केरल में मानसून के आगमन में देरी, 1.2 करोड़ डिलीवरी कर्मचारी थकावट और डिहाइड्रेशन के शिकार, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के जंगलों में आग, सीधी में मातृ मृत्यु दर सबसे ज्यादा। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
केरल में मानसून के आगमन में देरी हुई है और अब इसके 3 से 4 जून के बीच पहुंचने की संभावना है। प्रशांत महासागर में रिकॉर्ड समुद्री तापमान के कारण यह अपनी सामान्य तिथि से लगभग पांच दिन पीछे चल रहा है।
भारत में भीषण गर्मी के बीच लगभग 1.2 करोड़ डिलीवरी कर्मचारी थकावट और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। वित्तीय दंड और काम के भारी दबाव के डर से ये कर्मचारी 45 डिग्री तापमान में भी काम करने को मजबूर हैं।
दिल्ली सरकार प्रदूषण कम करने के लिए हाइड्रोजन ईंधन वाली बसों की टेस्टिंग शुरू करने वाली है। एनटीपीसी (NTPC) और डीटीसी (DTC) के सहयोग से शुरू होने वाली यह पहल शहर में शून्य-उत्सर्जन परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम है।
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के सात जिलों में भीषण गर्मी के कारण जंगलों में आग लगी हुई है। आग पर काबू पाने के लिए भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है, जबकि इस आपदा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
मध्य प्रदेश ने इस सीजन में निर्धारित लक्ष्य से अधिक, यानी 104 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं की खरीद कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। राज्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेचने वाले किसानों की संख्या के मामले में देश में पहले स्थान पर है।
मध्य प्रदेश में अवैध खनन और बेनामी कारोबार को रोकने के लिए अब खनन पट्टा धारकों और ट्रांसपोर्टरों के लिए आधार सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी दस्तावेजों के उपयोग को खत्म करना और पारदर्शिता लाना है।
विस्तृत चर्चा
मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर की गंभीर स्थिति
ताजा अनुमानों के अनुसार, भारत की मातृ मृत्यु दर (MMR) घटकर 87 (प्रति 1 लाख जीवित जन्मों पर) पर आ गई है, जो एक निरंतर सुधरता हुआ रुझान है। हालांकि, मध्य प्रदेश इस मामले में देश के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर है, जहाँ यह दर 159 दर्ज की गई है।
सीधी जिले और जनजातीय बेल्ट की स्थिति
मध्य प्रदेश के पूर्वी जनजातीय क्षेत्र, जिसमें सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर जैसे जिले शामिल हैं, वहां स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। सीधी जिले में एमएमआर 211 है, जो राष्ट्रीय और राज्य औसत से कहीं अधिक है। एक वर्ष के भीतर इस जिले में 53 महिलाओं की मौत बच्चे को जन्म देते समय हुई है। इन मौतों में से 16 अस्पताल ले जाते समय और 13 घर पर ही हुईं, जबकि कुछ मौतें रेफरल के दौरान रास्ते में हुईं।
प्रणालीगत विफलता और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी सूत्रों के अनुसार, इस स्थिति के लिए स्वास्थ्य प्रणाली की विफलताओं को दोषी ठहराया गया है:
स्टाफ की भारी कमी: सीधी में 40 के बजाय केवल 22 मैटरनिटी स्टाफ सदस्य मौजूद हैं, जिसके कारण गंभीर मरीजों को दूसरे जिलों में रेफर कर दिया जाता है।
दूरी और परिवहन: जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर स्थित अस्पतालों में रेफर किए जाने के दौरान रास्ते में ही महिलाओं की जान चली जाती है।
एनीमिया (खून की कमी): इस जनजातीय बेल्ट में एनीमिया अभी भी एक बड़ी समस्या है, जो प्रसव के दौरान मौत का एक प्रमुख कारण बनती है।
योजनाओं का क्रियान्वयन: पोषण और पूरक आहार से जुड़ी सरकारी योजनाएं आदिवासी महिलाओं तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही हैं।
भारत की प्रजनन दर में गिरावट
एक नई सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate – TFR) घटकर 1.9 पर पहुंच गई है。 जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए ‘रिप्लेसमेंट लेवल फर्टिलिटी’ 2.1 मानी जाती है, लेकिन भारत अब इस स्तर से नीचे आ गया है। यह लगातार दूसरा साल है जब टीएफआर 2.1 से कम दर्ज किया गया है।
शहरी बनाम ग्रामीण और राज्य-वार अंतर
भारत के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच प्रजनन दर में बड़ा अंतर देखा गया है:
शहरी क्षेत्रों में टीएफआर 1.5 है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 2.1 है।
राज्यों की स्थिति: बिहार (2.9), उत्तर प्रदेश (2.4), मध्य प्रदेश (2.4) और राजस्थान (2.3) अभी भी रिप्लेसमेंट लेवल से ऊपर हैं। इसके विपरीत, दिल्ली (1.2), केरल (1.3), तमिलनाडु (1.3) और पश्चिम बंगाल (1.3) में यह दर काफी कम हो गई है।
शिक्षा का प्रभाव और सामाजिक चुनौतियां
रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा का फर्टिलिटी रेट पर सीधा प्रभाव पड़ता है। शिक्षित महिलाओं के लिए यह दर 1.8 है, जबकि अनपढ़ या कम शिक्षित ग्रामीण महिलाओं में यह 3.2 तक देखी गई है। इसके अलावा, देश में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या बढ़ रही है, खासकर केरल (15%) और तमिलनाडु जैसे राज्यों में। इसके कारण भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन और बुजुर्गों की देखभाल (Elderly Care) पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
एक सकारात्मक संकेत इन चुनौतियों के बीच एक अच्छी खबर यह है कि वर्ष 2024 में देश में लगभग 95% प्रसव अस्पतालों या स्वास्थ्य संस्थानों में हुए हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की सफलता को दर्शाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 94% से अधिक है।
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