अशोक सिंह सीहोर जिले में शादियों में केटरिंग (खान पान प्रबंधन) का काम करते हैं, 13 मार्च से अप्रैल अंत तक उनके पास 12 शादियों के ऑर्डर हैं। लेकिन ईरान युद्ध की वजह से भारत में कमर्शियल सिलिंडर की रीफिलिंग पर लगी रोक ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं। अशोक सिंह कहते हैं “यह समय हमारे लिए कोरोना में लगे लॉकडाउन जैसा ही है, अभी मार्च में तो शादियां कम हैं, काम चल जाएगा। लेकिन अगर सिलिंडर संकट अप्रैल में भी जारी रहा तो हमारे लिए दिक्कतें बढ़ जाएंगी।”
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) के शिपमेंट भारत नहीं आ पा रहे हैं। इससे देश में एलएनजी आधारित ( CNG, PNG, LPG) फ्यूल सप्लाई दबाव में है और युद्ध के लंबे खिंचने की स्थिति में शॉर्टेज की स्थिति में भी पहुंच सकती है। इसे नियंत्रित रखने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 9 मार्च , सोमवार रात नैचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026 नोटिफाई किया, जिसमें 1955 के एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट को लागू किया गया। यह ऑर्डर गैस आवंटन के लिए चार-स्तर का प्रायोरिटी सिस्टम बनाता है। यह फ्रेमवर्क उन सेक्टर्स को प्राथमिकता देता है जो सीधे आम कंज्यूमर्स और ज़रूरी नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर डालते हैं, जिससे गैर-ज़रूरी इंडस्ट्रीज़ को सप्लाई कम हो जाती है। पहली प्राथमिकता घरेलू रसोई गैस एलपीजी, ट्रांसपोर्टेशन के लिए सीएनजी और पाईप्ड गैस सप्लाय के लिए पीएनजी को दी गई है।
जहां एक तरफ घरेलू एलपीजी सिलिंडर आपूर्ती को प्राथमिकता दी गई है वहीं कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर जिनका उपयोग होटल, रेस्त्रां और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में होता है, की रीफिलिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इससे अशोक सिंह जैसे लोग जो अपने व्यवसाय के लिए कमर्शियल सिलिंडर पर निर्भर हैं इस समय परेशानी में हैं।

अशोक सिंह बताते हैं कि अप्रैल माह में उनके पास करीब 10 शादियों के ऑर्डर हैं। एक शादी में 1000 लोगों का दो समय का भोजन बनाने में औसत 10-15 गैस सिलिंडर की आवश्यक्ता होती है। “हमारे पास दो तरह के कस्टमर होते हैं, एक वो जो अपने गैस सिलिंडर की व्यवस्था खुद करते हैं, वहीं 70 फीसदी ऐसे कस्टमर होते हैं जो गैस सिलिंडर की व्यवस्था की ज़िम्मेदारी केटरर्स, यानी हम पर डालते हैं।” अशोक आगे कहते हैं “हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि शादी में खाना अच्छा और समय पर देने की टेंशन लें या सिलिंडर के प्रबंधन की। हम इस समय बेहद तनाव के दौर से गुज़र रहे हैं।”
शादियों में गैस सिलिंडर की खपत का खेल
ग्राउंड रिपोर्ट ने शादियों में इस्तेमाल होने वाले रसोई गैस सिलिंडर के प्रबंधन को अच्छे से समझने के लिए उन लोगों से भी बात की जो इस जद्दोजहद से गुज़र चुके हैं। सीहोर जिले की आष्टा तहसील में रहने वाले नीलेश जैन के छोटे भाई की शादी जनवरी माह में हुई है। वो बताते हैं कि उन्होंने गैस सिलिंडर की व्यवस्था खुद ही की थी, यह जिम्मा उनके केटरर पर नहीं था। अशोक सिंह ने ही उनके यहां केटरिंग का काम किया था। नीलेश कहते हैं “मेरे यहां 1200 लोगों का खाना बना था, इसमें 15 गैस सिलिंडर की व्यवस्था हमने खुद की थी।” नीलेश बताते हैं कि उन्होंने केवल 3 कमर्शियल सिलिंडर खरीदे थे बाकी 12 घरेलू गैस सिलिंडर का उपयोग किया था। वो कहते हैं “सिलिंडर वालों को 50 रुपए अधिक दो तो वे लोग सिलिंडर दे देते हैं।” नीलेश के मुताबिक अगर15 कमर्शियल गैस सिलिंडर खरीदेते तो खर्च बढ़ जाता।
