केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मंगलवार को कचरा प्रबंधन के नए नियम 2026 जारी किए। ये नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएंगे और 2016 के पुराने नियमों की जगह लेंगे।
नए नियमों के तहत अब घर से ही कचरे को चार हिस्सों में बांटना जरूरी होगा। साथ ही ज्यादा कचरा पैदा करने वालों की परिभाषा भी बढ़ाई गई है। नियम न मानने पर जुर्माना भी लगेगा।
“अगर इन नियमों को सही से लागू किया गया तो भारत में कचरा प्रबंधन में बहुत सुधार होगा,” काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर की प्रियंका सिंह ने कहा।
पहले क्या था, अब क्या बदलेगा
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कचरे के प्रबंधन के लिए अब तक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 का पालन किया जाता था। नोटिफिकेशन के मुताबिक, उन रूल्स में बल्क वेस्ट जेनरेटर्स के लिए फ्लोर एरिया या पानी के इस्तेमाल की लिमिट तय नहीं थी।
साल 2016 के नियमों में कचरे के निपटारे की ऑनलाइन निगरानी की भी सुविधा नहीं थी। प्रदूषण फैलाने वाले को जुर्माना देने का भी कोई प्रावधान नहीं था।
अब बड़े कचरा उत्पादकों में वो सभी शामिल होंगे जिनका क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर से बड़ा है, जो रोज 40,000 लीटर से ज्यादा पानी इस्तेमाल करते हैं, या जो रोज 100 किलो से ज्यादा कचरा पैदा करते हैं। इसमें सरकारी दफ्तर, कंपनियां, बड़ी इमारतें, सोसायटी, यूनिवर्सिटी और हॉस्टल शामिल होंगे। शहरों में कुल कचरे का 30 फीसदी इन्हीं जगहों से निकलता है।
इन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। गीला कचरा अपनी जगह पर ही प्रोसेस करना होगा। अगर ऐसा नहीं कर सकते तो सर्टिफिकेट लेकर फीस देनी होगी।
“CEEW की रिपोर्ट बताती है कि कचरे को न बांटना, सही डेटा न होना और कचरा कम करने पर ध्यान न देना बड़ी समस्याएं हैं,” सिंह कहती हैं। “नए नियमों में कचरे को चार तरह से बांटना अनिवार्य है। इससे गंदगी कम होगी, काम आसान होगा और कूड़े के ढेर घटेंगे।”
अब ज्यादा जगहों को बड़े कचरा उत्पादक माना जाएगा। इससे जिम्मेदारी बढ़ेगी और नगर निगमों का बोझ कम होगा।
नया सिस्टम कैसे काम करेगा?
अब घर से ही कचरे को चार डिब्बों में डालना होगा – गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और खास देखभाल वाला कचरा।
गीले कचरे में किचन का कचरा, सब्जी और फलों के छिलके आएंगे। इनसे खाद बनाई जाएगी या गैस बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा।
सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच होगा। इन्हें रीसाइकिल किया जाएगा।
सैनिटरी कचरे में डायपर, सैनिटरी नैपकिन जैसी चीजें आएंगी। इन्हें अच्छे से बंद करके अलग रखना होगा।
खास देखभाल वाले कचरे में पेंट के डिब्बे, बल्ब, पारे वाले थर्मामीटर और पुरानी दवाइयां होंगी। इन्हें खास एजेंसी उठाएगी या फिर तय जगहों पर जमा करना होगा।
एक ऑनलाइन पोर्टल पर कचरे के हर काम की जानकारी रहेगी – कचरा बना, उठाया गया, ले जाया गया, प्रोसेस हुआ या फेंका गया। जो प्रदूषण फैलाएगा उसे जुर्माना देना होगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गाइडलाइन बनाएगा और राज्य बोर्ड जुर्माना लगाएंगे।
सीमेंट फैक्ट्री और कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट को कचरे से बने ईंधन का इस्तेमाल करना होगा। अभी 5 फीसदी है, छह साल में इसे 15 फीसदी तक बढ़ाना होगा।
जो कचरा अलग नहीं करेगा उसे ज्यादा फीस देनी होगी। अब कूड़े के ढेर में सिर्फ वही चीजें जाएंगी जिन्हें रीसाइकिल नहीं किया जा सकता।
सरकार पहले कचरा कम करने पर जोर दे रही है, फिर दोबारा इस्तेमाल, रीसाइकिल और आखिर में फेंकना।
और क्या खास प्रावधान हैं?
पुराने कचरे के ढेरों की मैपिंग की जाएगी और उन्हें समय पर साफ करना होगा। हर तीन महीने में रिपोर्ट देनी होगी और हर साल ऑडिट होगा।
पहाड़ी इलाकों और द्वीपों में पर्यटकों से फीस ली जा सकती है। कचरा प्रबंधन की सुविधा के हिसाब से पर्यटकों की संख्या भी कंट्रोल की जा सकती है।
होटल और रेस्टोरेंट को अपना गीला कचरा खुद प्रोसेस करना होगा।
कचरा प्रोसेसिंग प्लांट के आसपास बफर जोन रखना होगा। जो प्लांट रोज 5 टन से ज्यादा कचरा प्रोसेस करते हैं उनके लिए यह जरूरी है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बफर जोन की साइज और वहां क्या हो सकता है इसकी गाइडलाइन बनाएगा। इससे राज्यों को कचरा प्रोसेसिंग के लिए जमीन देने में आसानी होगी।
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