यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ का डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का 60वां एपिसोड है। शनिवार, 8 नवंबर को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में बात स्ट्रे डॉग्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और लद्दाख में बनने जा रही 12 रक्षा परियोजनाओं पर।
अन्य महत्वपूर्ण खबरें
छत्तीसगढ़ में हाथी हमला: जशपुर ज़िले के एक गांव में शोक सभा के दौरान जंगली हाथियों ने हमला कर दिया, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई और दहशत फैल गई। यह ज़िले में इस साल की आठवीं घटना थी।
जिम कॉर्बेट पार्क में गाइड का दुर्व्यवहार (उत्तराखंड): एक पर्यटक का वीडियो वायरल हुआ जिसमें दिखा कि सफारी के दौरान गाइड सोता रहा, पर्यटकों को तंबाकू ऑफर करता रहा और पार्क में कचरा फैलाता रहा। कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के फील्ड डायरेक्टर साकेत बडोला ने जांच के आदेश दिए हैं और गाइड को जांच पूरी होने तक बैन किया गया है।
दिल्ली में ज़हरीली हवा: दिल्ली में हवा रिकॉर्ड स्तर पर ज़हरीली हो गई है, जिसका मुख्य कारण खेतों की पराली और ट्रैफिक है। सरकार और एमसीडी ने नवंबर से ऑफिस टाइम में 30 मिनट का अंतर करने की योजना शुरू की है ताकि ट्रैफिक का दबाव कम हो सके।
मैसूर, कर्नाटक में बाघ का हमला: मैसूर में एक किसान पर बाघ ने हमला किया, जिसके बाद नागरहोल और बांदीपुर में सफारी रोक दी गई और वन विभाग को अलर्ट पर रखा गया।
अमेरिका में वीज़ा नियम सख्त: अमेरिका ने वीज़ा नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब डायबिटीज, दिल या अन्य पुरानी बीमारियों वाले लोगों के लिए वीज़ा या ग्रीन कार्ड पाना मुश्किल होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बुज़ुर्ग और बीमार प्रवासियों के लिए गंभीर झटका साबित होगा क्योंकि अब स्वास्थ्य को आर्थिक बोझ के रूप में देखा जा रहा है।
पॉडकास्ट डिस्कशन
इस विषय पर होस्ट चंद्र प्रताप ने साथी वाहिद के साथ विस्तार से चर्चा की।
नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (National Board for Wildlife – NBWL) की स्थायी समिति ने लद्दाख में 12 रक्षा परियोजनाओं (12 Defense Projects) को मंज़ूरी दी है। इन परियोजनाओं को रक्षा मंत्रालय ने चीन की पीएलए (PLA) के बढ़ते दबाव और ऑपरेशनल तैयारी (Operational Preparedness) की ज़रूरत को देखते हुए मंज़ूरी दी है। परियोजना का विवरण: इन 12 परियोजनाओं में ट्रेनिंग नोड (Training Node) का निर्माण (तारा एरिया में), इंफॉर्मेशन स्टोरेज, ब्रिगेड हेडक्वार्टर्स और इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) के लिए बॉर्डर आउटपोस्ट/लंगर शामिल हैं। स्थान और पारिस्थितिकी तंत्र का जोखिम: ये सभी क्षेत्र चांगथांग कोल्ड डेजर्ट सेंचुरी (Changthang Cold Desert Sanctuary) और कराकुलम वाइल्डलाइफ सेंचुरी (Karakulam Wildlife Sanctuary) के अंतर्गत आते हैं। लद्दाख का इकोसिस्टम बेहद नाज़ुक (fragile) है। यहां वनस्पति बहुत कम है और जलवायु अत्यंत कठोर है। पर्यावरणीय चिंताएं: निर्माण कार्य से प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) को नुकसान पहुंचेगा। यह इलाका स्नो लेपर्ड (Snow Leopard), तिब्बती वुल्फ (Tibetan Wolf), जंगली याक (Wild Yak) और ब्लू शीप (Blue Sheep) जैसे दुर्लभ और स्थानिक जीवों का घर है।
