बिहार अस्पताल आग हादसे में 5 लोगों की मौत, गुना में जंगल की जमीन पर कब्जे और अवैध सौदों का खुलासा, निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट पर उठे नए सवाल और पैंक्रियाटिक कैंसर की नई दवा से बढ़ी उम्मीद जैसे बड़े मुद्दों पर सुनिए आज का “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट।
मुख्य सुर्खियां
बिहार के मुजफ्फरपुर में एक निजी अस्पताल के ICU में आग लग गई। हादसे में 5 मरीजों की मौत हुई और कई लोग घायल हो गए। सरकार ने जांच समिति बनाई है और मृतकों के परिवार को 4 लाख रुपये मदद देने का ऐलान किया है।
सरकारी रिकॉर्ड में 2024 में निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट को रणनीतिक महत्व वाला नहीं माना गया था। अब इसी प्रोजेक्ट को सुरक्षा और चीन के खतरे से जोड़कर पेश किया जा रहा है। रिपोर्ट में पर्यावरण मंजूरी और पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
मध्य प्रदेश के गुना में जंगल की जमीन पर कब्जा कर उसे बेचा जा रहा है। लोग पेड़ काटकर जमीन को खेती लायक बनाते हैं और फिर फर्जी एग्रीमेंट से लाखों में सौदा करते हैं। वन विभाग अब कई लोगों पर FIR की तैयारी कर रहा है।
पैंक्रियाटिक कैंसर पर नई दवा Daraxonrasib के ट्रायल में अच्छे नतीजे मिले हैं। रिसर्च में कुछ मरीजों की जिंदगी पहले से ज्यादा लंबी हुई। डॉक्टर इसे कैंसर इलाज में बड़ी उम्मीद मान रहे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर भरोसा जताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की। ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद का हल निकल सकता है।
विस्तृत चर्चा
आज की चर्चा में हमारे असोसिएट एडिटर वाहिद भट से जानिए पैंक्रियाटिक कैंसर की नई दवा के ट्रायल के बारे में। साथ ही हमारे साथी अब्दुल वसीम अंसारी बता रहे हैं बता रहे हैं गुना में बढ़ते जमीनी विवाद के बारे में।
कैंसर इलाज में नई उम्मीद
कैंसर रिसर्च की दुनिया से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे लाखों मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण माना जा रहा है। एक नई एक्सपेरिमेंटल दवा Daraxonrasib ने डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है। खासतौर पर पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में इसे बड़ी प्रगति के तौर पर देखा जा रहा है।
पैंक्रियाटिक कैंसर दुनिया के सबसे खतरनाक कैंसरों में गिना जाता है। इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ज्यादातर मामलों में इसका पता काफी देर से चलता है। तब तक कैंसर शरीर में तेजी से फैल चुका होता है। इसी वजह से मरीजों की सर्वाइवल दर बहुत कम रहती है और इलाज के विकल्प भी सीमित होते हैं।
अब अमेरिका में हुई एक अंतरराष्ट्रीय स्टडी ने उम्मीद बढ़ाई है। स्टडी के मुताबिक रोजाना ली जाने वाली Daraxonrasib नाम की यह गोली एडवांस पैंक्रियाटिक कैंसर मरीजों की जिंदगी लगभग दोगुनी तक बढ़ा सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले कई दशकों में इस बीमारी के इलाज में इतनी बड़ी प्रगति बहुत कम देखने को मिली है।
वैज्ञानिकों के अनुसार पैंक्रियाटिक कैंसर के करीब 80 प्रतिशत मामलों में KRAS नाम के जीन में खराबी पाई जाती है। यही जीन कैंसर सेल्स को लगातार बढ़ने का संकेत देता है। Daraxonrasib इसी सिग्नल को रोकने की कोशिश करती है। आसान भाषा में समझें तो यह दवा कैंसर सेल्स की ग्रोथ को धीमा करने का काम करती है।
विशेषज्ञ इसे सिर्फ एक नई दवा नहीं, बल्कि कैंसर इलाज के नए दौर की शुरुआत मान रहे हैं। इसे प्रिसिजन मेडिसिन का हिस्सा माना जा रहा है, जहां इलाज बीमारी के जेनेटिक कारणों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
हालांकि दवा के कुछ साइड इफेक्ट भी सामने आए हैं। कुछ मरीजों में कमजोरी, त्वचा संबंधी दिक्कतें और थकान देखी गई। कुछ मामलों में दवा की डोज भी कम करनी पड़ी। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इन प्रभावों को संभालना संभव है।
फिलहाल यह दवा उन मरीजों पर टेस्ट की गई है, जिनमें कीमोथेरेपी के बाद भी कैंसर बढ़ता रहा। अब रिसर्चर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या बीमारी के शुरुआती चरण में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
सबसे अहम बात यह है कि KRAS जीन सिर्फ पैंक्रियाटिक कैंसर में ही नहीं, बल्कि फेफड़ों और कोलन कैंसर में भी पाया जाता है। यही वजह है कि वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह दवा दूसरे कैंसरों के इलाज में भी मददगार साबित हो सकती है।
फिलहाल यह दवा भारत में उपलब्ध नहीं है। लेकिन दुनियाभर में इस पर तेजी से रिसर्च चल रही है और उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भारतीय मरीजों तक भी यह इलाज पहुंच सकता है। यह खबर एक बार फिर दिखाती है कि कैंसर रिसर्च लगातार आगे बढ़ रही है और मुश्किल बीमारियों के इलाज में नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।
गुना जंगल जमीन घोटाला
गुना जिले में पिछले 10 सालों में 1 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जंगल साफ हो चुका है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में वन भूमि पर कब्जा और उसकी अवैध खरीद-फरोख्त के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक 40 बीघा, 33 बीघा और 12 बीघा जैसी जमीनों पर कब्जा कर उन्हें लाखों रुपए में बेचा गया। पहले जंगल साफ कर जमीन को खेती लायक बनाया गया, फिर 1000 रुपए के फर्जी स्टांप एग्रीमेंट पर सौदे किए गए।
बमोरी इलाके में सामने आए तीन मामलों में 85 बीघा से ज्यादा वन भूमि का सौदा 22 लाख रुपए से अधिक में हुआ। रिपोर्ट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां आदिवासियों के नाम पर कब्जा कर जमीन दूसरे लोगों को बेच दी गई।
पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई इलाकों में जंगल को खेतों में बदला जा चुका है। जमीन विवाद को लेकर हिंसा, मारपीट और मौत तक के मामले सामने आए हैं। अब वन विभाग ने चिन्हित लोगों के खिलाफ FIR की तैयारी शुरू कर दी है।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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