7 मार्च 2026 से लागू नई दरों के अनुसार, भोपाल में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी सिलिंडर 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद ₹918.50 का हो गया है। पिछले महीने यह कीमत ₹858.50 थी। इसके अलावा, 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल सिलिंडर ₹115 महंगा होकर ₹1910.50 के आसपास मिल रहा है। अगर इस कीमत पर नीलेश 15 कमर्शियल गैस सिलिंडर खरीदते तो उनका कुल खर्च 28,650 रुपए होता लेकिन 12 घरेलू गैस सिलिंडर और 3 कमर्शियल गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करने की वजह से उनका खर्च 17,346 रुपए के करीब ही रहा।

आपको बता दें कि घरेलू गैस सिलिंडर लाल रंग का होता है और इसका भार 14 kg तक होता है वहीं कमर्शियल LPG सिलेंडर नीले रंग का होता है और सबसे आम कमर्शियल साइज़ 19 kg है। यह ज़्यादा डिमांड, इंडस्ट्रियल और बिज़नेस इस्तेमाल के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिनमें घरेलू सिलेंडर के मुकाबले ज़्यादा कैपेसिटी, ज़्यादा फ़्लो रेट और बेहतर सेफ़्टी सिस्टम होते हैं।
घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी सप्लाई में बाधा न इसीलिए सरकार ने कमर्शियल सिलिंडर की रीफिलिंग पर रोक लगाई है। लेकिन हमारी पड़ताल में यह सामने आया है कि सीहोर, राजगढ़, भोपाल जैसे शहरों में व्यवसायिक कामों के लिए भी घरेलू गैस सिलिंडर का ही इस्तेमाल हो रहा है और कमर्शियल सिलिंडर की अनुपलब्धता की स्थिति में यह और अधिक बढ़ सकता है।
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में मौजूद हमारे संवाददाता अब्दुल वसीम अंसारी ने शहर में घूम कर होटल, रेस्त्रां की जांच की। उन्होंने पाया कि ज्यादातर होटल संचालक घरेलू रसोई गैस का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। कई लोगों ने जांच के समय अधिकारियों को दिखाने के लिए कमर्शियल गैस सिलिंडर अपने यहां ज़रुर रखे हुए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी पाया कि सड़क किनारे छोटे चाय और फूड स्टॉल चलाने वाले नियमों का पालन कर रहे हैं। वे लोग कमर्शियल गैस सिलिंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

व्यवसायिक काम के लिए घरेलू गैस?
क्या कमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ती बाधित होने से घरेलू गैस सिलिंडर का उपयोग बढ़ सकता है? इस सवाल पर एलपीजी असोसिएशन के नैशनल वाईस प्रेसीडेंट आर.के गुप्ता ने समाचार एजेंसी ए.एन.आई को बताया कि “गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनीज़ इस मामले की समीक्षा कर रही हैं और डिस्ट्रक्ट एडमिनिस्ट्रेशन इसे क्लोज़ली मॉनीटर कर रहा है।”
इस क्लोज़ मॉनिटरिंग को जांचने के लिए हमने राजगढ़ जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी अजीत कुमार सिंह से भी बात की। वो दुकानदारों के द्वारा लंबे समय से कमर्शियल सिलेंडर की जगह घरेलू सिलेंडर उपयोग में लाए जाने वाले सवाल को टालते हुए नजर आए। उन्होंने कहा “हम समय-समय पर जांच करते रहते हैं, अगर ऐसा है तो दोबारा जांच करवा लेते हैं। अगर कुछ मिला तो आपको भी सूचित कर देंगे।”
कमर्शियल सिलिंडर को लेकर आए नए नियम ने राजगढ़ और सीहोर जैसे देश के उन छोटे शहरों की पोल खोल दी है, जहां घरेलू गैस सिलिंडर के व्यवसायिक उपयोग पर रोक के नियम का पालन सामान्य दिनों में भी सख्ती से नहीं करवाया गया।
गैस वितरण एजेंसी पर बढ़ती भीड़?
