14 अगस्त की रात सिंगरौली जिले के हरहवा गांव में रिलायंस के सासन पावर प्लांट का ऐश डैम टूट गया। डैम में जमा फ्लाई ऐश, यानी कोयले की राख, पानी के साथ बहकर गांव के घरों और खेतों में पहुंच गई। उस रात देश स्वतंत्रता दिवस की तैयारी कर रहा था।
एक ग्रामीण ने बताया कि पहले गड़गड़ाहट की आवाज़ आई और फिर लोगों के चिल्लाने की। उनके अनुसार, जब तक लोग कुछ समझ पाते, चारों तरफ राख मिला पानी बह रहा था। लोग बच्चों को लेकर ऊंची जगहों की ओर भागे। फसलें, घर का सामान और खेत राख के नीचे दब गए। सुबह होने पर खेतों और घरों के आसपास कई फीट राख जमा दिखी। जहां एक दिन पहले फसल खड़ी थी, वहां अब मलबा और राख पड़ी थी।
सिंगरौली को देश की ऊर्जा राजधानी कहा जाता है। यहां के पावर प्लांट कई राज्यों को बिजली देते हैं। थर्मल पावर प्लांट में कोयला जलने पर राख बनती है, और इस राख को जमा करने के लिए ऐश डैम बनाए जाते हैं। नियमों के अनुसार इन डैम का नियमित रखरखाव और सुरक्षा ऑडिट ज़रूरी है, और सुरक्षा मानकों का पालन भी करना होता है। हरहवा की घटना इस क्षेत्र में पहली नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में सिंगरौली में ऐश डैम टूटने और राख फैलने की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
फ्लाई ऐश में आर्सेनिक, सीसा, पारा और निकल जैसी धातुएं होती हैं। ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं के अनुसार इसका असर ज़मीन, पानी और सेहत, तीनों पर पड़ेगा।
गांव के एक बुज़ुर्ग ने कहा कि हादसे के बाद कंपनी और अधिकारी मुआवज़े का आश्वासन देकर लौट जाते हैं, लेकिन खेतों की मिट्टी हमेशा के लिए खराब हो जाती है। उन्होंने कहा कि सांस लेने पर सीने में राख जमती है। उन्होंने पूछा कि लोगों की जान की कीमत कब तक आंकी जाएगी। ग्रामीण चाहते हैं कि नुकसान की भरपाई हो, खेतों को दोबारा खेती लायक बनाया जाए और उनकी आजीविका सुरक्षित की जाए।
हादसे के बाद कई सवाल बाकी हैं। यह तय होना है कि पावर प्लांट प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी या नहीं। यह भी साफ नहीं है कि पीड़ित परिवारों को केवल मुआवज़ा मिलेगा या उनकी ज़मीन और आजीविका को बहाल करने की योजना बनेगी।
हरहवा की घटना यह सवाल उठाती है कि बिजली उत्पादन की कीमत कौन चुका रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रबंधन की कानूनी जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक अन्य गांवों में भी ऐसे हादसों का खतरा बना रहेगा। फिलहाल हरहवा के लोग राख हटने, नुकसान के आकलन और मुआवज़े की घोषणा का इंतज़ार कर रहे हैं।
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