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रबी सीजन से पहले उर्वरकों की बिक्री में गिरावट क्यों?

हैदराबाद के जल संकट से लेकर उर्वरक बिक्री में कमी तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

मानसून के 17 दिनों बाद ही हैदराबाद में जल संकट, आंध्रप्रदेश से टकराएगा चक्रवाती तूफान ‘अर्णव’, अरुणाचल प्रदेश में NHPC प्रोजेक्ट के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन, गुजरात को पानी देगा मप्र। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


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प्रमुख ख़बरें

मानसून खत्म होने के केवल 17 दिनों के बाद ही हैदराबाद में पानी की किल्लत पैदा हो गई है। यहां पानी के टैंकरों की मांग में 233% की वृद्धि दर्ज की गई है। शहर में इस साल सामान्य से 27% कम बारिश हुई है, जिससे भूजल स्तर साढ़े 22 फीट नीचे चला गया है। 


बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान ‘अर्णव’ के गंभीर रूप लेने की चेतावनी के बाद ओडिशा सरकार ने आपदा प्रबंधन कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। तूफान के 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट पर 115-125 किमी/घंटा की रफ्तार से टकराने की संभावना है।

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अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले में NHPC द्वारा प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की ‘सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना’ के विरोध में हिंसक प्रदर्शन हुए हैं। प्रशासन ने पासीघाट, मेबो और रुकसिन में BNSS की धारा 163 लागू की है और भारी सुरक्षा बल तैनात किया है।


मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी और बिजली के आदान-प्रदान पर सहमति बनी है। इस व्यवस्था के तहत मध्य प्रदेश अपने बांधों से गुजरात को सिंचाई के लिए पानी देगा, जिसके बदले गुजरात मध्य प्रदेश को बिजली आपूर्ति करेगा।


बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान के प्रभाव से मध्य प्रदेश में मौसम बदलने वाला है। मौसम विभाग ने 27 अक्टूबर से राज्य के 18 जिलों में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस बदलाव से दिन के तापमान में भी गिरावट आने का अनुमान है।

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विस्तृत चर्चा

भारत में अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान यूरिया, डीएपी और कॉम्प्लेक्स सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की बिक्री में गिरावट आई है। अल नीनो से इसका क्या है सम्बन्ध बता रहे हैं पल्लव जैन।

प्रमुख उर्वरकों की बिक्री में गिरावट के मायने क्या?

खेती पर कम बारिश और अल नीनो के असर का सबसे बड़ा संकेत यह है कि यूरिया समेत सभी तरह के फर्टिलाइज़र की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले गिरावट दर्ज की जा रही है।

यह वह समय है जब रबी की फसलों की बुवाई शुरू होती है और खाद-बीज सोसाइटियों पर किसानों की कतारें दिखने लगती हैं। हर साल हमें यूरिया जैसी खाद की कमी देखने को मिलती है, लेकिन इस वर्ष मांग ही कम है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K) और सल्फर (S) वाले कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की बिक्री में सबसे ज़्यादा, यानी 22.2% की गिरावट आई है। इसके बाद म्यूरिएट ऑफ पोटाश (MOP) की बिक्री 11.7% घटी है। डीएपी, सिंगल सुपर फॉस्फेट और यूरिया की मांग भी कम रही है।

क्या कारण हो सकते हैं?

उर्वरकों की मांग कम रहने के कई कारण हो सकते हैं।

पहला कारण यह है कि किसानों के पास सिंचाई के लिए पानी नहीं है। गेहूं जैसी रबी की फसलों की बुवाई से पहले और बाद में खेत में यूरिया डाला जाता है, और किसान सिंचाई के ज़रिए उसे खेत में फैलाते हैं। पानी नहीं होगा, तो खाद मिट्टी में नहीं घुलेगी और उसका फायदा नहीं मिलेगा।

दूसरा कारण यह हो सकता है कि किसान क्रॉपिंग पैटर्न बदल रहे हैं। वे ऐसी फसलें लगा रहे हैं जिनमें पानी कम लगता है और उसी हिसाब से खाद की ज़रूरत भी कम रहती है।

तीसरा कारण यह हो सकता है कि किसानों ने बुवाई ही न की हो।

मार्च तक अल नीनो का असर

यह हम जानते ही हैं कि अल नीनो की वजह से इस वर्ष बारिश कम हुई है और कई इलाके सूखे की चपेट में हैं। ऐसे में खाद की मांग में कमी इस बात की पुष्टि करती है कि किसान इस समय बहुत बड़े संकट में हैं।

दुनिया भर की अधिकांश मौसम एजेंसियों का अनुमान है कि मौजूदा अल नीनो (El Niño) जनवरी-मार्च 2027 तक मज़बूत से बहुत मज़बूत स्थिति में बना रहेगा, और अप्रैल-मई के आसपास कमज़ोर या मध्यम स्तर पर आ जाएगा। अल नीनो के कारण सर्दियों में बारिश कम होने और तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिसका फसलों पर असर पड़ना तय है।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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