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मुआवज़े में दबी इंदौर सीवर में हुई मौत की हकीकत

Watch Video Report | Camera Yuvraj Singh Chouhan | Production Rajeev Tyagi

इंदौर शहर होली की तैयारी में लगा है, लेकिन त्यौहार के माहौल में शहर के जूनि इंदौर पुल के नीचे रेल ट्रैक्स के पार बसे हरिजन मोहल्ला में ख़ामोशी छायी है। दो नौजवान सफाईकर्मी – करण यादव (26) और अजय डोडिया (35) की सीवेज होल में उतरने से दो मार्च को मौत हो गयी। इंदौर नगर निगम की डिवॉटरिंग मशीन चोइथराम मंडी इलाके में सीवेज होल साफ़ करने पहुंची थी। सफाईकर्मी करण और अजय के साथ निगम का ड्राइवर अकबर भी स्पॉट पर पहुंचा। निगम की ओर से पर्यवेक्षण के लिए कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। सफाई-कार्य के दौरान डिवॉटरिंग मशीन का एक छोटा सा पाइप का हिस्सा गड्ढे में गिर गया जिसे लेने के लिए अजय अंदर गया और यह देख कि वो बाहर नहीं आया है, करण उसे निकालने गया और इसमें दोनों की जान चले गयी।

यह घटनाक्रम लगभग दो घंटे तक चला लेकिन निगम से मौके पर कोई नहीं पहुंचा। राजेंद्र नगर पुलिस स्टेशन टीआई नीरज बिरथरे बताते हैं,

“दोनों सफाईकर्मी लंबे समय से सीवेज होल में थे और उन्हें बचाने के लिए आसपास के लोग प्रयास कर रहे थे। दोनों को सीवेज में गए बहुत देर हो चुकी थी। आसपास के लोगों ने रस्सी के सहारे उन्हें बाहर निकाला। घटना की मर्ग रिपोर्ट कायम हो गयी है और जांच चल रही है। पीएम रिपोर्ट अभी नहीं आयी है।”

नगर निगम ने हर ज़ोन के लिए गन्दा पानी निकालने और खाली करने के लिए गाड़ी तय कर रखी है। यह हादसा ज़ोन 13, 14, 15 और 21 में काम करने वाली गाड़ी के साथ हुआ। गाड़ी का काम होता है जगह-जगह की सीवर लाइन से गंदगी इकट्ठा कर नगर निगम की प्राइमरी लाइन में डालना। हादसे के दौरान चोइथराम मंडी गेट पर भीड़ होने में ज़्यादा देर नहीं लगी। अजय के अंदर जाते ही हालात समझ आने लगे थे। वहां मौजूद तमाशबीन बताते हैं – जब मशीन गड्ढा साफ़ करने पहुंची तो उसका एक हिस्सा अंदर गिर गया। एक सफाईकर्मी सीढ़ी के सहारे उसे लेने पहुंचा लेकिन बाहर नहीं आया। कुछ देर में उसका शरीर पानी पर आ गया। यह देख दूसरा सफाईकर्मी उसे निकालने के लिए गया और वो भी बाहर नहीं आ पाया। मंडी के हम्मालों की मदद से दोनों को बाहर निकाला। मृतकों के पास मास्क या बूट जैसे कोई सुरक्षा उपकरण नहीं थे।

सीवर साफ़ करने वाले सफाईकर्मियों का काम रोज़ाना शाम के पहले ही ख़त्म हो जाता है। यह गाड़ियां ज़ोन और वर्कशॉप में पहुँच जाती है और कर्मियों की छुट्टी पांच बजे से पहले हो जाती है। लेकिन यह घटना शाम के समय घटी जब काम बंद हो जाता है। घटना के बाद निगम अधिकारियों को मैदान पकड़ने में देर नहीं लगी। घटना पर तुरंत बयान आया और मुआवज़ा भी घोषित हुआ। 

करण की तस्वीर को देखती उनकी पत्नी कविता यादव
करण की तस्वीर को देखती उनकी पत्नी कविता यादव

छह साल पहले करण यादव और कविता यादव (26) ने लव मैरिज की थी। उनका पांच साल का एक लड़का है कुणाल। घर में रिश्तेदारों की भीड़ है और वो बच्चा बाहर क्रिकेट खेल रहा है। उसे अंदाज़ा नहीं है कि पिता के साथ क्या हुआ है। करण घर में अकेला कमाने वाला था। कविता कहती हैं, “दोपहर में आखिरी बार बात हुई थी। उन्होनें कहा था कि छोटा सा काम है निपटा कर आ रहा हूँ। दिन हो या रात हो, भले ही बारिश क्यों ना हो, उन्हें कभी भी निगम से काम पर बुला लिया जाता था। उस दिन देर होते गयी और तब हमें फ़ोन आया कि करण गैस से प्रभावित हैं और अस्पताल में हैं। हमें किसी ने नहीं बताया कि उनकी मौत हो गयी है। उनके साथ कोई प्रशिक्षित अधिकारी भी नहीं था। भले ही आज महापौर ने तीस लाख का मुआवज़ा दिया और नौकरी का वादा किया, लेकिन इससे मेरा आदमी तो वापिस नहीं आएगा ना? मेरा सब चले गया। मैं नहीं चाहती हूँ कि आगे यह किसी के भी साथ हो।”

