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मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में सोलर फेंस से बाघिन की मौत 

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-155 है। शनिवार, 28 फरवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए 8 बाघों की मौत पर प्रदेश सरकार का विस्तृत जवाब और होली में गौकाष्ठ को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के आदेश के बारे में।


मुख्य सुर्खियां

बोलिविया के एल आल्टो शहर में शनिवार सुबह इस देश की वायुसेना का हरक्यूलिस विमान क्रैश हो गया। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खराब मौसम के बीच विमान लैंडिंग के बाद रनवे से फिसल गया जिससे यह हादसा हुआ है।


भारत में डेंगू के खिलाफ वैक्सीन DengiAll अब Phase-III के अंतिम परीक्षण में है। यह वैक्सीन केवल एक ही डोज में बड़ा प्रभाव देने की क्षमता रखती है और अगर ट्रायल सफल रहा, तो यह अगले साल तक रोल आउट हो सकती है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान से सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ देशव्यापी एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत करेंगे। मध्य प्रदेश में इसकी शुरुआत भोपाल के काटजू हॉस्पिटल से होगी।  


मध्य प्रदेश विधानसभा में यह खुलासा हुआ कि प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों के लिए हर दिन लगभग ₹35,000 बकरी का मांस ख़रीदने पर खर्च हो रहा है। 2024-25 में यह खर्च लगभग ₹1.27 करोड़ पहुंच गया।  


मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में बताया कि पिछले साल हुई 55 बाघों की मौत में से लगभग 70% मौत प्राकृतिक कारणों से हुईं – जिसमें इलाके की लड़ाई, बीमारियां और अचानक हुई मौतें शामिल हैं।


मध्य प्रदेश का बजट सत्र शुक्रवार को समाप्त हो गया। विधानसभा में 22 विभागों का पौने 2 लाख करोड़ रूपए का बजट बिना चर्चा के ही पास हो गया। सत्र के समापन पर न तो सदन के नेता ना ही नेता प्रतिपक्ष मौजूद रहे।

विस्तृत चर्चा

मध्य प्रदेश में बाघों की मृत्यु के चिंताजनक आंकड़े

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ के पास बाघों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नवंबर 2025 से 24 फरवरी 2026 के बीच 8 बाघों की मौत दर्ज की गई है।

रिजर्व के अंदर: 4 बाघों की मौत हुई, जिसे वन विभाग ने बीमारी या आपसी लड़ाई (टेरिटोरियल फाइट) जैसी प्राकृतिक वजहें बताया है।

रिजर्व के बाहर: 4 बाघों की मौत हुई, जिनमें से तीन की मौत बिजली के करंट की वजह से हुई है।

इन मौतों में सबसे चौंकाने वाला मामला वह है जिसमें संदेह है कि एक बाघिन की मौत सोलर पावर फेंसिंग में फंसने से हुई। सामान्यतः सोलर फेंसिंग केवल हल्का झटका देती है और इसमें ऑटो-कट सिस्टम होता है, लेकिन इस केस में सिस्टम के फेल होने का अंदेशा है। यदि इसकी पुष्टि होती है, तो यह भारत का पहला मामला होगा जहां सोलर फेंसिंग के कारण बाघ की जान गई है।

कानूनी कार्यवाही और बढ़ते आंकड़े

न्यायालय और एसटीएफ: इस मामले पर हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। राज्य कार्य बल (STF) भी इस मामले की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें कोई आपराधिक साजिश तो नहीं है।

बढ़ता मृत्यु दर: आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में बाघों की मौत का ग्राफ साल दर साल बढ़ रहा है:

2022 में 43 मौतें।

2023 में 45 मौतें।

2024 में 46 मौतें।

2025 में 54 मौतें, जो टाइगर प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

2026 के शुरुआती दो महीनों में ही 10 बाघों की मौत हो चुकी है।

वन विभाग का पक्ष हालांकि वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट और बढ़ते आंकड़े सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन वन विभाग ने किसी भी तरह की लापरवाही (नेगलिजेंस) से इनकार किया है और कहा है कि पेट्रोलिंग और मॉनिटरिंग बढ़ा दी गई है। मुख्य चिंता यह बनी हुई है कि यदि सोलर फेंसिंग वन्यजीवों के लिए खतरनाक हो सकती है, तो यह इंसानों के लिए भी जोखिम भरी हो सकती है।


भोपाल में होलिका दहन के लिए ‘गो-काष्ठ’ का उपयोग

आगामी होली के त्योहार को देखते हुए भोपाल में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से गो-काष्ठ के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। गो-काष्ठ, गोबर और कृषि अवशेषों को दबाकर बनाए गए ठोस लकड़ी जैसे लट्ठे होते हैं, जिनका उपयोग जलाने के लिए किया जाता है। यह पहल लकड़ी की खपत को कम करने और पेड़ों को बचाने के लिए की जा रही है।

उपलब्धता और लागत

बिक्री केंद्र: भोपाल शहर के 52 केंद्रों पर 1 और 2 मार्च को इसकी बिक्री होगी।

कीमत: गो-काष्ठ 30 किलो के बैग में उपलब्ध होगा जिसकी कीमत ₹300 तय की गई है।

सब्सिडी: इसकी सामान्य लागत ₹15 प्रति किलो है, लेकिन सरकार द्वारा ₹5 प्रति किलो की सहायता (सब्सिडी) दी जा रही है, जिससे यह जनता को सस्ती दरों पर मिल सके।

सुविधा: लोगों की सुविधा के लिए कुछ स्थानों पर होम डिलीवरी की सेवा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

राज्य सरकार ने होलिका दहन में लकड़ी के स्थान पर गो-काष्ठ के उपयोग को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

अनिवार्य पंजीकरण: सार्वजनिक होलिका दहन आयोजनों का तहसील, नगर निकाय और पंचायत स्तर पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।

पुरस्कार और जांच: गो-काष्ठ का उपयोग करने वाली संस्थाओं को जिला स्तर पर पुरस्कृत किया जाएगा। साथ ही, अधिकारी मौके पर जाकर जांच करेंगे कि निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं और लकड़ी की जगह गो-काष्ठ का उपयोग किया गया है या नहीं।

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Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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