मानसूनी वर्षा में अचानक गिरावट, भारत में 2 करोड़ बच्चे हाइजीन सुविधाओं से वंचित, महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित किसानों को राहत का वादा, दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए अग्रिम उपाए। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
भारत में मानसूनी वर्षा में अचानक गिरावट आई है; सोमवार को वर्षा सामान्य से 64% कम होकर केवल 1.4 मिमी रही, जिससे मौसमी घाटा बढ़कर 12% हो गया। उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा सामान्य से 179% अधिक रही, जिसमें उत्तराखंड में 21.2 मिमी तथा हिमाचल व पश्चिमी यूपी में 9.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
WHO-UNICEF रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक स्तर पर बिना स्वच्छता सुविधा वाले 24.4 करोड़ स्कूली बच्चों में से लगभग 20% अकेले भारत में हैं। भारत में 2 करोड़ बच्चे हाइजीन सुविधाओं से और 1.2 करोड़ बच्चे पीने के पानी की सुविधा से वंचित हैं।
सूखे के संकट के बीच महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के अनुसार किसानों को दिवाली से पहले वित्तीय सहायता दी जाएगी। राज्य भर में किसानों को ₹35,900 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। जिसमें ₹22,400 करोड़ अकेले विदर्भ का है।
दिल्ली में धूल फैलाने वाले निर्माण कार्य पर 1 नवंबर से 31 जनवरी तक और सभी C&D गतिविधियों पर 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। ईंधन के लिए सख्त PUC नियम लागू होंगे, 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना होगा, और BS-VI से नीचे के बाहरी वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा।
CAG और एमपी खाद्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के सरकारी व निजी गोदामों में देरी और लापरवाही से ₹300 करोड़ मूल्य का 1 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न सड़ गया। इसमें 70,000 मीट्रिक टन गेहूं, 21,000 मीट्रिक टन धान और 8,500 मीट्रिक टन दालें शामिल हैं, जिसके रखरखाव पर सरकार ने ₹100 करोड़ से अधिक खर्च किए थे।
भोपाल के चूना भट्टी चौराहे पर डंपर मालिकों ने खनिज विभाग द्वारा 2 से 4 लाख रुपये के पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माने के विरोध में डंपर खड़े कर 3 घंटे तक चक्काजाम किया। चूना भट्टी थाने में पुलिस, प्रशासन, खनिज विभाग और डंपर एसोसिएशन के बीच 5-पक्षीय बैठक हुई जिसके बाद हड़ताल समाप्त कर दी गई।
विस्तृत चर्चा
महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे का संकट
इस वक्त की एक बेहद गंभीर और बड़ी खबर महाराष्ट्र और कर्नाटक के सूखे को लेकर आ रही है। हालात काफी चिंताजनक हैं, और केंद्र सरकार अब इस पर सीधा एक्शन ले रही है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद इस पर चिंता जताई है और ऐलान किया है कि जमीनी हकीकत का जायजा लेने के लिए केंद्र की टीमें इन राज्यों के दौरे पर जा रही हैं।
3 अक्टूबर को केंद्रीय टीम कर्नाटक पहुंचेगी और इसके तुरंत बाद एक टीम महाराष्ट्र भी भेजी जाएगी। खुद कृषि मंत्री भी अपनी टीम के साथ इन दोनों राज्यों का दौरा करने वाले हैं।
अगर हम दोनों राज्यों के जमीनी हालात को समझें, तो आंकड़े वाकई डराने वाले हैं:
महाराष्ट्र का हाल: राज्य के कुल 358 तहसीलों में से 265 तहसीलों में सूखा घोषित हो चुका है। यानी करीब तीन-चौथाई महाराष्ट्र पानी की कमी से जूझ रहा है। इस साल मानसून में वहां सामान्य से 18% कम बारिश हुई है। अब वहां फसलों के नुकसान का सर्वे किया जा रहा है ताकि किसानों के लिए लगान माफी और कर्ज वसूली पर रोक जैसे कदम उठाए जा सकें।
कर्नाटक का हाल: यहां के 177 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। कर्नाटक सरकार ने करीब 50 लाख किसानों की मदद के लिए 1,250 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान भी कर दिया है।
कृषि मंत्री ने दिल्ली में हुई मीटिंग में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही है, जो हमें आगे की चर्चा में रखनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों को अब ‘वॉटर बजटिंग’ यानी पानी के हिसाब-किताब के आधार पर रबी फसलों की बुवाई करनी होगी। जहां पानी कम है, वहां किसानों को दलहन (दालें) और तिलहन जैसी कम पानी वाली फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि किसानों को आगे चलकर फसलों का नुकसान न झेलना पड़े।
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