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क्रिकेट स्टेडियम्स में पानी के दुरूपयोग पर एनजीटी की सख्ती

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-200 है। शुक्रवार, 24 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए एनजीटी का भूजल में बढ़ते प्रदूषण को लेकर राज्यों को दिया गया निर्देश और स्टेडियम्स में पानी के दुरूपयोग पर सख्तीके बारे में। साथ ही बात करेंगे नरवाई जलाने के मामले में मप्र के पहले स्थान पर पहुंचने की।


मुख्य सुर्खियां

केरल के कन्नूर में लू की चपेट में आने से इस सीजन की पहली मौत दर्ज की गई। हालांकि मौसम विभाग ने 26 अप्रैल से कई राज्यों में बारिश और आंधी के कारण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद जताई है।


केंद्र सरकार ने उन खबरों को पूरी तरह से भ्रामक बताया है जिनमें चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये की बढ़ोतरी की बात कही गई थी। सरकार का कहना है कि वर्तमान में ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।


दिल्ली में इस सीजन का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। यहां सफदरजंग मौसम केंद्र पर तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस और रिज क्षेत्र में 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।


जो पंचायतें सालाना 50 लाख रुपये से अधिक कमा रही हैं, वे अब बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बना सकेंगी। इन पंचायतों को रिवरफ्रंट, रिसॉर्ट और थीम पार्क जैसे व्यावसायिक प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए केंद्र से तकनीकी सहायता दी जाएगी।


केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर अब 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। इस फैसले से राज्य के किसानों से अतिरिक्त 22 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा सकेगा, जिसके लिए सरकार लगभग 25,850 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी।


भाजपा विधायक अजय विश्नोई की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव ने पुराने बारदाने की खरीदी के टेंडर को निरस्त कर दिया है। विधायक का आरोप था कि अधिकारियों ने मिलीभगत करके 20 रुपये के बारदाने को 54 रुपये में खरीदने की योजना बनाई थी।

विस्तृत चर्चा 

भूजल में प्रदूषण पर एनजीटी के निर्देश

नेशनल ग्रीन ट्राइबनल (NGT) ने एक स्वप्रेरित (suo-moto) मामले की सुनवाई करते हुए सभी 28 राज्यों को भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड के बढ़ते प्रदूषण को कम करने का निर्देश दिया है। ट्राइबनल ने राज्यों को जिला, ब्लॉक और गांव स्तर पर इस प्रदूषण से संबंधित डेटा जमा करने को कहा है।

निगरानी और सुधार के उपाय: एनजीटी ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) को राज्यों द्वारा अपनाए जा रहे उपायों की नियमित निगरानी करने और सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। सीजीडब्ल्यूए ने जल निस्पंदन संयंत्र (water filtration plants), आयरन एक्सचेंज प्रक्रिया और रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) जैसे समाधान सुझाए हैं।

स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं: पीने के पानी में आर्सेनिक के सेवन से आर्सन निकोसिस नामक बीमारी हो सकती है, जिसके लक्षणों में त्वचा पर घाव और कैंसर का खतरा शामिल है। वहीं, फ्लोराइड के अधिक संपर्क से हड्डियों और दांतों पर बुरा असर पड़ता है।

जल जीवन मिशन के तहत गांवों में नल से पानी तो पहुंचाया जा रहा है, लेकिन कई जगहों पर इसके शुद्धिकरण (filtration) का उचित प्रबंध नहीं है, जिससे प्रदूषण की समस्या बनी हुई है।


क्रिकेट स्टेडियमों में जल का टिकाऊ उपयोग

आईपीएल सीजन के बीच, एनजीटी ने देश के छह प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों और उनसे जुड़ी संस्थाओं को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस रखरखाव के लिए पानी के टिकाऊ उपयोग से जुड़े निर्देशों का पालन न करने पर दिया गया है।

नियम और उल्लंघन: वर्ष 2021 में एनजीटी ने निर्देश दिया था कि क्रिकेट एसोसिएशन भूजल निकासी को विनियमित करें और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे सिस्टम सुनिश्चित करें। जिन स्टेडियमों को नोटिस मिला है उनमें दिल्ली का अरुण जेटली स्टेडियम, जयपुर का सवाई मानसिंह स्टेडियम, रायपुर, नवी मुंबई, लखनऊ, हैदराबाद और कटक के स्टेडियम शामिल हैं।

एनजीटी ने चेतावनी दी है कि यदि ये स्टेडियम जल्द ही जल प्रबंधन और टिकाऊ सिस्टम लागू नहीं करते हैं, तो वहां होने वाली खेल गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।


मप्र में पराली जलाने की बढ़ती घटनाएं

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, गेहूं की पराली जलाने के मामले में मध्य प्रदेश देश में शीर्ष पर पहुंच गया है। 1 से 21 अप्रैल 2026 के बीच दर्ज किए गए कुल मामलों में से लगभग 69% हिस्सेदारी अकेले मध्य प्रदेश की है।

प्रमुख प्रभावित जिले: विदिशा जिला पराली जलाने में सबसे आगे है, उसके बाद उज्जैन, रायसेन, होशंगाबाद और सिवनी का स्थान है। मध्य प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है, जबकि हरियाणा और पंजाब में ये घटनाएं काफी कम दर्ज की गई हैं।

पराली जलाने के कारण: विशेषज्ञों (डॉ. आशीष श्रीवास्तव) के अनुसार, किसान गेहूं की कटाई के बाद ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई के लिए समय कम होने के कारण पराली जलाने का आसान तरीका अपनाते हैं।

किसानों को सुपर सीडर, रोटावेटर और पूसा डीकंपोजर जैसे कृषि यंत्रों और तकनीकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। पराली जलाना प्रतिबंधित है और उल्लंघन करने पर 2,500 से 15,000 रुपये तक का जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है।

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We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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