निर्माण से होने वाला शोर और कंपन (Noise and Vibration) वन्यजीवों के प्रजनन (Breeding), प्रवास मार्गों (Migration Routes) और आवाजाही को गंभीर रूप से बाधित करेगा। वाहनों की बढ़ती आवाजाही से इन जीवों का जीवन यापन (Survival) मुश्किल होगा, और निर्माण कार्य से बढ़ता कार्बन फुटप्रिंट स्थानीय तापमान पर भी असर डालेगा। स्नो लेपर्ड की स्थिति: स्नो लेपर्ड की अनुमानित आबादी लगभग 799 है, जिनमें से लद्दाख में अकेले 477 पाए जाते हैं (जो कुल का लगभग 60–70% है)। ये सभी प्रजातियाँ आईयूसीएन (IUCN) की Vulnerable Species सूची में शामिल हैं। निर्माण से होने वाला शोर और कंपन (Noise and Vibration) वन्यजीवों के प्रजनन (Breeding), प्रवास मार्गों (Migration Routes) और आवाजाही को गंभीर रूप से बाधित करेगा। वाहनों की बढ़ती आवाजाही से इन जीवों का जीवन यापन (Survival) मुश्किल होगा, और निर्माण कार्य से बढ़ता कार्बन फुटप्रिंट स्थानीय तापमान पर भी असर डालेगा। स्नो लेपर्ड की स्थिति: स्नो लेपर्ड की अनुमानित आबादी लगभग 799 है, जिनमें से लद्दाख में अकेले 477 पाए जाते हैं (जो कुल का लगभग 60–70% है)। ये सभी प्रजातियाँ आईयूसीएन (IUCN) की Vulnerable Species सूची में शामिल हैं।
स्ट्रीट डॉग्स पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
इस विषय पर होस्ट चंद्र प्रताप ने सहयोगी अब्दुल वसीम अंसारी के साथ चर्चा की।
पृष्ठभूमि और चिंता: भारत में रेबीज से हर साल 18,000 से 20,000 मौतें होती हैं (डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया भर में लगभग 55,000 में से), जिनमें आधे से ज़्यादा पीड़ित 15 साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ते कुत्ते के काटने और रेबीज मामलों पर चिंता जताई और सख्त फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: कोर्ट ने कहा कि अब हर शहर में आवारा कुत्तों को पकड़ा जाएगा, नसबंदी की जाएगी और सिर्फ़ शेल्टर में रखा जाएगा। उन्हें दोबारा सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा। अदालत ने कहा कि लोगों को बिना डर के घूमने का अधिकार मिलना चाहिए।
सुरक्षा उपाय: स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों को चिन्हित किया जाएगा। इन संस्थानों के प्रमुख एक नोडल अधिकारी (Nodal Officer) नियुक्त करेंगे, जो यह सुनिश्चित करेगा कि आवारा कुत्ते परिसर में न घुसें। कोर्ट ने राज्यों के मुख्य सचिवों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों का पालन न करने वाले अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाए।
चुनौती (दिल्ली): दिल्ली के एनजीओ मदद की गुहार लगा रहे हैं क्योंकि शेल्टर पहले ही भरे हुए हैं। सड़कों पर लाखों कुत्ते हैं, और आठ हफ्तों में नए शेल्टर बनाना बेहद मुश्किल है।
स्थानीय प्रशासन की स्थिति (राजगढ़ का उदाहरण): वसीम ने बताया कि कई जगहों पर स्थानीय लोग कुत्तों को पकड़ने का विरोध करते हैं क्योंकि उनका भावनात्मक लगाव होता है। इस विरोध के कारण कई बार विवाद और पुलिस केस तक की नौबत आ जाती है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में आवारा कुत्तों के हमले और चोट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
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