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इंदौर में दूषित पानी पीने से 8 मौत, कौन ज़िम्मेदार?

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-105 है। शुक्रवार, 02 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए इंदौर में दूषित पानी पीने की वजह से हुई बड़ी त्रासदी, जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई।

मुख्य सुर्खियां

स्विट्जरलैंड के प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट क्रांस-मोंटाना में नववर्ष की रात बहुत बड़ी त्रासदी हो गई। ले कॉन्स्तेलेशन नामक शराबखाने में आग लग गई जिसमें लगभग 40 लोग मर गए और 115 से अधिक लोग घायल हैं। अधिकांश पीड़ित युवा थे जो नववर्ष मना रहे थे। प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि शैंपेन की बोतलों में लगाए गए चमकीले पटाखों से आग शुरू हुई। पुलिस अभी जांच कर रही है।


भारत में दिसंबर 2025 पिछले 124 वर्षों में पांचवां सबसे सूखा दिसंबर रहा। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार वर्षा सिर्फ 4.9 मिलीमीटर हुई जो सामान्य से 69 प्रतिशत कम है। दिल्ली में तो बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई। मध्य भारत में 124 वर्ष की सबसे कम वर्षा देखी गई। घना कोहरा भी 15 दिन तक रहेगा। भारतीय मौसम विभाग का कहना है शुष्क परिस्थितियां जनवरी-मार्च तक जारी रहेंगी उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में।


नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जुलाई-अगस्त से 500 इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी। नोएडा प्राधिकरण चरणबद्ध तरीके से सेवा शुरू करेगा। पहले 100 बसें शुरू होंगी। कुल 257 विद्युत बसें नोएडा में 13 मार्गों पर, 196 ग्रेटर नोएडा में 9 मार्गों पर और 52 यमुना द्रुतमार्ग क्षेत्र में चलेंगी। बसें हर 10 मिनट में मिलेंगी। सेवा नोएडा हवाईअड्डा, विश्वविद्यालयों और प्रमुख क्षेत्रों को कवर करेगी।


सर्वोच्च न्यायालय के अरावली आदेश से पहले एक विशेषज्ञ समिति ने पहाड़ियों को परिभाषित करने के लिए अधिक अध्ययनों की मांग की थी। जून से अक्टूबर 2024 तक 7 बैठकें हुईं। तकनीकी उप-समिति ने कहा कि अरावली पहाड़ियों को परिभाषित करने का विश्वसनीय तरीका ढूंढने के लिए और शोध चाहिए। समिति ने 100 मीटर ऊंचाई मानदंड की सिफारिश की थी। सर्वोच्च न्यायालय अब क्षेत्र विशेषज्ञों से जांच करेगा कि नई परिभाषा संरक्षण दायरे को कम तो नहीं कर रही।


इंदौर में बहुत बड़ी त्रासदी हो गई जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई क्योंकि मलजल का पानी पीने के पानी में मिल गया। लोग 2 महीने से शिकायत कर रहे थे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पानी में एसिड, गंदी बदबू और दूषित होने की शिकायतें कई महीनों से की जा रही थी। निवासियों का कहना है प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। नर्मदा पाइपलाइन की फाइल लंबित पड़ी थी।


विस्तृत चर्चा

स्वच्छ इंदौर: दूषित पानी से आठ की मौत

इस पॉडकास्ट चर्चा में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और प्रशासनिक लापरवाही का विस्तार से वर्णन किया गया है। चर्चा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

घटना और हताहत: भागीरथपुरा में पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवेज का पानी मिलने के कारण कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई है और 200 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। हालाँकि, प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर दूषित पानी की वजह से केवल 4 मौतों की ही पुष्टि की है।

प्रदूषण का मुख्य कारण: जांच में सामने आया कि मुख्य पानी की पाइपलाइन के ऊपर एक पुलिस चौकी और शौचालय बना हुआ था, जिसमें कोई सेप्टिक टैंक नहीं था। शौचालय का दूषित पानी एक गड्ढे में जमा हो रहा था और वहीं पाइपलाइन टूटी होने के कारण गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुँच गया।

चेतावनी और लापरवाही: निवासियों ने 18 दिसंबर से ही पानी में बदबू की शिकायत शुरू कर दी थी, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। जब 29 दिसंबर को पहली मौत हुई, तब जाकर प्रशासन जागा। शहर भर से पानी की गुणवत्ता से जुड़ी सैकड़ों शिकायतें दर्ज थीं, लेकिन उन पर सही से काम नहीं किया गया। एक सस्पेंड किए गए इंजीनियर ने स्टाफ की कमी और अधिकारियों को पाइपलाइन खराब होने की जानकारी पहले से होने की बात स्वीकार की है।

प्रशासनिक देरी: पाइपलाइन की मरम्मत के लिए फाइल नवंबर 2024 में बनाई गई थी और टेंडर जुलाई 2025 में निकला था, लेकिन काम का आदेश (work order) घटना से महज तीन दिन पहले यानी 26 दिसंबर 2025 को जारी किया गया। प्रशासन का तर्क है कि ‘अमृत 2.0’ योजना के तहत पाइपलाइन अलाइनमेंट का काम चल रहा था, इसलिए टेंडर प्रक्रिया में समय लगा ताकि वित्तीय गड़बड़ी न हो।

प्रशासनिक विफलता: पॉडकास्ट में इस घटना को केवल एक चूक नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक लापरवाही बताया गया है। यह चर्चा इस बात पर जोर देती है कि इंदौर, जो देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, वह अपने नागरिकों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने में विफल रहा है।

संक्षेप में, यह चर्चा इंदौर के प्रशासनिक तंत्र की उन खामियों को उजागर करती है जो चमकदार पुरस्कारों के पीछे छिपी हुई हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति उनकी उदासीनता को दर्शाती हैं।

इस पूरी स्थिति को एक सजे-धजे महल की तरह समझा जा सकता है, जो बाहर से तो भव्य और सुंदर दिखता है, लेकिन जिसकी नींव में लगी पानी की पाइपें अंदर ही अंदर सड़ रही हैं और महल के निवासियों के स्वास्थ्य को धीरे-धीरे खोखला कर रही हैं।

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