टि हो चुकी थी। यह अवैध पर्यावरण मंज़ूरी केंद्र सरकार के परिवेश पोर्टल पर भी दर्ज नहीं है, जो इसकी वैधता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
आलोक शर्मा ने इसे मध्य प्रदेश के उन 237 डीम्ड फॉरेस्ट मंज़ूरी मामलों से जोड़ा, जिनमें सिया से मंज़ूरी लेने के बजाय अफसरों ने खुद ही मनमाने ढंग से क्लीयरेंस जारी कर दिए थे।
इस मामले पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है, लेकिन कार्रवाई से पहले केंद्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतज़ार कर रहा है। कोर्ट का रुख स्पष्ट होने के बाद ही केंद्र इस मामले में कार्रवाई करेगा।
आलोक शर्मा ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भूपेंद्र यादव से की थी, जिसके जवाब में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों का इंतज़ार करने की बात कही।
इसके अलावा मध्य प्रदेश में पर्यावरण मंज़ूरी (एनवायरनमेंट क्लीयरेंस) को लेकर एक और समस्या सामने आ रही है। नियमानुसार सभी मामलों को परिवेश पोर्टल पर दर्ज करना ज़रूरी होता है, और यह ज़िम्मेदारी सिया के मेंबर सेक्रेटरी की होती है। लेकिन राज्य में वैधानिक रूप से जारी कई मामले पोर्टल पर दर्ज ही नहीं किए गए हैं।
हाल ही में संसद में पर्यावरण मंत्रालय ने बताया था कि ग्रीन कवर खोने के मामले में मध्य प्रदेश देश का टॉप राज्य है। इससे यह समझ आता है कि किस तरह अफसर जंगल की ज़मीन को अवैध रूप से व्यावसायिक (कमर्शियल) गतिविधियों के लिए खोल रहे हैं, और इन मामलों की जांच व उन पर कार्रवाई में कितना अधिक समय लग रहा है।
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