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क्यों COP30 में आदिवासियों ने किया विरोध प्रदर्शन? 

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ का डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का 63वां एपिसोड है। बुधवार, 12 नवंबर को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में बात COP30 में हुए प्रदर्शन, नाइंतज़ामी और मध्य प्रदेश में भावान्तर की दुविधा पर।

हेडलाइंस

ट्रोपिकल स्ट्रोम फंग-वोंग के चलते ताईवान में करीब 3000 लोगों को विस्थापित किया गया है। आपको बता दें कि इस तूफान के चलते फिलिपीन्स में 25 लोगों की मौत हुई है और 1.4 मिलियन लोगों को विस्थापित होना पड़ा है।   

मंगलवार को दर्जनों आदिवासी प्रदर्शनकारियों ने COP30 जलवायु शिखर सम्मेलन स्थल में जबरन घुसकर प्रदर्शन किया। वह क्लाइमेट एक्शन तथा वन संरक्षण की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने यूएन कम्पाउंड में प्रवेश की मांग की, जहां दुनिया भर के हजारों प्रतिनिधि इस साल ब्राजील के अमेज़न शहर बेलेम में संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

दिल्ली में इस सीजन पहली बार हवा गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई. बुधवार सुबह NCR का औसत AQI 413 रहा। दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पोंस एक्शन प्लान यानि GRAP का स्टेज 3 लागू कर दिया गया है। 

GRAP 3 लागू होने के बाद गैरज़रूरी निर्माण कार्य, खनन, स्टोन क्रेशर बंद रहेंगे वहीं स्कूल हाइब्रिड मोड़ में चलाए जाएँगे।  

आज सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के प्रदूषण को लेकर सुनवाई भी होने वाली है। इससे पहले कोर्ट को बताया गया है कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं के कारण राजधानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।

यूनियन जल शक्ति मिनिस्टर द्वारा पहले जल संचय जन भागीदारी अवार्ड की घोषणा की गई। इसमें देश में सभी राज्यों में तेलंगाना पहले नंबर पर रहा। यहां जल संचय जन भागीदारी के तहत 5.2 लाख वाटर कंज़र्वेशन स्ट्रक्चर बनाए गए हैं। 

ओडिशा के राउरकेला में एक हाथी ने 3 लोगों की कुचलकर हत्या कर दी। 

दिल्ली की ही तरह मध्य प्रदेश में भी हवा ख़राब होती जा रही है। मंगलवार को भोपाल का औसत AQI 200 के पार रहा। बताया जा रहा है कि हवा में PM 2.5 के कण बढ़ गए हैं जिसके कारण यह उछाल आया है। वहीं भोपाल से लगे हुए सीहोर और होशंगाबाद सहित प्रदेश भर में कुल 3 हज़ार से ज्यादा पराली जलाने की घटनाएँ दर्ज की जा चुकी हैं।   

भावांतर योजना-2025 अंतर्गत सोयाबीन बेचने वाले किसानों के लिए 10 नवम्बर 2025 को 4036 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में बेची है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी।

भोपाल के केरवा डैम का एक हिस्सा धंस जाने के कारण इसके गेट क्षतिग्रस्त हो गए। दैनिक भास्कर ने अपनी खबर में बताया है कि गेट कमज़ोर होने की रिपोर्ट जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री ने डेढ़ साल पहले ही दे दी थी। इस डैम को बने हुए लगभग 50 साल हो चुके हैं। 

विस्तृत चर्चा

पॉडकास्ट में दो मुख्य विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई है: COP 30 (जलवायु शिखर सम्मेलन) का अपडेट और मध्य प्रदेश की भावांतर योजना

COP 30 में क्या-क्या हुआ?

इकोलॉजिकल डेप्थ का मुद्दा: कॉन्फ्रेंस के दौरान इकोलॉजिकल डेप्थ का मुद्दा ज़ोरों से चला। कई लोगों ने यह बात रखी कि अमीर देशों ने ग्रह से बहुत कुछ लिया है, और अब उन्हें वापस देने का समय आ गया है।

जर्मनी का अनाउंसमेंट: जर्मनी के डेवलपमेंट मिनिस्टर ने घोषणा की है कि उनकी मिनिस्ट्री भविष्य के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में जर्मन और यूरोपियन कंपनीज़ को प्राथमिकता देगी। जर्मनी ट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉर एवर फैसिलिटी को भी सपोर्ट करेगा।

COP30 Day 2: Climate Talks Intensify Amid Protests & New Pledges
Around the venue at COP30 in the Brazilian Amazon. Photo: © UN Climate Change – Kiara Worth

प्रदर्शन: COP के बाहर सिविल सोसाइटी ग्रुप्स और क्लाइमेट ग्रुप्स द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन हुए। 

