ज़ोजिला टनल का रास्ता साफ, मानसून की दस्तक, खाद महंगी पर किसानों को राहत — आज की सबसे ज़रूरी खबरें पर्यावरण आज में।
हेडलाईन्स
ईरान युद्ध की वजह से खाद की वैश्विक कीमतें बढ़ चुकी हैं, सरकार किसानों को अभी भी सब्सिडाईज़ रेट पर खाद बेच रही है। इसी के चलते सरकारी खज़ाने पर बोझ बढ़ गया है। खाद आपूर्ती का जो बजट 1.7 लाख करोड़ अनुमानित था वह बढ़कर 3.4 लाख करोड़ पर पहुंच गया है।
महाराष्ट्र सरकार ने कर्जमाफी योजना का विस्तार करते हुए 5.75 लाख अतिरिक्त किसानों को इसमें शामिल करने का फैसला किया है। यह वो किसान हैं जिन्हें 2017 और 2019 में कर्जमाफी योजना में शामिल नहीं किया गया था।
अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग ज़िले में अपर सियांग बांध परियोजना का विरोध करने वाले समूहों ने कथित तौर पर उन कई ग्रामीणों के घरों में तोड़-फोड़ की, जिन्होंने हाल ही में इस परियोजना के समर्थन में एक MoU पर हस्ताक्षर किए थे। जिन घरों को तोड़ा गया उसमें स्थानीय एमएलए ओनी पानयांग का घर भी था।
एम्बर (Ember) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ग्लोबल बिजली मिक्स में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी लगातार पांचवें साल घटकर 21.8% रह गई। 2025 में ग्लोबल बिजली की मांग में हुई बढ़ोतरी का लगभग 75% हिस्सा अकेले सोलर एनर्जी से पूरा हुआ, जबकि गैस का योगदान 5% से भी कम रहा।
मानसून ने केरल में दस्तक देने के 6 दिन बाद पूर्वोत्तर के सभी राज्यों को कवर कर लिया है। मंगलवार को यह मिजोरम, मेघालय, सिक्किम और पश्चिम बंगाल पहुंचा। अब तक 16 राज्यों में मानसून की एंट्री हो चुकी है।
ज़ोजिला टनल की आखिरी अड़चन खत्म
वाहिद भट, ग्राउंड रिपोर्ट
9 जून को ज़ोजिला टनल में एक बड़ा मुकाम हासिल हुआ — पहाड़ को चीरकर टनल के दोनों सिरे आपस में मिल गए।
लद्दाख के लोगों के लिए यह टनल किसी जीवनरेखा से कम नहीं है। हर साल भारी बर्फबारी की वजह से जोजिला पास महीनों बंद रहता है, जिससे लद्दाख का बाकी देश से संपर्क टूट जाता है। स्कूल, अस्पताल और राशन जैसी ज़रूरी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होती हैं। यह टनल बनने के बाद लद्दाख को पूरे साल हर मौसम में देश से जुड़े रहने का रास्ता मिल जाएगा।
सफर के लिहाज़ से भी यह बड़ा बदलाव लाएगी। श्रीनगर-लेह हाईवे पर 11,500 फीट की ऊंचाई पर बनी यह करीब 13 किलोमीटर लंबी टनल जोजिला पास को पार करने का वक्त डेढ़ घंटे से घटाकर सिर्फ 15 मिनट कर देगी।
सेना के लिए भी यह टनल बेहद अहम है। लद्दाख तक रसद और सप्लाई पहुंचाने का यह सबसे ज़रूरी रास्ता है — जैसा 1999 के कारगिल युद्ध में भी साबित हुआ था। खराब मौसम और बर्फीले तूफानों से सप्लाई चेन पर पड़ने वाला असर अब बहुत कम हो जाएगा।
इसे बनाना आसान नहीं था। हिमालय के इस खतरनाक भूगोल में 67 अलग-अलग तरह की चट्टानें हैं और सर्दियों में तापमान -30 से -40 डिग्री तक गिर जाता है। इन सब चुनौतियों के बावजूद 1200 से ज़्यादा मज़दूर — जिनमें करीब 80% स्थानीय लोग हैं — दिन-रात काम करते रहे।
अभी टनल के अंदर वेंटिलेशन और बिजली फिटिंग का काम बाकी है। सरकार का अनुमान है कि फरवरी 2028 तक यह आम लोगों के लिए खुल जाएगी। सोनमर्ग के पास पहले से तैयार Z-Morh टनल के साथ मिलकर यह एक पूरा सुरक्षित कॉरिडोर बनाएगी।
इसी मौके पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कारगिल में नियमित हवाई सेवा शुरू करने की अपनी पुरानी मांग फिर दोहराई।
कुल मिलाकर, यह टनल लद्दाख के लोगों के लिए सिर्फ एक सुरंग नहीं — बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और पर्यटन के साथ जिंदगी की एक नई सड़क है।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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