...
Skip to content

सरदार सरोवर पर ऐतिहासिक समझौते से मप्र को क्या मिला?

वायनाड के भूस्खलन से लेकर सरदार सरोवर के ऐतिहासिक समझौते तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

एल नीनो पर पीएमओ में उच्चस्तरीय बैठक, वायनाड में भूस्खलन से 3 की मौत, झारखंड में हाथियों के हमले में 3 की मौत, एमपी में ऑटो में प्रसव के बाद नवजातों की मौत। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


मुख्य सुर्खियां

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने एक उच्च स्तरीय बैठक में मानसून की प्रगति और एल नीनो के संभावित प्रभाव की समीक्षा की है। अधिकारियों को संवेदनशील जिलों में स्थिति की निरंतर निगरानी करने और राज्यों के साथ समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।


केरल के वायनाड में एक निर्माणाधीन सुरंग के पास भूस्खलन होने से तीन लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना तब हुई जब प्रशासन द्वारा मिट्टी के ढेर को हटाने की चेतावनी की अनदेखी की गई थी।


झारखंड के हजारीबाग और गढ़वा जिलों में जंगली हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो गई और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। मानसून के दौरान हाथियों की आवाजाही बढ़ने से मानव-पशु संघर्ष की घटनाएं बढ़ गई हैं।


महाराष्ट्र के पश्चिमी घाटों में अत्यधिक भारी बारिश हुई है, जहां लोनावला में 48 घंटों के भीतर रिकॉर्ड 1,290 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने कोंकण, गुजरात और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।


एमपी सरकार ने ₹3,600 करोड़ का नया कर्ज लिया है, जिससे राज्य पर कुल कर्ज अब ₹5 लाख करोड़ के पार चला गया है। सरकार ने इस वित्त वर्ष में बाजार से भारी ऋण जुटाने का लक्ष्य रखा है।


एमपी के मंडला जिले में एक महिला ने अस्पताल जाते समय ऑटो-रिक्शा में चार बच्चों को जन्म दिया, लेकिन उन सभी नवजातों की मृत्यु हो गई। पति ने आरोप लगाया कि समय पर एम्बुलेंस न मिलने के कारण यह दुखद घटना हुई।

विस्तृत चर्चा

आज की चर्चा में हमारे एडिटर इन चीफ पल्लव जैन बता रहे हैं सरदार सरोवर को लेकर 4 राज्यों के बीच हुए एतिहासिक समझौते और गृहमंत्रालय से ही आई एक और खबर के बारे में। वहीं असोसिएट एडिटर वाहिद भट से जानिए वायनाड भूस्खलन से जुड़ा हुआ अपडेट। 

सरदार सरोवर के समझौते से मध्य प्रदेश को कितना फायदा?

गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने मंगलवार को नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (NWDT) के अवॉर्ड प्रोजेक्ट्स के बकाया भुगतान के निपटारे से जुड़े एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

हम अपने श्रोताओं को बता दें कि नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध और इंदिरा सागर बांध का पानी और बिजली ये चारों राज्य शेयर करते हैं। बांध जब बना तो विस्थापितों के मुआवज़े, लैंड डिस्प्यूट, वॉटर शेयरिंग, बिजली बंटवारे जैसे कई विवाद इन राज्यों के बीच पैदा हुए जिन्हें सुलझाया गया है। 

यह “समझौता” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में किया गया।

गृह मंत्री अमित शाह के मुताबिक यह समझौता इसलिए हो पाया क्योंकि चारों राज्य में बीजेपी की सरकार है और सभी सरकारों ने एक-दूसरे की समस्या को समझते हुए सारे विवाद सुलझा लिए हैं। 

मध्य प्रदेश के लिए कितना बेहतर समझौता?

अब इसमें मध्य प्रदेश के लिए ज्यादा ही समझौते की स्थिति ज्यादा नज़र आती है।

नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध की वजह से मध्य प्रदेश के हिस्से की 55 फीसदी ज़मीन डूबी है, जिसके बदले मप्र ने गुजरात पर 7669 करोड़ रुपए के मुआवज़े का दावा ठोका था, लेकिन अब मध्य प्रदेश गुजरात से यह राशि लेने की बजाय डैम की बढ़ी हुई लागत के गुजरात के क्ले को मानते हुए उसे 550 करोड़ रुपए का भुगतान करेगा।

सरदार सरोवल डैम का कंट्रोल गुजरात सरकार के पास है, सबसे बड़ा लाभार्थी भी गुजरात है। जबकि डैम में डूबी कुल 37 हज़ार 533 हेक्टेयर ज़मीन में 55 फीसदी मध्य प्रदेश की है।

2014 में बांध की उंचाई 58 मीटर बढ़ाने के निर्णय से 5000 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन जलमघ्न हो गई थी। इस पर हमने ग्राउंड रिपोर्ट भी की है कि कैसे मध्य प्रदेश के इन जिलों में लोग अभी भी मुआवज़े और पुनर्वास का इंतज़ार कर रहे हैं और बांध के भरने पर डूबे हुए घरो में ही रह रहे हैं।

प्रभावित गांवों की संख्या अब 178 से बढ़कर 192 हो गई। मध्य प्रदेश ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून और बाज़ार भाव के आधार पर 7669 करोड़ का संशोधित दावा किया था। वहीं इसके उलट गुजरात 2001 की पुरानी दरों पर केवल 281 करोड़ रुपए देने पर अड़ा था। अब समझौते में तो उल्टा मध्यप्रदेश से ही 500 करोड़ रुपए वसूलने का फैसला सुना दिया गया है।

