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दलहन मिशन के लिए मध्य प्रदेश का 2,442.04 करोड़ रुपये का बजट

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भारत में दालें केवल भोजन नहीं, बल्कि लाखों किसानों की आजीविका और करोड़ों परिवारों के पोषण का आधार हैं। फिर भी, विडंबना यह है कि देश आज भी दालों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर है। 2023-24 में भारत ने 47.38 लाख टन दालें आयात कीं। इसी निर्भरता को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन शुरू किया है।

“मध्य प्रदेश अकेला देश के कुल दलहन उत्पादन में 24 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है — फिर भी उत्पादन में गिरावट चिंताजनक है।”

मध्य प्रदेश सरकार ने इस मिशन के तहत 2,442.04 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इस राशि से प्रदेश के सभी 55 जिलों में कम से कम एक दाल मिल और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएगी। मिशन के तहत तुअर, उड़द और मसूर की शत-प्रतिशत खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर करने की गारंटी दी गई है। उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा भी की जा चुकी है।

मध्य प्रदेश में दलहन — प्रमुख फसलें एवं रकबा

Pulses Madhya Pradesh
चना (40% राष्ट्रीय उत्पादन)मूंग + उड़दतुअर (अरहर)मसूर2024-25 में कुल उत्पादन
80–82 लाख हेक्टेयर20 लाख हेक्टेयर4.5–5.1 लाख हेक्टेयर 6.2 लाख हेक्टेयर5,698 हजार टन (↓21.9%)

चिंता की बात यह है कि मप्र आर्थिक सर्वे 2025-26 के अनुसार प्रदेश में दाल उत्पादन में 21.90 प्रतिशत की गिरावट आई है। 2023-24 के 7,296 हजार टन से घटकर 2024-25 में यह 5,698 हजार टन रह गया। मसूर और उड़द जैसी फसलों का एमएसपी न मिलना किसानों के इन फसलों से दूर होने का एक बड़ा कारण रहा है। यही वजह है कि मिशन के तहत MSP की गारंटी और बोनस जैसे प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर सरकार ने मार्च 2027 तक पीली मटर और काले चने का ड्यूटी-फ्री आयात जारी रखने का फैसला किया है ताकि बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि इससे घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता है।


कान्हा में बाघों की मौत: कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का खतरा

मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिज़र्व से आती खबर ने वन्यजीव प्रेमियों को हिला कर रख दिया है। पिछले 9 दिनों में यहां 5 बाघों की मौत हो चुकी है। प्राथमिक जांच में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) की आशंका जताई गई है — एक अत्यंत संक्रामक वायरस जो पालतू कुत्तों से वन्य प्रजातियों में फैलता है।

यह वायरस श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र और तंत्रिका तंत्र तीनों पर हमला करता है। एक बार जंगल में फैलने के बाद इसे रोकना बेहद कठिन हो जाता है। वन्यजीव विशेषज्ञ लंबे समय से मानव बस्तियों और वन्यजीव क्षेत्रों के बीच की सीमाओं पर रहने वाले कुत्तों के टीकाकरण की मांग करते रहे हैं।


भोपाल से दुबई तक: वन्यजीव तस्करी के तार

भोपाल से संचालित एक बड़े अवैध वन्यजीव शिकार और मांस तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। यह गिरोह हिरण, नीलगाय और सांभर का शिकार करता था और उनका मांस भोपाल में स्टोर करके देश के कई शहरों के साथ दुबई तक सप्लाय करता था। साल भर में 200 से अधिक वन्यजीवों का शिकार करने वाले इस नेटवर्क में वन विभाग के एक रिटायर्ड रेंजर की भी संलिप्तता सामने आई है — जो व्यवस्था की गहरी खामियों की ओर इशारा करती है।


टायर कचरा: नीति आयोग ने रखे नए मानक

देश में टायरों की अवैध रिसाइक्लिंग और कमज़ोर कानूनी प्रावधान लंबे समय से प्रदूषण और जन-स्वास्थ्य के लिए खतरा बने हुए हैं। इस समस्या से निपटने के लिए नीति आयोग ने नए मानक सामने रखे हैं। इनमें पायरोलिसिस द्वारा तेल निष्कर्षण, कार्बन ब्लैक रिकवरी, जीएसटी में कटौती, अलग एचएसएन कोड और पायरोलिसिस इकाइयों के लिए कड़े नियमन की बात कही गई है।

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We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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