मानसून की रफ्तार पर ब्रेक, अमेरिका-ईरान समझौते से पश्चिम एशिया में राहत की उम्मीद, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भारत का निर्यात, और बढ़ती गर्मी के साथ ओजोन प्रदूषण का नया खतरा। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय, कृषि और वैश्विक खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
अमेरिका और ईरान ने युद्ध रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने पर शुरुआती सहमति बनाई है। दोनों देश परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर भी बातचीत शुरू करेंगे। समझौते से पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।
भारत का माल निर्यात मई में 45.2 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की मांग बढ़ने से निर्यात को मजबूती मिली। हालांकि आयात बढ़ने से व्यापार घाटा भी बढ़ गया है।
ओडिशा के मछुआरों ने डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ समुद्र में जाना बंद कर दिया है। उनका कहना है कि कमाई के मुकाबले ईंधन खर्च बहुत ज्यादा हो गया है। इससे हजारों परिवारों की आय पर असर पड़ सकता है।
नई स्टडी में कहा गया है कि हीटवेव के दौरान ओजोन का स्तर तेजी से बढ़ता है। इससे दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं ने बड़े शहरों में निगरानी बढ़ाने की सलाह दी है।
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में बाघ के हमले में दो महिलाओं की मौत हो गई। इस साल राज्य में बाघ हमलों में मरने वालों की संख्या 21 पहुंच गई है। वन विभाग ने लोगों से जंगल किनारे सतर्क रहने की अपील की है।
भोपाल में अगले महीने नई इलेक्ट्रिक बसें शुरू होने की तैयारी है। इन बसों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है। सरकार का कहना है कि इससे प्रदूषण कम होगा और सार्वजनिक परिवहन बेहतर बनेगा।
देश में 4 से 15 जून के बीच सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सैटेलाइट तस्वीरों में मध्य भारत और प्रायद्वीपीय इलाकों में बादल कम दिखे हैं। मौसम विभाग को 20 जून के बाद मानसून के फिर सक्रिय होने की उम्मीद है।
विस्तृत चर्चा
मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी
देश के बड़े हिस्से में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार थमती नजर आ रही है। सैटेलाइट तस्वीरों में मध्य और दक्षिण भारत के कई इलाकों से मानसूनी बादल लगभग गायब दिख रहे हैं। इसका असर बारिश के आंकड़ों में भी साफ दिख रहा है। 4 से 15 जून के बीच देश में सामान्य से 64 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
मध्य प्रदेश में भी मानसून की एंट्री फिलहाल टलती नजर आ रही है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में मानसून दो दिशाओं से प्रवेश करता है, लेकिन इस समय दोनों ही रास्तों पर इसकी प्रगति रुकी हुई है। तेलंगाना के भद्राचलम क्षेत्र में मानसून 9 जून से ठहरा हुआ है। यह इलाका छत्तीसगढ़ की सीमा के बेहद करीब है और सामान्य परिस्थितियों में यहीं से होते हुए मानसून पूर्वी मध्य प्रदेश में प्रवेश करता है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक भद्राचलम क्षेत्र से मानसून आगे नहीं बढ़ता, तब तक मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में इसकी दस्तक मुश्किल है। दूसरी ओर अरब सागर शाखा भी 8 जून से लगभग स्थिर बनी हुई है। इसी वजह से राज्य में मानसून की एंट्री में देरी हो रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मध्य प्रदेश में मानसून अगले पांच दिनों या उसके बाद पहुंच सकता है।
हालांकि मौसम मॉडल कुछ राहत के संकेत दे रहे हैं। अनुमान है कि सप्ताह के अंत तक बारिश की गतिविधियों में सुधार हो सकता है। यदि मौजूदा वायुमंडलीय परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो अगले चार से पांच दिनों में मानसून महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और आसपास के अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ सकता है।
बारिश की कमी फिलहाल चिंता का विषय बनी हुई है। मध्य, दक्षिण और पूर्वी भारत के बड़े हिस्सों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इसकी मुख्य वजह पश्चिमी जेट स्ट्रीम का असामान्य व्यवहार है। इस वर्ष यह सामान्य स्थिति की तुलना में अधिक दक्षिण की ओर खिसक गई है, जिससे मानसून को सक्रिय रखने वाली पूर्वी हवाओं की ताकत कमजोर पड़ी है।
आमतौर पर यही हवाएं पूरे उपमहाद्वीप में गर्जन, तूफान और बारिश की गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं। लेकिन इस समय मजबूत पश्चिमी हवाएं इस प्रक्रिया को दबा रही हैं। यही कारण है कि मानसून की प्रगति धीमी पड़ गई है और देश के कई हिस्सों में बारिश का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
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