‘पर्यावरण आज’ में गगनयान मिशन की अहम कामयाबी, तमिराबरणी नदी पर कोर्ट का फैसला, किसानों के लिए नई योजना, TB जांच में ड्रोन, असम में विरोध और ब्रह्मपुत्र डैम पर चिंता शामिल है। साथ में विस्तार से चर्चा फसल बीमा में हुए बदलावों पर।
आज की प्रमुख खबरें
भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन ने एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। ISRO ने गगनयान क्रू मॉड्यूल के लिए तीन ज़रूरी क्वालिफिकेशन टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इससे देश का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन असल मिशन के और करीब आ गया है।
स्पेस एजेंसी ने क्रू मॉड्यूल अप-राइटिंग सिस्टम (CMUS) के लिए ‘फ्लोट इन्फ्लेशन टेस्ट’ सफलतापूर्वक किया। यह टेस्ट सुनिश्चित करता है कि अंतरिक्ष से इंसानों को वापस लाने वाला कैप्सूल समुद्र में गिरने के बाद अपने-आप सीधी स्थिति में आ जाए — जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए एक बहुत ज़रूरी फ़ीचर है।
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने साल भर बहने वाली तमिराबरानी नदी को बचाने के मकसद से एक अहम आदेश में कहा कि किसी को भी धर्म के नाम पर जल स्रोत को प्रदूषित करने का अधिकार नहीं है।
डिवीज़न बेंच ने मृतक से जुड़ी चीज़ों — जैसे इस्तेमाल किए गए और नए कपड़े, तौलिए, चप्पल और अन्य सामान — को अंतिम संस्कार (मृतक की आत्मा की शांति के लिए किए जाने वाले रीति-रिवाज) के नाम पर नदी में विसर्जित करने पर गहरी चिंता जताई।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने प्रगति मिशन लॉन्च किया है। इसके ज़रिए देश के 20 लाख युवा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत किस्म के बीजों और स्मार्ट फार्मिंग टूल्स के बारे में जागरूक और प्रशिक्षित किया जाएगा और इन किसानों को सीधे बाजार से जोड़ा जाएगा जिससे उन्हें अपनी फसलों का सबसे सही दाम मिल सके।
योजना का फोकस इस बात पर है कि किसान पारंपरिक तरीकों को छोड़कर उन्नत खेती की ओर बढ़ें, जिससे उनकी लागत कम हो और पैदावार दोगुनी हो सके।
जल्द भारत में ट्यूबरक्लोसिस के खिलाफ लड़ाई में ड्रोन्स की सहायता ली जा सकती है। तेलंगाना के बीबीनगर स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की एक स्टडी में पाया गया है कि ड्रोन से बलगम के सैंपल भेजने पर मरीज़ों का औसत खर्च घटकर सिर्फ़ ₹91 रह गया, साथ ही जांच में लगने वाला समय भी 15 दिन से घटकर पांच दिन हो गया।
मरीज़ों के जेब से होने वाला औसत खर्च — जिसमें मरीज़ और उनके साथ रहने वालों के लिए इलाज, यात्रा, खाने और काम न कर पाने की वजह से हुई कमाई का नुकसान शामिल था — ड्रोन के इस्तेमाल से ₹9,451 से घटकर ₹90.9 रह गया। इस पहल से रिपोर्टिंग के समय में भी सुधार हुआ।
असम पुलिस ने रविवार को ज़मीन के अधिकारों के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ता प्रणब डोले को हिरासत में ले लिया। प्रणब काज़ीरंगा नेशनल पार्क के पास प्रस्तावित लग्ज़री होटलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे थे।
इन विरोध प्रदर्शनों में प्रोजेक्ट के संभावित पर्यावरणीय असर और स्थानीय ग्रामीणों के विस्थापन को लेकर चिंताएं जताई गई हैं।
चीनी भू-वैज्ञानिकों की एक स्टडी में पता चला है कि तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के नीचे एक एक्टिव फॉल्ट लाइन है। इससे बांध की मज़बूती पर असर पड़ सकता है। इससे बीजिंग के उन बार-बार किए गए दावों पर नए सवाल उठते हैं कि यह प्रोजेक्ट सुरक्षित होगा और इस इलाके में आपदाओं को रोकने में मदद करेगा। यह प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के पास है।
चर्चा
रिपोर्टर- चंद्र प्रताप तिवारी
फसल बीमा में किसानों को मिलेगा अधिक बीमा क्लेम?

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत मिली है। सरकार ने खरीफ फसलों की बीमित राशि बढ़ा दी है, जिससे अब नुकसान होने पर पहले से ज़्यादा क्लेम मिलेगा।
धान की बीमित राशि में 4,100 रुपये प्रति हेक्टेयर तक का इज़ाफ़ा हुआ है, जबकि मक्का में यह बढ़ोतरी 2,350 रुपये और सोयाबीन में 3,910 रुपये तक की है। इसके चलते क्लेम राशि भी बढ़ेगी — धान में 10 फ़ीसदी, मक्का में 7 फ़ीसदी और सोयाबीन में 5 फ़ीसदी तक ज़्यादा क्लेम मिल सकेगा।
यह बढ़ोतरी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत की गई है, और सरकार ने जिलेवार बीमित राशि अधिसूचित कर दी है। हालांकि, बीमित राशि बढ़ने के साथ प्रीमियम में भी मामूली बढ़ोतरी होगी।
कर्जदार किसानों के लिए बीमा कराना अनिवार्य है। अगर कोई बीमा नहीं कराना चाहता, तो उसे बैंक में लिखित सूचना देनी होगी। वहीं, गैर-कर्जदार किसानों के पास यह विकल्प है कि वे बीमा लें या न लें। बीमा कराने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है।
अब जानते हैं किन जिलों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी हुई है। धान में सबसे बड़ी बढ़ोतरी शिवपुरी में देखी गई, जहां राशि 40,700 से बढ़कर 44,800 रुपये हो गई। मक्का में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी बड़वानी में हुई, जहां राशि 31,760 से बढ़कर 34,000 रुपये पहुंच गई। सोयाबीन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी छतरपुर में हुई, जहां राशि 39,590 से बढ़कर 43,500 रुपये हो गई।
अब दो उदाहरणों से असली फायदा समझते हैं। सागर में धान की असिंचित फसल पर बीमित राशि 1,610 रुपये प्रति हेक्टेयर बढ़ी है, जिससे क्लेम 6,238 से बढ़कर 6,560 रुपये तक हो सकता है — यानी करीब 322 रुपये का फायदा। वहीं दतिया में सोयाबीन की बीमित राशि 1,750 रुपये बढ़ी है, जिससे किसानों को 467 रुपये तक ज़्यादा क्लेम मिल सकता है।
कुल मिलाकर, बीमित राशि बढ़ने से किसानों को नुकसान की स्थिति में बड़ा सहारा मिलेगा, हालांकि प्रीमियम में भी मामूली बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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