तीन घर छोड़ कर अजय का घर है। अजय और सोनू (30) का कोई बच्चा नहीं है। घर में बूढी मां हैं और अजय अकेला कमाने वाला था। टिन की छत के नीचे अजय के घरवाले बैठे हैं। घर में अजय की कोई तस्वीर नहीं है। घर पर तस्वीर निकलवाकर उसे फ्रेम करवाने वाला कोई नहीं बचा है। सोनू बताती है,

“मेरा सब कुछ ख़त्म हो गया है। घटना के बाद महापौर और अधिकारी घर आये थे। उन्होनें चेक दिया और मस्टर में नौकरी का वादा भी किया। उन्होनें घटना का संज्ञान लिया है और हमें सहायता का आश्वासन दिया है।”

फोन में अजय की तस्वीर दिखाती उनकी भाभी क्योंकि घर में उनकी कोई फ्रेम की हुई तस्वीर नहीं है
फोन में अजय की तस्वीर दिखाती उनकी भाभी क्योंकि घर में उनकी कोई फ्रेम की हुई तस्वीर नहीं है

इंदौर नगर निगम ने शुरू से यही कहा है कि दोनों मृतक निगमकर्मी नहीं थे बल्कि आउटसोर्स किये हुए कर्मचारी थे। घटना पर सीवर विभाग के अपर आयुक्त आशीष पाठक कहते हैं,

“यह दोनों निगम कर्मचारी नहीं थे। पूरे शहर में कई सीवेज होल हैं और मशीन द्वारा ही पूरा काम होता है। काम करने वालों के लिए गड्ढे में जाने के निर्देश नहीं रहते हैं।”

‘हाथ से मैला ढोने वालों के रूप में रोजगार पर प्रतिबंध और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013’ नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा सीवर/सेप्टिक टैंकों की जानलेवा  सफाई को नियंत्रित करता है। अधिनियम के हिसाब से सफाई के दौरान कम से कम तीन कर्मचारी मौजूद होने चाहिए जिनमें से एक पर्यवेक्षक होना चाहिए। सफाई से पहले उचित सुरक्षा उपकरण होने चाहिए और गैस परीक्षण करना चाहिए। उल्लंघन करने पर कारावास या जुर्माना हो सकता है। पर्यवेक्षक का काम होता है सावधानियां और सुरक्षा सुनिश्चित करना। पर्यवेक्षक सुनिश्चित करता है कि काम शुरू होने से पहले हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और मीथेन जैसी जहरीली गैसों की जांच के लिए गैस डिटेक्टरों (जैसे, लैंप या गीला लेड एसीटेट पेपर) का उपयोग किया जाए।

निगम के अनुसार इस मामले में मैनहोल में उतरने के लिए मना किया गया था। क्या पर्यवेक्षक की निगरानी में दोनों मृतक पाइप लेने उतरते? सर्वोच्च न्यायलय की गाइडलाइन्स के हिसाब से दोनों परिवारों को मुआवज़ा मिल गया जो महापौर ने जा कर दिया, लेकिन दूसरी ओर निगम ने इस घटना पर जवाबदेही से इंकार किया है।

इंदौर नगर निगम परिसर में खड़ी गाड़ियां, फोटो युवराज सिंह चौहान

वाल्मीकि सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कल्याणे (55) कहते हैं, “आठ बार से नंबर वन आ रहे इंदौर नगर निगम के साथ तकरीबन ग्यारह हज़ार वर्कर हैं। 1100-1200 परमानेंट वर्कर बचे हैं और दो हज़ार के लगभग जो नयी भर्ती हुई वो आउट सोर्स वर्कर हैं। इंदौर में यह घटना हुई और ऐसी ही घटना देशभर में होती है। सवाल यह है कि स्पॉट पर कोई पर्यवेक्षक क्यों नहीं था? उनका शव बाहर निकला तो उसपर एक भी सुरक्षा उपकरण क्यों नहीं था। घटना होने के बाद भी निगम से क्यों कोई नहीं पहुंचा उन्हें बाहर निकालने। नगर निगम उन्हें अपना कर्मी मानने से मना कर दिया लेकिन क्या वे यह भूल गए कि उनकी नियुक्ति तो निगम ने ही की है। आज कमिश्नर दौरे पर जाते हैं और कुछ भी चूक मिले तो तुरंत वर्कर की नौकरी चले जाती है। क्या अब नगर निगम के अधिकारियों की गलती मान कर उनके साथ भी ऐसा होगा?”

इस वीडियो रिपोर्ट में कैमरा युवराज सिंह चौहान और प्रोडक्शन कार्य राजीव त्यागी द्वारा किया गया है।

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  • Pranay is an Indore-based journalist and filmmaker whose lenses are always in search of How Ought We Live. At present, he is working with an organisation called HOWL. All his labour burns to invent the ideal love and science of joy, to realise the joy of living. In the endeavour, he is as well an activist, a music lover, a worker, and many more to be...

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