मध्य प्रदेश के स्तर से देखें तो सरकार कर्ज में डूबी हुई है। ऊपर से अमित शाह कह रहे हैं कि डबल इंजन की सरकार है तो राज्यों ने एक दूसरे की स्थिति को समझा। यहां साफ साफ गुजरात से आए अमित शाह गुजरात का पक्ष लेते और मध्यप्रदेश के साथ अन्याय करते नज़र आते हैं। 


दिल्ली के रिज के लिए सरकार का नया प्लान

गृह मंत्रालय से ही एक खबर और पर्यावरण से जुड़ी आज इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुई है। केंद्र और दिल्ली सरकार ने अगले चार सालों में 6,300 हेक्टेयर ग्रीन रिज इलाके को वन भूमि में बदलने और इसकी जैव-विविधता, मिट्टी, पानी और दिल्ली के पर्यावरण को बचाने के लिए इसे कानूनी सुरक्षा देने का फैसला किया है। इसके तहत राजधानी में 70 लाख पेड़ लगाने का एक बड़ा अभियान और रिज (Ridge) को पुनर्जीवित करने का अभियान चलाया जाएगा।

यानि अगले चार सालों में, ग्रीन रिज एरिया के 6,300 हेक्टेयर को जंगल की ज़मीन में बदल दिया जाएगा।

इस कदम का मकसद इस एरिया को कानूनी सुरक्षा देना है, जिससे इसकी बायोडायवर्सिटी बनी रहेगी और लोकल मिट्टी और पानी की क्वालिटी सुरक्षित रहेगी।

ग्रीनिंग और पॉल्यूशन कंट्रोल

एनवायरनमेंटल मदद के इस कदम के तहत, पूरी दिल्ली में 70 लाख पेड़ लगाने का एक बड़ा कैंपेन शुरू किया जाएगा।

इस पहल का मकसद रिज एरिया को फिर से ज़िंदा करना है ताकि शहर को बढ़ते पॉल्यूशन लेवल से निपटने और तेज़ गर्मी से राहत मिल सके।

जबकि प्लान तय हो गया है ऐसे में इसकी टाइमलाइन और काम को अंजाम देने के तरीके इसकी सफलता के लिए बहुत ज़रूरी होंगे।


वायनाड भूस्खलन: भारी बारिश और मानवीय भूल

केरल के वायनाड में हाल ही में हुए भूस्खलन ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच के संघर्ष को सामने ला दिया है। मानसून की भारी बारिश के बीच हुई इस दुखद घटना ने न केवल जान-माल का नुकसान किया है, बल्कि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण परियोजनाओं की स्थिरता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

टनल प्रोजेक्ट स्थल पर हादसा

यह भूस्खलन वायनाड के मेप्पाडी इलाके के पास एक निर्माणाधीन सुरंग (टनल) परियोजना के स्थल पर हुआ। क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण अचानक जमीन खिसक गई, जिससे मिट्टी, पत्थर और मलबे का एक विशाल सैलाब नीचे की ओर बहने लगा। इस मलबे ने परियोजना स्थल पर स्थित एक मजदूर शिविर (लेबर कैंप) को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे कई मजदूर दब गए। घटना के वायरल वीडियो में तबाही की भयावहता और इसकी अचानक प्रकृति को साफ देखा जा सकता है।

हताहत और जारी बचाव कार्य

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने का डर है। पीड़ितों में मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के प्रवासी मजदूर शामिल हैं, जो इस टनल प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे।

फिलहाल बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें निम्नलिखित एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं:

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF)

अग्निशमन सेवाएं (Fire Services)

स्थानीय पुलिस और वन विभाग

स्थानीय स्वयंसेवक

बचाव कार्य में अत्यधिक खराब मौसम और कम दृश्यता (visual visibility) के कारण भारी बाधा आ रही है। रिकॉर्ड तोड़ बारिश के बाद वायनाड के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। आपदा से पहले के 24 घंटों में इस क्षेत्र में लगभग 265 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो इस मानसून सीजन की सबसे अधिक बारिश में से एक है।

प्राकृतिक आपदा या “मानव-निर्मित” त्रासदी?

हालांकि भारी बारिश इस घटना का तात्कालिक कारण थी, लेकिन चर्चा यह है कि इसे पूरी तरह से प्राकृतिक आपदा नहीं माना जा सकता।

सरकार का रुख: केरल सरकार ने इसे “मानव-निर्मित आपदा” (man-made disaster) करार दिया है, जिसमें मानवीय गलतियों और परिदृश्य के साथ छेड़छाड़ को प्रमुख कारक माना गया है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: पर्यावरण विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि इस विशिष्ट पहाड़ी क्षेत्र में ब्लास्टिंग (विस्फोट) और बड़े पैमाने पर जमीन के स्वरूप को बदलना विनाशकारी हो सकता है।

ऐसी खबरें हैं कि इस टनल प्रोजेक्ट को पर्यावरणीय मंजूरी देने में विशेषज्ञ हिचकिचा रहे थे। आलोचकों का तर्क है कि इसे मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए थी, क्योंकि टनल का रास्ता उन क्षेत्रों से गुजरता है जो भूस्खलन के लिए अत्यधिक संवेदनशील माने जाते हैं।

ऐसी आपदाओं के प्रति वायनाड की संवेदनशीलता पहले से ही दर्ज है। इस क्षेत्र ने 2019 और 2024 में भी विनाशकारी भूस्खलन का सामना किया है। यह नवीनतम घटना उन चिंताओं को पुख्ता करती है कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं द्वारा क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन से समझौता किया जा रहा है, जो प्राकृतिक नाजुकता को ध्यान में नहीं रखते।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।

Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

Connect With Us

Send your feedback at greport2018@gmail.com

Newsletter

Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.

When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.

Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.

EXPLORE MORE

LATEST

mORE GROUND REPORTS

Environment stories from the margins