रसोई गैस सिलिंडर को लेकर आशंकाओं ने स्थानीय गैस एजेंसी के दफ्तरों पर लोगों की आवाजाही बढ़ा दी है। जब हम 11 मार्च को दोपहर 3 बजे सीहोर स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम गैस एजेंसी पहुंचे तो यहां काफी भीड़ दिखाई दी, अंदर बैठे कर्मचारी परेशान से दिखे। यहां काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि सुबह से बैठा हूं अभी तक लंच भी नहीं किया है। लोग आना बंद ही नहीं हो रहे। वो बताते हैं “सरकार भी कह रही है, हम भी यही कह रहे हैं कि गैस आपूर्ती सामान्य है, फिर भी लोग परेशान हैं।”
गैस एजेंसी संचालक मुस्तफा हुसैन घरेलू गैस सिलिंडर के कमर्शियल इस्तेमाल की आशंका से इंकार करते हैं। वो कहते हैं कि घरेलू गैस सिलिंडर हासिल करने के लिए नियम सख्त कर दिये गए हैं। ब्लैक मार्केटिंग का स्कोप बेहद कम है क्योंकि अब कंज़्यूमर को अपने मोबाईल फोन से ही सिलिंडर बुक करना होता है। जिनके पास दो सिलिंडर कनेक्शन है उनके लिए वेटिंग का समय 30 दिन कर दिया गया है, तो वहीं एक सिलिंडर कनेक्शन वालों को 25 दिन का वेट करना होगा। डिलीवरी के समय कंज्यूमर के रिजिस्टर्ड नंबर पर ओटीपी आता है, जो उसे डिलीवरी के समय देना होता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि डिलीवरी असली कंज्यूमर को ही दी गई हैं।
प्रशासन स्तर पर बैठकों का दौर
मध्य प्रदेश में ईंधन संकट से निपटने के लिए मंत्रियों की दो कमेटियां गठित की गई हैं जो निगरानी रखने का काम करेंगी। मंगलवार 10 मार्च को कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य में रसोई गैस, पेट्रोल डीज़ल के स्टॉक को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के साथ चर्चा की। खाद्य और नागरिक आपूर्ती विभाग ने बैठक में बताया कि अभी प्रदेश में पेट्रोल डीज़ल का 10 दिन, सीनजी और पीएनजी का 7 दिन का स्टॉक बाकी है, और रसोई गैस की आपूर्ती जारी है। एमएसएमई मिनिस्टर चैतन्य कश्यप ने कमर्शियल सिलिंडर पर रोक से छोटे कुटीर उद्योगों पर प्रभाव पड़ने की बात बैठक में कही है।
विकल्प क्या हैं?
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक सीहोर शहर में हर रोज़ करीब 80 कमर्शियल गैस सिलिंडर की खपत होती है, जिले में 150 सिलिंडर और पूरे राज्य में कुल एलपीजी खपत में कमर्शियल का हिस्सा 7 फीसदी है। हॉस्पिटल और शैक्षणिक संस्थानों को छोड़कर किसी भी व्यवसायिक गतिविधी के लिए गैस सिलिंडर उपलब्ध नहीं रहेगा।
हुसैन से जब हमने पूछा कि ऐसी स्थिति में होटल संचालकों के पास क्या विकल्प हैं? तो वो कहते हैं “लकड़ी जलाना”। हुसैन आगे बताते हैं कि उनका खुद का होटल है जो भोपाल में संचालित है। उनका प्रतिदिन का विक्रय 4 लाख रुपए का है। उनके मुताबिक यह रमज़ान का समय है, यह वही वक्त था जब होटल संचालक अच्छी कमाई कर सकते थे। लेकिन कमर्शियल सिलिंडर पर रोक ने सबकुछ संकट में डाल दिया है। हुसैन कहते हैं “मैने अपनी होटल के लिए कल ही 4 लाख रुपए की इलेक्ट्रिक भट्टी का ऑर्डर दिया है, क्योंकि काम तो नहीं रोका जा सकता।”
गैस सिलिंडर के विकल्प पर अशोक सिंह कहते हैं कि ज्यादातर मैरिज गार्डन में अब लकड़ी जलाकर काम करने वाली भट्टियां नहीं है। इलेक्ट्रिक विकल्प के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। गैस सिलिंडर ही एक ऐसा विकल्प है जो शादी जैसे बड़े आयोजन में कारगर है।
अशोक को उम्मीद है कि आने वाले समय में सरकार उनकी समस्याओं का हल ज़रुर खोजेगी। वो चाहते हैं कि यह युद्ध तुरंत समाप्त हो जाए और वो अमन और चैन से अपना काम जारी रख सकें।
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