यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-131 है। मंगलवार, 3 फरवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए मध्य प्रदेश में कृषि से जुड़े नए अपडेट्स और शहडोल में बाघ की मौत।
मुख्य सुर्खियां
अमेरिका ने भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। ट्रम्प के मुताबिक, जरूरत पड़ी तो भारत वेनेजुएला से तेल लेगा। भारत ‘बाय अमेरिकन’ नीति के तहत अमेरिका से ऊर्जा, तकनीक, कृषि और कोयला सहित 46 लाख करोड़ रुपए से अधिक के कई उत्पाद खरीदेगा।
16वें वित्त आयोग ने बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के निजीकरण और उनके भारी कर्ज के समाधान के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) बनाने की सिफारिश की है। आयोग के अनुसार, SPV पुराने कर्ज को अलग कर डिस्कॉम को निवेश के लिए आकर्षक बना सकते हैं और राज्य सरकारों पर वित्तीय बोझ कम कर सकते हैं।
वित्त आयोग ने देश के ग्रामीण व शहरी स्थानीय निकायों को अगले पांच साल यानि 2030 तक के लिए कुल 7 लाख 91 हज़ार 493 करोड़ रुपए के अनुदान की सिफारिश की है।
इसके साथ ही आयोग ने ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी क्षेत्रों में बदलने को प्रोत्साहन देने का फैसला लिया है। इसके लिए शहरीकरण प्रोत्साहन राशि कुल 10,000 करोड़ रुपए तय की गई है।
दिल्ली सरकार ने 57 हज़ार 362.85 करोड़ रुपये के ड्रेनेज मास्टर प्लान 2025 के लिए विश्व बैंक से वित्तीय सहायता मांगी है। 30 वर्षीय इस योजना का उद्देश्य नजफगढ़, बारापुल्ला और ट्रांस-यमुना ड्रेनों के जरिए जलभराव की घटनाओं को पांच साल में 50% तक घटाना है।
केंद्र सरकार ने बताया कि इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद 12,634 पाइपलाइन लीकेज की मरम्मत की गई है और 3,109 ओवरहेड टैंक साफ किए गए हैं। राज्य में हजारों जल नमूनों की जांच हुई, कई ट्यूबवेल बंद किए गए और पुराने पाइप नेटवर्क को AMRUT 2.0 में शामिल किया गया है।
इंदौर में अब कलेक्टर पेड़ काटने की अनुमति नहीं दे सकेंगे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने साफ किया कि जब तक यहां ट्री अफसर की नियुक्ति नहीं होती तब तक शहर में पेड़ों की कटाई नहीं होगी।
मंगलवार को भोपाल, ग्वालियर, रीवा समेत प्रदेश के 20 जिलों में मावठा गिरने का अलर्ट है। भोपाल और भिंड में मंगलवार तड़के बारिश हुई। वहीं ग्वालियर में ओले गिरे, जिससे फसलों को नुकसान हुआ है।
विस्तृत चर्चा

मध्य प्रदेश: कृषि उद्योग वर्ष 2026 और नई पहल
मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषि उद्योग वर्ष’ घोषित किया है। इस पहल के तहत सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के विकास पर ध्यान केंद्रित करना है।
विशेष कृषि कैबिनेट का आयोजन: मार्च महीने से राज्य में कृषि कैबिनेट की शुरुआत की जाएगी। पहली बैठक निमाड़ क्षेत्र के खरगोन या खंडवा जिले में होगी, जिसके बाद मालवा, महाकौशल, विंध्य, ग्वालियर, चंबल और बुंदेलखंड के जिलों में भी ऐसी बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन विशेष बैठकों में केवल कृषि, उद्यानिकी (हॉर्टिकल्चर), खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग), पशुपालन और डेयरी विकास जैसे विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे।
पशुपालकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण: पहली कृषि कैबिनेट में एक महत्वपूर्ण योजना को मंजूरी मिल सकती है, जिसके तहत पशुपालकों को दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण हेतु ब्राजील भेजा जाएगा। इस प्रशिक्षण का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी और चयनित किसान विशेषज्ञों के साथ वहां जाकर नई तकनीकें सीखेंगे।
बुनियादी समस्याओं के लिए कैंप: किसानों की रोजमर्रा की समस्याओं को हल करने के लिए पूरे वर्ष कैंप लगाए जाएंगे। इनमें किसान क्रेडिट कार्ड, समितियों से जुड़ना और बैंक खातों को आधार से लिंक करने जैसी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
कृषि वैज्ञानिकों का संकट और वेतन विवाद
एक तरफ जहां सरकार कृषि वर्ष मना रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों और विज्ञान केंद्रों में गहरा संकट व्याप्त है।
वैज्ञानिकों की हड़ताल: पिछले छह महीनों में कृषि वैज्ञानिकों और स्टाफ ने 12 बार हड़ताल की है क्योंकि उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है। देश भर की 731 स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज में से 487 में कामकाज ठप पड़ गया है।
केंद्र और राज्य के बीच विवाद: वेतन न मिलने का मुख्य कारण इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) और राज्य सरकार के बीच का विवाद है। ICAR का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद के लाभ राज्य सरकार को देने होंगे। वर्ष 1980 से 2023 तक ICAR वेतन के लिए 80 करोड़ रुपये जारी करता था, लेकिन 2023 से यह जिम्मेदारी राज्यों को सौंप दी गई है, जिसकी जानकारी होने से राज्य सरकारें इनकार कर रही हैं।
किसानों पर प्रभाव: वैज्ञानिकों की अनुपलब्धता के कारण किसानों को फसल संबंधी सलाह, बीज चयन, तकनीक और दवाइयों की जानकारी समय पर नहीं मिल पा रही है, जिससे ‘कृषि वर्ष’ की सफलता पर सवाल उठ रहे हैं।

टाइगर स्टेट में बाघों की सुरक्षा की चुनौती
मध्य प्रदेश में बाघों की सुरक्षा को लेकर एक चिंताजनक स्थिति उभर कर सामने आई है।
करंट से बाघों की मौत: शहडोल के जयसिंह नगर रेंज में खेतों में बिछाए गए करंट वाले तारों की चपेट में आने से दो बाघों की मौत हो गई। इस मामले में सात लोगों को पकड़ा गया है, जिनमें किसान भी शामिल हैं। यह घटना जनवरी के अंत की है और विभाग को पता चलने से पहले शवों को ठिकाने लगाने की कोशिश भी की गई थी।
बाघों की मौत के बढ़ते आंकड़े: मध्य प्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है, लेकिन यहाँ बाघों की मौत के आंकड़े डराने वाले हैं। वर्ष 2026 की शुरुआत में ही अब तक 9 बाघों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 7 मौतें अकेले जनवरी में हुईं। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में कुल 224 बाघों की मौत दर्ज की गई है।
न्यायिक हस्तक्षेप: बाघों की बढ़ती मौतों के मामले में हाई कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। हालांकि यह तर्क दिया जाता है कि बाघों की संख्या अधिक होने के कारण मौतों की संख्या भी अधिक है, लेकिन करंट लगने जैसी अवैध गतिविधियों से होने वाली मौतें एक गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाती हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।
Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India
We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.
Connect With Us
Send your feedback at greport2018@gmail.com
Newsletter
Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.
When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.
Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.



