पर्यावरण आज | जीएसटी काउंसिल ने सात दुर्लभ बीमारियों की आयातित दवाओं पर 5 प्रतिशत आईजीएसटी हटाया, जिससे मरीजों को लाखों की बचत होगी। भोपाल में 7 हज़ार पेड़ कटने के बाद पौधारोपण और फंड में गड़बड़ी मिली, एनजीटी ने निगम को घेरा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के मुताबिक अफ्रीका में वन्यजीव 80 प्रतिशत घटे, जबकि भारत में कई प्रजातियाँ बढ़ीं। एआई से भारी ई-कचरे की आशंका जताई गई। आज की चर्चा अल नीनो के दिसंबर में चरम पर जाने पर।
प्रमुख हेडलाईन्स
जीएसटी काउंसिल ने 7 दुर्लभ बीमारियों के लिए विदेश से आयातित दवाओं और इलाज पर लगने वाला 5 फीसदी आईजीएसटी हटा लिया है। इन बीमारियों के इलाज में दवा पर 10 लाख से एक करोड़ रुपये तक का खर्च आता है। इस फैसले से अब मरीजों को 50 हज़ार से 5 लाख रुपये तक की बचत होगी।
भोपाल में करीब 7 हज़ार पेड़ काटे जाने के बदले नए पेड़ लगाने के मामले में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। एनजीटी ने पाया कि न तो पर्याप्त पौधारोपण हुआ और न ही इस काम के लिए जमा हुए करोड़ों रुपये का सही इस्तेमाल किया गया। इस मामले में भोपाल म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन कटघरे में है।
विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की 8 अक्टूबर 2026 को जारी नई रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीका में निगरानी की जा रही वन्यजीव आबादी में 1970 से 2022 के बीच औसतन 80 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह आंकड़ा पूरे महाद्वीप में जैव विविधता को हुए नुकसान के पैमाने को दिखाता है।
वहीं, भारत की बात करें तो यहाँ कई प्रमुख प्रजातियों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बेसल एक्शन नेटवर्क के नए अनुमान के मुताबिक, 2025 से 2050 के बीच एआई से जुड़े 39.5 करोड़ से 61.7 करोड़ टन इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कचरे में बदल सकते हैं। अनुमान है कि 2030 तक हर साल एआई से जुड़ा करीब 86 लाख से 1.31 करोड़ टन उपकरण कचरा बन सकता है।
आज की चर्चा
दिसंबर में अल नीनो होगा चरम पर
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेतावनी दी है कि दुनियाभर में जारी अल नीनो का असर दिसंबर में चरम पर होगा। इससे दुनिया के कई हिस्सों में औसत तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा। इसका असर फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना है।

वाहिद भट, ग्राउंड रिपोर्ट
पल्लव, विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी डब्ल्यूएमओ ने चेतावनी दी है कि अल नीनो का सबसे गंभीर असर अभी आना बाकी है। इस मौसमी घटना के दिसंबर में चरम पर पहुंचने की संभावना है। इस वजह से आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है।
डब्ल्यूएमओ के मुताबिक, अल नीनो के मजबूत होने से बारिश का सामान्य पैटर्न बदल सकता है। इससे अलग-अलग इलाकों में सूखे और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। अल नीनो अक्टूबर से दिसंबर के बीच अपने चरम पर पहुंच सकता है, और उत्तरी गोलार्ध में इसका असर 2027 के वसंत तक जारी रहने की संभावना है।
पल्लव, अल नीनो प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने से बनने वाली एक मौसमी स्थिति है। यह दुनिया भर के मौसम को प्रभावित करती है। डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्ते सौलो के मुताबिक, अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है और फरवरी 2027 तक इसके जारी रहने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत है। यह 1950 के बाद के सबसे मजबूत अल नीनो में से एक हो सकता है।
भारत में इसका असर पहले ही दिखने लगा है। साल 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून 13 प्रतिशत कम बारिश के साथ खत्म हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, 2001 के बाद यह भारत का चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा। मानसून के दूसरे हिस्से में अल नीनो ने बारिश को प्रभावित किया।
महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत कई राज्यों ने सूखा घोषित किया है। महाराष्ट्र के कई जिलों में पानी की आपूर्ति में 10 प्रतिशत की कटौती भी लागू की गई है।
पल्लव, प्रशांत महासागर में भी तापमान तेजी से बढ़ा है। डब्ल्यूएमओ के मुताबिक, अगस्त में निनो 3.4 क्षेत्र का तापमान सामान्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। अल नीनो की स्थिति और उसकी तीव्रता पर नजर रखने के लिए यह क्षेत्र बहुत अहम है।
भारत के अलावा यूरोप में भी इस साल भीषण गर्मी पड़ी। फ्रांस, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम में रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया। गर्म और सूखे मौसम का असर डेन्यूब, राइन और टेम्स जैसी बड़ी नदियों के जलस्तर पर भी पड़ा।
अब सबसे अहम सवाल यह है कि अगर अल नीनो दिसंबर में चरम पर पहुंचता है, तो भारत की सर्दी, पानी की उपलब्धता और 2027 के मौसम पर इसका कितना असर पड़ेगा। डब्ल्यूएमओ की चेतावनी के मुताबिक, आने वाले महीनों में सूखे, बाढ़ और सामान्य से ज्यादा तापमान पर नजर रखना जरूरी होगा।
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