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टेम नदी परियोजना: वन भूमि की अनुमति अटकने से दो साल से काम बंद

प्रभावित किसानों को मुआवजे संबंधी शिकायत है। जबकि फ़ॉरेस्ट क्लियरेंस मिले बिना काम करने के लिए विशेषज्ञ सरकार पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
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विदिशा जिले में स्थित परियोजना का अपूर्ण हिस्सा | फ़ोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

मध्यप्रदेश के विदिशा जिले की लटेरी तहसील के दपकन और भोपाल जिले की बैरसिया तहसील की सीमा में टेम नदी पर मध्यम सिंचाई परियोजना प्रस्तावित है। इससे विदिशा, गुना और भोपाल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों मे सिंचाई एवं पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जानी है। मगर   वन विभाग की एनओसी न मिलने के कारण परियोजना का कार्य लगभग दो साल से बंद है।

7 सितंबर को लटेरी तहसील में परियोजना से प्रभावित किसानों ने मुआवजा राशि और विस्थापन की विसंगतियों को लेकर एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया।

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बैरागढ़ ग्राम पंचायत के सरपंच सुखपाल सिंह ने कहा, “परियोजना अपने तय समय से काफी विलंब है। प्रभावित ग्रामीणों को अभी तक केवल जमीन का मुआवजा दिया गया है, लेकिन उनकी संपत्ति, विस्थापन संबंधी लाभ व पुनर्वास सुविधाएं प्रदान नहीं की गई हैं।” 

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जहां एक ओर ग्रामीण पुनर्वास से संबंधित सवाल उठा रहे हैं वहीं अधिकारियों का दावा है कि ज़्यादातर अवार्ड दिए जा चुके हैं। चार गुना मुआवजे को लेकर प्रशासन का पक्ष है कि चूंकि यह योजना संबंधित नियम आने के पहले की है इसलिए ग्रामीण इसके पात्र नही हैं। जबकि विशेषज्ञ वन अनुमति मिलने के पहले ही निर्माण कार्य करने पर आपत्ति जताते हैं।  

ग्रामीणों की समस्याएं

मीडिया में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार इस परियोजना को लगभग 10 साल पहले मंज़ूरी मिली थी। 

लगभग 1265.98 हेक्टेयर के कुल प्रस्तावित डूब क्षेत्र वाली इस परियोजना में गुना जिले के 67 गांव और भोपाल जिले के 2 गांवों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। 38315 लाख रु की लागत वाली इस परियोजना से 9990 हेक्टेयर में सिंचाई हो सकेगी। 

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वही पेयजल का लाभ विदिशा जिले की लटेरी तहसील के 210 गांवों को मिलेगा।

इस परियोजना से 7 गांव प्रभावित है, जिनमे से 4 गांव आंशिक रूप से और 3 गांव पूरी तरह से डूब क्षेत्र में शामिल है। 

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परियोजना से प्रभावित किसानों ने 7 सितम्बर को लटेरी में रैली का आयोजन किया | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

सिंह के अनुसार, फिलहाल धीरगढ़ और बैरागढ़ ग्राम पंचायतों में पीएम आवास योजना पर रोक लगी हुई है, जबकि बैरागढ़ ग्राम पंचायत के 3 गांव ऐसे हैं जहां से एक भी परिवार विस्थापित नहीं हो रहा है। इसके अलावा हरिपुरा मजरा, भीलखेड़ी करया और जमोनिया जैसे गांवों में भी पीएम आवास पर रोक लगी है।

मुआवजे पर उन्होंने कहा कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, सिर्फ भूमि का मुआवजा दिया गया है। अचल संपत्ति (मकान, कुएं) और विस्थापन का अवॉर्ड जारी नहीं हुआ है। उनकी मांग है कि उन्हें 4 गुना मुआवजा दिया जाए। 

सरकार का पक्ष

“ज्यादातर अवॉर्ड हमारे हो चुके हैं। केवल मकान और परिसंपत्तियां बची थीं, वे भी हमने कर दिया है। इनका अवॉर्ड पहले हो चुका है और नियम बाद में आया है कि चार गुना पैसा मिलेगा, तो उन्हें हम चार गुना कैसे दे सकते हैं?” ग्रामीणों के आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए लटेरी एसडीएम अनिल कछवारे ने कहा।

दरअसल 22 अप्रैल 2026 को प्रदेश कैबिनेट ने यह तय किया कि किसी भी प्रोजेक्ट के लिए यदि कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाता है तो सम्बंधित भूमि मालिक को दोगुना के बजाए चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। 

मगर प्रशासन का तर्क है कि चूंकि इन किसानों के अवार्ड घोषणा से पहले ही पारित हो चुके हैं इसलिए इन किसानों को चार गुना मुआवजा नहीं दिया जा सकता।   

उन्होंने बताया कि 106 किसान ऐसे हैं जिनकी ज़मीन पर एक से अधिक लोगों का अधिकार है। कछवारे ने कहा, “मुआवजे का पैसा इनमें से किसके खाते में जमा करना है इस पर यदि ये लोग आपस में सहमति बना लें तो हम उनका भी पैसा डाल देंगे।”

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टेम नदी जिस पर बांध का निर्माण कार्य हो रहा है | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