  • प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कार्बन मार्केट सिर्फ अमीर देशों को प्रदूषण जारी रखने का लाइसेंस देता है।
  • उनकी मांग है कि सरकारें कार्बन मार्केट ट्रेड पर नहीं, बल्कि वास्तविक उत्सर्जन घटाने पर ध्यान दें।
  • मंगलवार को दर्जनों आदिवासी प्रदर्शनकारियों ने शिखर सम्मेलन स्थल में जबरन घुसकर प्रदर्शन किया। वे क्लाइमेट एक्शन और वन सत्यरक्षण की मांग कर रहे थे। उनकी सुरक्षा कर्मियों से झड़प भी हुई।
  • रात में प्रदर्शन हिंसक हो गया, कुछ लोग एरिया के अंदर घुस गए और सिक्योरिटी से क्लैश हुआ। एक सिक्योरिटी अधिकारी घायल हुआ और साइट अस्थायी लॉकडाउन में रही।
  • एक्टिविस्ट्स ने सम्मेलन के वेन्यू (स्थल) पर चल रहे कार्यों को पाखंड बताया। एक्टिविस्ट्स के अनुसार, जहाँ हम पर्यावरण की बात कर रहे हैं, वहीं कॉन्फ्रेंस के अंदर एयर कंडीशनिंग और एलईडी लाइट्स पूरी पावर पर डीजल जनरेटरों पर चल रहे हैं।

खाने पर विवाद: कार्यक्रम में वीगन और वेजिटेरियन डेलीगेशन के लिए खाना मिलना मुश्किल हो गया है। यह विडंबना है कि एक क्लाइमेट समिट में जहां लाइव स्टॉक फार्मिंग की समस्या पर चर्चा की जा रही है, वहां प्लांट बेस्ड फूड (जैसे टूफा) ही उपलब्ध नहीं था।

यूएस की उपस्थिति: वाशिंगटन के बड़े नामों के बजाय, कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर की उपस्थिति देखी गई। उन्होंने जर्मनी के साथ एक क्लाइमेट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए और कहा कि कैलिफ़ोर्निया एक विश्वसनीय पार्टनर है जो चीन के साथ क्लीन एनर्जी रेस में प्रतिस्पर्धा करेगा।

12 नवंबर का एजेंडा: तीसरे दिन कॉन्फ्रेंस का अधिकांश ध्यान स्वास्थ्य (Health), रोज़गार (Job), शिक्षा (Education), संस्कृति (Culture), न्याय (Justice) और मानवाधिकार (Human Rights) पर रहेगा।


भावांतर योजना पर चर्चा

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने घोषणा की है कि भावांतर योजना के तहत लगभग ₹300 करोड़ की राशि 1.32 लाख किसानों के बैंक खातों में 13 नवंबर को सिंगल क्लिक के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की जाएगी।

सरकार ने 11 नवंबर को सोयाबीन का मॉडल रेट ₹456 प्रति क्विंटल तय किया था। इससे पहले 10 नवंबर 2025 को ₹436 प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया था।

केंद्र सरकार द्वारा सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹5328 प्रति क्विंटल तय किया गया है।

किसानों को एमएसपी और मॉडल रेट के बीच के अंतर की राशि, जो लगभग ₹1272 बनती है, वह जारी की जाएगी।

अब तक लगभग 16,600 किसानों ने इस योजना के तहत 2.70 लाख टन सोयाबीन बेचा है।

नियम स्पष्टीकरण: यदि किसी किसान की उपज मॉडल रेट से अधिक दाम पर बिकती है, तो उसे भावांतर योजना का लाभ नहीं मिलेगा। उदाहरण के लिए, यदि मॉडल भाव ₹436 प्रति क्विंटल है और किसान की फसल ₹456 प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकती है (जो एमएसपी से कम है), तब भी उसे लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि मॉडल रेट की तुलना में उसे “फायदा” हुआ माना जाता है।

राजगढ़ जिले में विवाद: राजगढ़ जिले के सहकारी बैंक के जिला प्रबंधक का एक आदेश चर्चा में है, जिसमें किसानों के खातों पर होल्ड लगाने के लिए कहा गया है।

यह आदेश इसलिए जारी किया गया है ताकि किसानों को मिलने वाली मुआवजा राशि, बीमा राशि या भावांतर योजना की राशि को उनके ऋण (लोन) की वसूली के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

इस आदेश का राजगढ़ कांग्रेस जिला अध्यक्ष द्वारा विरोध किया गया है, इसे ‘किसानों के साथ छलावा’ और ‘तुगलकी आदेश’ बताया गया है।

यह समस्या उन किसानों के लिए बड़ी है जो पहले से ही ऋण चुकाने में कठिनाई का सामना करते हैं। जो किसान डिफॉल्टर घोषित हो चुके होते हैं, वे सरकारी योजनाओं में पंजीयन नहीं कराते, क्योंकि उन्हें पता है कि आधार लिंक होने के कारण उनके खाते में होल्ड लग सकता है और राशि वसूल ली जाएगी।

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We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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