तेलंगाना के 365 मंडलों में सूखा घोषित, महाराष्ट्र में जंगल के मालिकाना हक के लिए मार्च, लद्दाख 100 प्रतिशत जैविक केंद्रशासित प्रदेश, मध्य प्रदेश में देसी गाय पालने पर 900 रु अनुदान। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
प्रमुख ख़बरें
तेलंगाना सरकार ने 31 जिलों के 365 मंडलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। इनमें से 111 मंडलों में गंभीर सूखा और 254 मंडलों में मध्यम सूखा दर्ज किया गया है। जिला अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
महाराष्ट्र में आदिवासियों ने अपनी मांगों को लेकर ‘संवैधानिक अधिकार संघर्ष मार्च’ निकाला। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि आदिवासियों को जंगल की जमीन पर मालिकाना हक और जरूरी सरकारी दस्तावेज दिए जाएं ताकि वे जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकें।
लद्दाख को भारत का पहला 100 प्रतिशत जैविक केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया गया है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने यह घोषणा की। इससे खुबानी, जौ और अन्य जैविक उत्पादों के जरिए किसानों की आय बढ़ने की संभावनाएं है।
मध्य प्रदेश सरकार 15 नवंबर से देशी गाय पालने वाले किसानों को 900 रुपये प्रति माह का अनुदान देने की योजना शुरू कर रही है। इस योजना पर सरकार सालाना 40 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जिसकी शुरुआत 100 प्रमुख गांवों से होगी।
IMD भोपाल ने अगले 4 दिन तक प्रदेश में कहीं तेज तो कहीं आंधी, गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। बुधवार को ‘अर्नब’ का 31 जिलों में असर दिखेगा। अगले 24 घंटे के दौरान सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश हो सकती है।
विस्तृत चर्चा
‘अर्नब’ के चलते लाखों लोगों का रेस्क्यू
चक्रवात अर्नब ओडिशा और आंध्रप्रदेश के पूर्वी तट से टकरा चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, इसके तट से टकराने की प्रक्रिया अभी दो से तीन घंटे और चलने की उम्मीद है। इस बेहद भीषण चक्रवाती तूफान के दौरान हवा की रफ्तार 135 किमी प्रति घंटा तक रही, जबकि हवा के झोंके 150 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गए। अनाकापल्ली, विशाखापत्तनम, काकीनाडा और कोनासीमा सहित कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला।
चक्रवात के तट से टकराने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इन इलाकों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।
आंधप्रदेश की तैयारी
आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के तटीय इलाकों में समुद्र का पानी रिहायशी इलाकों में घुस जाने से कई घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। यहां लोग बाढ़ से हुई तबाही का सामना करते नजर आए। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार सुबह स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गिरे हुए पेड़ों को हटाएं, तूफान थमने के बाद बिजली आपूर्ति बहाल करें, और यह सुनिश्चित करें कि जलाशयों और नहरों का पानी ओवरफ्लो न हो। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में 609 स्कूलों को राहत केंद्रों में बदल दिया गया है, जहां सुबह 5:50 बजे तक 854 लोगों को ठहराया गया है।
कई ट्रेन सेवाएं रद्द
अगर हम प्रिपेयर्डनेस की बात करें तो पूर्वी तटीय राज्यों ने स्कूल बंद कर दिए हैं, समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक लगा दी है, बचाव दलों को अलर्ट पर रखा है और सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए हैं। कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी की जान न जाए और संपत्ति तथा बुनियादी ढांचे को कम से कम नुकसान हो। NDRF ने भी बताया कि उन्होंने अपनी टीमें तैनात कर दी हैं, और कुछ अतिरिक्त टीमें भी स्टैंडबाय पर रखी गई हैं। चक्रवात अर्नब के मद्देनजर एहतियाती कदम के तौर पर भारतीय रेलवे ने कई ट्रेन सेवाएं रद्द कर दी हैं।
पूर्वी आंध्र प्रदेश के संवेदनशील तटीय इलाकों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है तो वहीं ओडिशा में कम से कम 48,000 लोगों को इवैकुएट किया है। खास बात यह है कि इन राज्यों ने यह तैयारियां बेहद कम समय में की है। उद्देश्य सिर्फ एक था कि कम से कम जान का नुकसान हो।
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