यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-164 है। शुक्रवार, 13 मार्च को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ आज पॉडकास्ट में जानिए केदारनाथ और आस-पास के क्षेत्रों में हो रही अप्रत्याशित गर्मी और कोविड वैक्सीन से संबंधित मौतों से जुड़ी ‘नो-फॉल्ट कंपनसेशन’ नीति के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
अमेरिका-ईरान जंग के बीच पहली बार सऊदी से कच्छा तेल लेकर जहाज भारत पहुंचा। इसी बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने कहा कि होर्मुज जलमार्ग आगे भी बंद रखा जाएगा।
LPG आपूर्ति संकट के बीच सरकार ने होटल और रेस्तरां जैसे व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए मिट्टी का तेल, कोयला, बायोमास और अन्य वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है ताकि एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके।
ईधन संकट के बीच संसद में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति रही। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने अमेरिका के प्रभाव में अपने ईधन से संबंधित निर्णय लिए हैं।
एलपीजी संकट के चलते कोटा में कोचिंग छात्रों के लिए खाना बनाने वाले हॉस्टल और मेस अब लकड़ीका सहारा ले रहे हैं। वहीं कश्मीर में भी स्प्रिंग सीजन से पहले टूरिज्म इंडस्ट्री पर बुरा प्रभाव पड़ा है।
मध्य प्रदेश को केंद्र सरकार ने 100% तुअर दाल खरीदने और सरसों एवं तुअर को भावान्तर योजना के तहत शामिल करने की मंज़ूरी दे दी है।
प्रदेश में आज से हीटवेव का अलर्ट है। नर्मदापुरम में दिन का अधिकतम तापमान 40.2°C और 10 शहरों में तापमान 38°C से ज्यादा रहा। 15 और 16 मार्च को प्रदेश में बारिश की संभावना है।
विस्तृत चर्चा
उत्तराखंड में मौसम का बदलता मिज़ाज

उत्तराखंड में बढ़ते तापमान और बदलते मौसम के कारण केदारनाथ रूट पर इस साल बर्फ काफी कम हो गई है। आमतौर पर मई के महीने तक यहाँ 5 से 6 फीट तक बर्फ रहती है, लेकिन इस साल मार्च में ही बर्फ लगभग खत्म हो चुकी है। विशेष रूप से गौरीकुंड से लेकर लिनचोली (Lincholi) कैंप तक का पूरा रास्ता ‘स्नोलेस’ (बर्फ मुक्त) हो चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों के दौरान कम बारिश और कम बर्फबारी इसका मुख्य कारण है। 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद यह पहली बार है जब विंटर सीजन में इतनी कम बर्फबारी देखी गई है।
पुनर्निर्माण और स्थानीय प्रभाव: बर्फ कम होने की वजह से केदारनाथ में पुनर्निर्माण का कार्य इस साल जल्दी, यानी 15 मार्च से ही शुरू होने वाला है, जो सामान्यतः अप्रैल के मध्य या अंत में शुरू होता था। बर्फ की कमी ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि इससे आने वाले महीनों में खेती-बाड़ी और पानी की उपलब्धता पर बुरा असर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरकाशी और चमोली जैसे इलाकों में हल्की बारिश और बिजली गिरने की संभावना है, जबकि राज्य के बाकी हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा। अचानक बढ़ती गर्मी और धूल-प्रदूषण के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। देहरादून के अस्पतालों में बच्चे सर्दी और सांस लेने में तकलीफ (breathing problems) जैसी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं।
वैक्सीन के दुष्प्रभाव और ‘नो-फॉल्ट कंपनसेशन’ नीति

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि कोविड वैक्सीन के गंभीर दुष्प्रभावों या इसके कारण होने वाली मौतों के लिए ‘नो-फॉल्ट कंपनसेशन’ नीति बनाई जाए। इसका अर्थ यह है कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा पाने के लिए किसी की लापरवाही साबित करने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए और न ही उन्हें अदालतों के चक्कर काटने चाहिए।
याचिकाकर्ता: कई परिवारों ने दावा किया कि वैक्सीन के बाद उनके परिजनों की मृत्यु हो गई या उन्हें खून के थक्के (blood clots) जमने जैसी गंभीर समस्याएं हुईं। उनका आरोप है कि वैक्सीन के संभावित जोखिमों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।
सरकार: सरकार का तर्क है कि वैक्सीन सभी परीक्षणों और मंजूरी के बाद लगाई गई थी और साइड इफेक्ट की निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र (AEFI) मौजूद है। सरकार ने सुझाव दिया कि प्रभावित लोग मुआवजे के लिए कंज्यूमर या सिविल कोर्ट जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के तर्क को पूरी तरह सही नहीं माना और कहा कि हर परिवार के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ना संभव नहीं है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) का हवाला दिया, जो जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार की बात करता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब सरकार ने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया है, तो नुकसान की स्थिति में पीड़ितों की मदद करना उसकी जिम्मेदारी बनती है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि वह वैक्सीन की वैज्ञानिक समीक्षा नहीं कर रहा है।
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