मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित वन विहार नेशनल पार्क में वन्यजीव सुरक्षा में बड़ी चूक और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। ग्राउंड रिपोर्ट के पास मौजूद दस्तावेज बताते हैं कि अधिकारियों ने नकली लाइसेंस के आधार पर बाघों और तेंदुओं को संदिग्ध मांस की आपूर्ति करवाई है।
इस घोटाले की कड़ियां भोपाल के जिंसी स्लॉटर हाउस में चल रहे अवैध मवेशी मांस कारोबार से जुड़ती हैं। 4 फरवरी 2026 को मुख्य प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा जारी एक गोपनीय आदेश में इसका उल्लेख है। नगर निगम की स्पष्ट चेतावनी के बावजूद यह सिलसिला चलता रहा है।
जिंसी स्लॉटर हाउस से जुड़ाव
पूरा मामला भोपाल के जिंसी स्लॉटर हाउस से जुड़ा है, जिसे असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा संचालित करता था। बजरंग दल और जय मां भवानी संगठन ने पुलिस को सूचना दी थी। 17 दिसंबर 2025 को पुलिस ने एक ट्रक से 26 टन मांस जब्त किया गया है। कागजों में इसे भैंस का मांस बताया गया था, इसलिए ट्रक छोड़ दिया गया। बाद में पुलिस ने नमूने मथुरा की प्रयोगशाला भेजे। जांच में पुष्टि हुई कि मांस मवेशियों का था। इसके बाद असलम चमड़ा और ट्रक चालक को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और नगर निगम के बूचड़खाने को सील कर दिया गया है।
नगर निगम की चेतावनी की अनदेखी
नगर निगम की पशु चिकित्सा शाखा ने 16 मई 2025 को पत्र संख्या 155/P.Chi.Sha./2025 के माध्यम से वन विहार प्रबंधन को चेतावनी दी थी। पत्र में कहा गया था कि एवन मटन एंड चिकन शॉप के असलम कुरैशी और अयाज कुरैशी के लाइसेंस फर्जी हैं। निविदा में दिए गए लाइसेंस नंबर 8000073681 और 8000078908 नगर निगम ने कभी जारी नहीं किए थे। इसके बावजूद वन विहार में मांस की आपूर्ति जारी रही और फर्जी शपथपत्रों के आधार पर भुगतान भी किया गया।
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि यह सामान्य गलती नहीं है। उनके अनुसार वन विहार के अधिकारियों ने पत्र को दबा दिया, जिससे संबंधित लोगों को संरक्षण मिला और जानवरों की जान जोखिम में पड़ी।
केरवा डैम में गिद्धों की मौत
ये ही आपूर्तिकर्ता केरवा डैम स्थित गिद्ध संरक्षण परियोजना को भी मांस दे रहे थे। जून 2025 में वहां तीन गिद्धों की मौत हुई थी। अजय दुबे द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार जांच में संकेत मिले कि मांस में हानिकारक दवाएं या जहर हो सकता है। इसके बाद जांच अचानक रोक दी गई और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
दुबे ने सवाल उठाया कि गिद्धों की मौत की जांच क्यों नहीं आगे बढ़ी और इन विक्रेताओं के बिल कैसे स्वीकृत हुए। उनके अनुसार इससे मिलीभगत की आशंका पैदा होती है और वन्यजीव संरक्षण से समझौता नहीं होना चाहिए।
तीन दिन में रिपोर्ट देने के आदेश
मुख्य प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख ने 4 फरवरी 2026 को इस मामले में आदेश जारी कर वन विहार प्रबंधन से तीन दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा है कि वन्यजीव सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। भविष्य में निविदा प्रक्रिया में दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य किया जाएगा।
अजय दुबे ने विक्रेताओं और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आपूर्ति तुरंत बंद करने और व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही है। उनका कहना है कि वान विहार जैसे स्थानों पर पारदर्शिता जरूरी है और जानवरों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।
यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं दिखता। यह प्रदेश की वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। अब नजर तीन दिन में आने वाली जांच रिपोर्ट पर है कि कार्रवाई किस स्तर तक पहुंचती है।
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