सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर हाईलेवल कमिटी, कपास से 11% आयात शुल्क हटाने की तैयारी, दिल्ली की सबसे गर्म रात, मध्य प्रदेश में जानलेवा जल संकट। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
सुप्रीम कोर्ट ने ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है और कचरे की अवैध डंपिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है।
घरेलू बाजार में कपास की बढ़ती कीमतों और इनपुट लागत में वृद्धि को देखते हुए केंद्र सरकार सूती कपड़ा निर्माताओं को राहत देने के लिए 11% आयात शुल्क हटाने पर विचार कर रही है। उद्योग जगत का मानना है कि इस कदम से भारतीय कपड़ा निर्माताओं की वैश्विक बाजार में कॉम्पटीशन करने की क्षमता बढ़ेगी।
दिल्ली में 14 वर्षों में मई महीने की सबसे गर्म रात दर्ज की गई, जिससे शहर की बिजली की मांग 8,439 मेगावाट के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों में धूल भरी आंधी और हल्की बारिश से तापमान में थोड़ी गिरावट आने की संभावना है।
कर्नाटक के रामनगर जिले में कावेरी वन्यजीव प्रभाग के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) के भीतर एक बड़े आवासीय परिसर के निर्माण के प्रस्ताव का पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। लोगों का मानना है कि इस परियोजना से हाथियों और तेंदुओं जैसे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर क्षति हो सकती है।
केंद्र सरकार द्वारा पर्यावरण मंजूरी (environmental clearance) प्रदान करने के लिए एक नई ‘स्थायी संस्था’ बनाने के प्रस्ताव पर मध्य प्रदेश की मौजूदा राज्य स्तरीय संस्था (SEIAA) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। आलोचकों का मानना है कि यह नया बदलाव उन अधिकारियों को बचाने का प्रयास हो सकता है जिन्होंने पहले अवैध अनुमतियाँ जारी की थीं।
खजुराहो-पन्ना रेल लाइन परियोजना के पुराने रूट पर 54,000 से अधिक पेड़ काटे जाने के बाद, अब रूट बदलने के कारण 50,000 और पेड़ों की कटाई की जाएगी। रेलवे का दावा है कि पुराने रूट में खतरनाक मोड़ और सुरक्षा संबंधी खामियां थीं, जिसके कारण यह बदलाव आवश्यक हो गया।
विस्तृत चर्चा
आज की चर्चा में हमारे असोसिएट एडिटर वाहिद भट से जानिए अमेरिका-ईरान के समझौते की मौजूदा स्थिति के बारे में। साथ ही हमारे रिपोर्टर अब्दुल वसीम अंसारी बता रहे हैं कैसे मध्य प्रदेश में जल संकट एक जानलेवा प्रशासनिक लापरवाही बनता जा रहा है।
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता
अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौते पर चर्चा चल रही है जो न केवल पश्चिम एशिया, बल्कि वैश्विक व्यापार और तेल बाजार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि यह डील सफल होती है, तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, को फिर से खोला जा सकता है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस शिपमेंट गुजरता है।
डील की शर्तें: समझौते के 30 दिनों के भीतर ईरान इस मार्ग से माइन्स (mines) हटाने का काम शुरू करेगा और जहाजों से ली जाने वाली ट्रांजिट फीस बंद कर दी जाएगी। इससे शिपिंग की स्थिति युद्ध-पूर्व स्तर पर बहाल हो जाएगी।
परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंध: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु हथियारों और यूरेनियम संवर्धन की दिशा में आगे न बढ़े। इसके बदले में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने और उसके फ्रीज किए गए एसेट्स (assets) को रिलीज करने की बात चल रही है।
इस समझौते में लेबनान में शांति और वहां से इजरायली सेना की वापसी का मुद्दा भी शामिल है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘अब्राहम एक्ट’ को आगे बढ़ाते हुए सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान और मिस्र जैसे देशों से भी क्षेत्रीय शांति का हिस्सा बनने की अपील की है।
मध्य प्रदेश में जल संकट और प्रशासनिक विफलता
मध्य प्रदेश में गर्मी के कारण जल संकट जानलेवा स्तर तक पहुंच गया है। रायसेन के गैरतगंज में पानी भरने गई तीन मासूम आदिवासी बच्चियां कुएं में डूब गईं। वहीं, इंदौर जैसे स्वच्छ शहर में भी पानी के लिए जनता ने विधायक के घर का घेराव किया है।
जबलपुर, कटनी और अन्य जिलों के 800 गांवों के लिए 749 करोड़ रुपये की ‘पायली जल प्रदाय योजना’ शुरू की गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पाइप लाइनों में पानी की जगह सिर्फ हवा है।
राजगढ़ जिले के फतेहपुर गांव में 2 साल पहले पाइप लाइन बिछने के बावजूद पानी नहीं आया, जिसके कारण ग्रामीण अपनी प्यास बुझाने के लिए पड़ोसी राज्य राजस्थान के कुओं पर निर्भर हैं। स्रोतों के अनुसार, यह संकट केवल पानी की कमी नहीं बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक विफलता बन चुका है।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।
ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।
Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India
We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.
Connect With Us
Send your feedback at greport2018@gmail.com
Newsletter
Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.
When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.
Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.




