आज के अखबार 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों से पटे हुए हैं। पश्चिम बंगाल में बीजेपी, केरल में कांग्रेस नीत गठबंधन और तमिलनाडू में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके सरकार बनाने की ओर अग्रसर है। तमिलनाडू में टीवीके ने क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन की धीमी रफ्तार को चुनावी मुद्दा बनाया, लेकिन बाकी राज्यों में पर्यावरण से जुड़े विषय हाशिए पर ही रहे। यह एक बड़ी चिंता का विषय है — जब तक पर्यावरणीय मुद्दे चुनावी मैनिफेस्टो और जन-बहस का हिस्सा नहीं बनेंगे, तब तक बदलाव की उम्मीद कमज़ोर रहेगी।
आज की प्रमुख सुर्खियां
उत्तरप्रदेश: स्मार्ट मीटर पर यू-टर्न भारी जन-विरोध के बाद उत्तरप्रदेश सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड में बदलने का फैसला किया है। जनता की शिकायत है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल अचानक बढ़ गए। यही विरोध देश के कई अन्य राज्यों में भी देखने को मिला है।
हंतावायरस: अटलांटिक क्रूज़ पर 3 मौतें अटलांटिक महासागर में एक क्रूज़ जहाज़ पर हंतावायरस से 3 लोगों की मौत हुई है। यह एक दुर्लभ जूनोटिक वायरस है जो चूहों के ज़रिए इंसानों तक पहुंचता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस मामले की जांच कर रहा है। अभी तक इस बीमारी का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, हालांकि इंसान से इंसान में इसके फैलने की आशंका कम बताई जा रही है।
भारत बढ़ाएगा LNG भंडारण क्षमता ईरान संघर्ष की वजह से उत्पन्न ईंधन संकट के मद्देनज़र भारत ने अपनी लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) भंडारण क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मध्य प्रदेश: किसान नेता हाउस अरेस्ट राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के नेताओं को भोपाल में प्रस्तावित आंदोलन से पहले ही हाउस अरेस्ट कर लिया गया। 30 जिलों के किसान गेहूं की सरकारी खरीद में आ रही रुकावट सहित 15 मांगों को लेकर भोपाल आने वाले थे।
विस्तार से: देश में जल संकट — कितना गंभीर है खतरा?
रिपोर्ट: अब्दुल वसीम अंसारी

केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा 30 अप्रैल 2026 को जारी साप्ताहिक बुलेटिन एक चेतावनी की तरह है। देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण 40 प्रतिशत से नीचे जा चुका है। इससे भी गंभीर बात यह है कि असम, गोवा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडू, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में जलाशयों का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में भी कम है।
सबसे बुरी स्थिति कहां है?
उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के राज्य सबसे गंभीर संकट में हैं। असम में जल स्तर सामान्य से 43 प्रतिशत नीचे है, त्रिपुरा में 42 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में तो यह आंकड़ा 58 प्रतिशत तक पहुंच गया है — यानी लगभग आधे से भी कम पानी बचा है।
देश में 9 ऐसे प्रमुख जलाशय हैं जहां पानी सामान्य स्तर के 50 प्रतिशत से भी नीचे चला गया है। कुल 166 जलाशयों में से 22 जलाशय 80 प्रतिशत से नीचे हैं — इनमें से 9 तो 50 प्रतिशत से भी नीचे हैं, और 13 जलाशय 51 से 80 प्रतिशत के बीच बने हुए हैं। यह तस्वीर साफ बताती है कि देश के जल भंडार का एक बड़ा हिस्सा संतोषजनक स्थिति में नहीं है।
मॉनसून की कमज़ोरी और दोहरी मार
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल को जारी अपने लॉन्ग रेंज फोरकास्ट में चेतावनी दी है कि इस बार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कमज़ोर रह सकता है। यह वही मॉनसून है जो भारत की कुल वर्षा का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है। यानी एक तरफ जलाशय पहले से खाली हैं, और दूसरी तरफ मॉनसून से भरपाई की उम्मीद भी कम है। यह दोहरा संकट किसानों, शहरी उपभोक्ताओं और उद्योगों — सभी के लिए खतरे की घंटी है।
दिल्ली सरकार इस जल संकट से निपटने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना बनाने में जुटी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ राजधानी की चिंता काफी है, या देश के बाकी हिस्सों के लिए भी ठोस नीतिगत कदम उठाए जाएंगे?
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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