...
Skip to content

जानिए कैसे आप घर के अंदर भी हीट स्ट्रोक का शिकार हो सकते हैं?

हसदेव में नई कोल माइन से लेकर घर में हीट स्ट्रोक के खतरे तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

केंद्र सरकार की ‘सार्थक PDS’ योजना को मंजूरी, हसदेव में नई कोयला खदान को मंजूरी, गृहमंत्री का किसानों और चीनी मील मालिकों को आश्वासन, मप्र में परमाणु ऊर्जा के लिए नई समिति। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ। 


मुख्य सुर्खियां

केंद्र सरकार ने ‘सार्थक PDS’ योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। इस पहल के तहत खाद्यान्न वितरण की निगरानी बेहतर होगी और लाभार्थियों तक अनाज पहुंचाने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।


छत्तीसगढ़ के हसदेव जंगल क्षेत्र में, जिसे उच्च संरक्षण क्षेत्र माना जाता है, एक नई कोयला खदान को मंजूरी मिलने पर पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि इससे जंगल, वन्यजीव और स्थानीय आदिवासी समुदायों पर गंभीर असर पड़ सकता है।


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र में चीनी मिलों के लिए एमएसपी बढ़ाने और प्याज किसानों को सब्सिडी देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को बेहतर दाम दिलाने और कृषि क्षेत्र को राहत देने के लिए केंद्र सरकार आवश्यक कदम उठाएगी।


बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण एयर इंडिया, इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने कई घरेलू उड़ानों में कटौती शुरू की है।विशेषज्ञों का कहना है कि इससे हवाई टिकट महंगे हो सकते हैं और यात्रियों को कम सीटें उपलब्ध होंगी। 


नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में साफ शौचालय और पानी की कमी के कारण लगभग 17% छात्राओं ने स्कूल छोड़ दिया है। रिपोर्ट बताती है कि 9वीं-10वीं कक्षा की 16.8% छात्राएं मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान स्वच्छता सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई छोड़ देती हैं। 


मध्य प्रदेश सरकार ने परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना और उनकी मंजूरियों में तेजी लाने के लिए एक राज्य स्तरीय समिति गठित की है। यह समिति भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और वन विभाग की अनुमति दिलाने में समन्वय का काम करेगी।

विस्तृत चर्चा

घर में भी हीटस्ट्रोक का खतरा 

भीषण गर्मी और अस्पतालों की स्थिति देश के कई हिस्सों में, विशेष रूप से मध्य प्रदेश के भोपाल से लेकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक, अस्पताल हाई अलर्ट पर हैं। भोपाल में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है, जिससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बार की हीट वेव केवल डिहाइड्रेशन या थकान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिमाग और रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।

प्रमुख लक्षण और इंडोर हीट स्ट्रोक मरीजों में चक्कर आना, उल्टी, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, कंफ्यूजन और बेहोशी जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। एक चिंताजनक रुझान ‘इंडोर हीट स्ट्रोक’ के मामलों में वृद्धि है। खराब वेंटिलेशन, बंद कमरे, अधिक ह्यूमिडिटी और बार-बार बिजली कटौती के कारण घर के अंदर का तापमान भी खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है, जिससे घर के भीतर रहने वाले लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

शरीर पर प्रभाव और CVT का खतरा डॉक्टरों के अनुसार, जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर पहुँचता है, तो शरीर का कूलिंग सिस्टम विफल होने लगता है। शरीर से पानी और नमक तेजी से निकलता है, जिससे खून गाढ़ा हो सकता है और दिमाग की नसों में रक्त प्रवाह रुकने का खतरा बढ़ जाता है। इसे सीटीवी (CVT – Cerebral Venous Thrombosis) कहा जाता है।

हमीदिया अस्पताल के अनुसार, सीटीवी के मामलों में चार गुना वृद्धि हुई है।

हीट स्ट्रोक के लगभग 20% मरीज दिमाग से जुड़ी समस्याओं (सीटीवी) से पीड़ित होते हैं।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि लगातार सिरदर्द हो, पेनकिलर से आराम न मिले, या अचानक आंखों के सामने अंधेरा छा जाए, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

अस्पतालों की तैयारी और उपचार वाराणसी जैसे शहरों में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। सरकारी अस्पतालों में विशेष ‘कोल्ड रूम’ और ‘कूलिंग बाथ टब’ स्थापित किए गए हैं। यदि किसी मरीज का तापमान 105°F से अधिक हो जाता है, तो उसे तुरंत इन कूल टब में शिफ्ट कर शरीर का तापमान नियंत्रित किया जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य और जोखिम वाले समूह गर्मी का असर केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक भी है, जिससे लोगों में एंग्जायटी, चिड़चिड़ापन और मानसिक थकावट देखी जा रही है। इसमें सबसे ज्यादा जोखिम आउटडोर वर्कर्स, डिलीवरी स्टाफ, ट्रैफिक पुलिस और कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को है।

बचाव के उपाय विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

दिन भर में कम से कम 4 लीटर तरल पदार्थ लें।

नींबू पानी, ओआरएस (ORS) और नारियल पानी जैसे ड्रिंक्स का सेवन करें।

कैफीन युक्त पेय पदार्थों से बचें क्योंकि ये डिहाइड्रेशन बढ़ा सकते हैं।

निष्कर्ष जलवायु परिवर्तन के कारण हीट वेव की तीव्रता और अवधि हर साल बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब हीट स्ट्रोक केवल एक मौसमी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (Public Health Emergency) बन चुकी है।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।

Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

Connect With Us

Send your feedback at greport2018@gmail.com

Newsletter

Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.

When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.

Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.

EXPLORE MORE

LATEST

mORE GROUND REPORTS

Environment stories from the margins