यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-202 है। सोमवार, 27 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए जलवायु परिवर्तन का देश-दुनिया के चुनावों पर असर और एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन ने क्यों किया बंद का आह्वान?
मुख्य सुर्खियां
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में केवल 41% पानी बचा है। उत्तराखंड के जलाशयों में तो सबसे कम 33% पानी ही बचा है।
देश के दुर्लभ जीव ‘सियाहगोश’ या कैराकल को विलुप्त होने से बचाने के लिए भारत का पहला ‘नेशनल मास्टरप्लान’ तैयार किया गया है। इसके तहत राजस्थान को इस जीव का मुख्य केंद्र (गढ़) बनाया जाएगा।
हिंदू-कुश हिमालय क्षेत्र में लगातार चौथे वर्ष बर्फ टिके रहने (snow persistence) में गिरावट दर्ज की गई है। 2026 में यह गिरावट औसत से लगभग 27% कम रही, जो गंभीर जल संकट का संकेत मानी जा रही है।
दिल्ली सरकार ने बढ़ते तापमान से निपटने के लिए ‘हीटवेव एक्शन प्लान 2026’ लॉन्च किया है। इसमें स्कूली बच्चों के लिए ओआरएस, अस्पतालों में विशेष ‘कूल रूम’ और मजदूरों के लिए काम के घंटों में बदलाव जैसे कदम शामिल हैं।
मध्य प्रदेश के 24 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल में पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के कारण कक्षा 8वीं तक के बच्चों के लिए 30 अप्रैल तक की छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं।
मध्य प्रदेश में 1 मई से जन गणना का काम शुरू होना है. मगर हीटस्ट्रोक के चलते वर्किंग आवर बदलने के बारे में विचार हो रहा है ताकि दोपहर में काम करने से बचा जा सके।
विस्तृत चर्चा
जलवायु परिवर्तन और चुनाव
एक्सट्रीम हीट वेव (भीषण गर्मी) का असर चुनावी प्रक्रिया पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में हीट वेव के कारण चार लोगों की मौत हुई है, जबकि केरल में समय से पहले आई गर्मी ने उम्मीदवारों और मतदाताओं दोनों को परेशान किया है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में दुनिया भर के 94 चुनाव चरम मौसमी घटनाओं के कारण बाधित हुए हैं।
भारत में बढ़ती चुनौतियां और आंकड़े भारत में चरम मौसमी घटनाओं का रुझान बढ़ रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के आंकड़ों के अनुसार, जहाँ 2022 में 314 दिन ऐसी घटनाएं दर्ज की गई थीं, वहीं 2025 में जनवरी से नवंबर के बीच 331 दिनों (99% से अधिक) तक चरम मौसमी घटनाएं दर्ज की गईं। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में मतदान के आखिरी दिन भीषण गर्मी के कारण कम से कम 33 पोलिंग अधिकारियों की मौत हो गई थी।
ऐतिहासिक उदाहरण और चुनावी प्रबंधन
ओडिशा (2019): साइक्लोन फानी की वजह से एक क्षेत्र में वोटिंग को स्थगित करना पड़ा था।
हिमाचल प्रदेश: यह पहला राज्य था जिसने चुनावों के लिए एक उचित आपदा प्रबंधन और तैयारी योजना बनाई थी।
चुनाव आयोग के उपाय: हीट वेव के जवाब में, भारतीय चुनाव आयोग ने पोलिंग स्टेशनों पर पीने के पानी, छाया और मेडिकल किट की व्यवस्था की है। हालांकि, वर्तमान में इलेक्शन कमीशन के पास जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कोई स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल या पुख्ता मैकेनिज्म नहीं है, जिसकी जरूरत बढ़ती जा रही है।
कृषि आदान विक्रेताओं का राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन
विरोध का मुख्य उद्देश्य एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन के आह्वान पर देश भर के लगभग 5 लाख खाद, बीज और कीटनाशक विक्रेता अपनी मांगों के समर्थन में सोमवार को कारोबार बंद रख रहे हैं। व्यापारी प्रत्येक जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं और प्रधानमंत्री व कृषि मंत्री के नाम ज्ञापन सौंप रहे हैं।
प्रमुख मांगें और चिंताएं
जबरन लिंकिंग का विरोध: व्यापारी उर्वरक कंपनियों द्वारा सब्सिडी वाली खाद के साथ अन्य गैर-जरूरी उत्पाद खरीदने की अनिवार्यता का विरोध कर रहे हैं, जो किसानों पर आर्थिक बोझ डालता है।
डिलीवरी और मार्जिन की समस्या: वर्तमान में डिलीवरी रेल हेड तक सीमित है, जिससे व्यापारियों पर प्रति बैग 40 से 50 रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है; वे इसे ‘फ्री ऑन रोड’ करने और सीधे विक्रय केंद्र तक सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही, डीलर मार्जिन को 1.5% से बढ़ाकर 8% करने की मांग की गई है।
कानूनी संशोधन: व्यापारी नए बीज अधिनियम और कीटनाशक विधेयक 2025 के कुछ प्रावधानों में संशोधन, ग्रामीण विक्रेताओं को पोर्टल की अनिवार्यता से मुक्त करने और एक्सपायर्ड स्टॉक को वापस लेने की अनिवार्यता लागू करने की मांग कर रहे हैं।
व्यापारी एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी दी है कि सब्सिडी वाली खाद के साथ अन्य उत्पादों की जबरन बिक्री को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए और इसे अपराध घोषित किया जाए।
ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।
Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India
We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.
Connect With Us
Send your feedback at greport2018@gmail.com
Newsletter
Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.
When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.
Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.