बढ़े रकबे के साथ प्रस्ताव पेंडिंग

परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाली वन भूमि के रकबे को लेकर विदिशा वन मंडल के मानचित्रकार कुंदन कुशवाहा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जल संसाधन विभाग ने वर्ष 2017 में भारत सरकार को वन भूमि की एनओसी के लिए आवेदन किया था। इसके बाद परिवेश पोर्टल पर 2024 में बढ़े हुए रकबे के साथ प्रस्ताव अपलोड किया गया और हाल ही में 17 मार्च 2026 को फिर से रकबा बढ़ाकर पोर्टल पर प्रस्ताव अपलोड किया गया।

2026 में फाइनल प्रपोजल आने के बाद वन विभाग ने सर्वे आदि कराकर अनुमति के लिए नोडल अधिकारी की ओर फाइल बढ़ा दी है। कुशवाहा के अनुसार, प्रस्ताव में वन भूमि का जो कुल रकबा बताया गया है, वह तीनों जिलों को मिलाकर 372.773 हेक्टेयर है। जबकि 2017 के प्रस्ताव में यह 203.015 हेक्टेयर बताई गई थी।  

नए प्रस्ताव के तहत विदिशा जिला की 111.024 हेक्टेयर, भोपाल जिला की 256.159 हेक्टेयर और गुना जिला की 5.589 हेक्टेयर भूमि को शामिल किया गया है।

अनुमति न मिलने के बाद काम बंद

इस परियोजना के लिए 2021 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था मगर फिलहाल यहां काम बंद है। 

डैम का कार्य देखने वाले ठेकेदार ने कहा, “फिलहाल काम कितने प्रतिशत हुआ है, इतना तो नहीं बता सकता, लेकिन फॉरेस्ट की अनुमति नहीं मिलने के कारण पिछले 2 साल से काम बंद है।” 

कमलेश कुमार ने भी कहा, “हमने फॉरेस्ट विभाग की भूमि पर कोई काम नहीं किया है, केवल रेवेन्यू की भूमि में काम किया है। फॉरेस्ट विभाग से क्लीयरेंस मिलते ही एक साल में परियोजना को कम्प्लीट कर देंगे। फिलहाल स्टेज-1 का केस अपलोड किया गया है और प्रक्रियाधीन है।”

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निर्माणाधीन टेम परियोजना के बांध का डूबक्षेत्र | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

नीति क्या है?

परियोजना के तकनीकी और वैधानिक पहलुओं पर ‘साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल’ (SANDRP) के समन्वयक और बांध मामलों के विशेषज्ञ हिमांशु ठक्कर ने कहा: “फॉरेस्ट की फाइनल क्लीयरेंस रिपोर्ट के बिना इस तरह बांध का काम आगे बढ़ाना न सिर्फ गैर-कानूनी है, बल्कि फॉरेस्ट कंजर्वेशन और फॉरेस्ट राइट्स के साथ-साथ लोगों के अधिकारों का भी उल्लंघन है।”

ठक्कर मानते हैं कि इस तरह के मामलों को कोर्ट में चैलेंज किया जाना चाहिए, क्योंकि यह कानून और जनता के अधिकारों का अनादर है। 

इसके साथ ही, वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023 की धारा 1A(1)(b) के तहत, 25 अक्टूबर 1980 को या उसके बाद राजस्व या वन विभाग के सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ‘वन’ भूमि पर इस अधिनियम के समस्त नियम लागू होते हैं। संशोधित अधिनियम की धारा 1A(2)(c) के तहत मिलने वाली स्थानीय छूटें केवल 5 से 10 हेक्टेयर तक के सुरक्षा व सार्वजनिक उपयोगिता प्रोजेक्ट्स तक ही सीमित हैं। 

चूंकि टेम परियोजना में प्रभावित हो रहा वन क्षेत्र 372.773 हेक्टेयर है इसलिए ठक्कर मानते हैं कि बिना फ़ॉरेस्ट क्लियरेंस के राजस्व भूमि में भी काम करना क़ानूनी नहीं है।

वहीं लटेरी वन मंडल के मानचित्रकार कुंदन कुशवाह के मुताबिक 372 हेक्टेयर भूमि के बदले क्षतिपूर्ति के लिए लगभग 382 हेक्टर भूमि उपलब्ध कराई गई है जो भोपाल, विदिशा, गुना और शाजापुर जिलों में स्थित है। 

मामले को लेकर जब जल संसाधन विभाग (बासौदा) की एक्जीक्यूटिव इंजीनियर प्रियंका भंडारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने आवाज न पहुंचने की बात कहकर फोन काट दिया और उसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया। वहीं, विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता की ओर से भी इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है।


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Authors

  • Abdul Wasim Ansari is an independent journalist based in Rajgarh, Madhya Pradesh, bringing nearly a decade of experience in journalism since 2014. His work focuses on reporting from the grassroots level in the region.

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  • Amit Raikwar, hailing from Vidisha district in Madhya Pradesh, is a trusted face in Indian journalism with 17 years of experience. Beginning his career in 2007, he has played pivotal roles in local and national media organizations, including PTI. Known for his nuanced reporting on political developments and social transformations, Amit brings stories to the forefront with prominence and integrity.

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