यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-130 है। सोमवार, 2 फरवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए केंद्रीय बजट में पर्यावरण और कृषि को लेकर क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं?
मुख्य सुर्खियां
केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में आगामी वित्तवर्ष के लिए भारत सरकार का बजट पेश किया।
सरकार ने 2026-27 के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को 3 हज़ार 759 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह पिछले साल की तुलना में 8% अधिक है।
VB-GRAM G योजना के लिए ₹95 हजार 692 करोड़ आवंटित किए हैं। जो MGNREGA की जगह लेगी। MGNREGA के लिए अगले वित्त वर्ष में ₹30,000 करोड़ रखे गए हैं। कुल ग्रामीण रोजगार बजट ₹1.25 लाख करोड़ है।
सरकार ने जटिल जैविक दवाओं के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ का ‘बायो-फार्मा शक्ति मिशन’ शुरू किया। इसके तहत NIPER संस्थानों का विस्तार और 1,000 क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क बनाया जाएगा।
SHANTI Act के तहत सरकार ने 2035 तक परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जरूरी आयात पर शून्य कस्टम ड्यूटी की घोषणा की। इसका लक्ष्य 2047 तक परमाणु क्षमता को 100 GW तक बढ़ाना है।
बढ़ी खपत और कमजोर रुपये के कारण उर्वरक सब्सिडी 2025-26 में ₹1.88 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। यूरिया खपत और आयात में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
केंद्र सरकार सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करेगी और खनिज-समृद्ध राज्यों में ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ बनाएगी। पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर मुंबई-अहमदाबाद 2027 से शुरू होने की योजना है।
राहुल गांधी ने वायु प्रदूषण को राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने और संसद में चर्चा की मांग की। उन्होंने प्रदूषण से बढ़ते स्वास्थ्य व आर्थिक बोझ पर चिंता जताई।
विस्तृत चर्चा
आइए अब जानते हैं बजट में पर्यावरण और कृषि के लिए क्या-क्या है?

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन
जलवायु परिवर्तन शब्द की अनुपस्थिति: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण में ‘क्लाइमेट चेंज’ (Climate Change) शब्द का एक बार भी उल्लेख नहीं किया गया, जबकि देश वर्तमान में भीषण हीट वेव, बाढ़ और वायु प्रदूषण जैसी वास्तविकताओं का सामना कर रहा है।
बजट आवंटन: इस साल पर्यावरण मंत्रालय का बजट 3,759 करोड़ रुपये रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 8% अधिक है।
प्रदूषण नियंत्रण में कटौती: वायु प्रदूषण से लड़ने वाले ‘कंट्रोल पॉल्यूशन प्रोग्राम’ के बजट में कटौती की गई है। इसे पिछले साल के 1,300 करोड़ रुपये से घटाकर 1,091 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके विपरीत, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को 123 करोड़ रुपये मिले हैं, जो कि मामूली वृद्धि है।
वन्यजीव और ग्रीन मिशन: ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ और ‘प्रोजेक्ट एलीफेंट’ जैसे वन्यजीव कार्यक्रमों के लिए 290 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। ग्रीन इंडिया मिशन का बजट भी बढ़ाया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मानव-पशु संघर्ष और मुआवजे की जरूरतों को देखते हुए यह राशि बहुत कम है।
ग्रीन इंडस्ट्री बनाम ग्रीन सर्वाइवल: विशेषज्ञों का तर्क है कि बजट ‘ग्रीन इंडस्ट्री’ बनाने पर केंद्रित है, लेकिन इसमें ‘ग्रीन सर्वाइवल’ (आम लोगों और किसानों के बचाव) के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। हालांकि इलेक्ट्रिक बसें, कार्बन कैप्चर और बिग कैट समिट जैसी घोषणाओं को सकारात्मक माना गया है।

कृषि और किसान कल्याण
कुल आवंटन: खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए कुल 1.62 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो पिछले संशोधित अनुमानों से लगभग 7% अधिक है।
फसल बीमा में कटौती: ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के बजट को घटाकर 1,200 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह कटौती तब की गई है जब अनियमित बारिश और हीट वेव के कारण फसलें लगातार खराब हो रही हैं।
प्राकृतिक खेती और अन्य मिशन: ‘नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग’ में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, जिसे विशेषज्ञ नाकाफी मान रहे हैं। इसके अलावा, पिछले साल घोषित किए गए कपास, दाल, सब्जी और फल जैसे महत्वपूर्ण मिशनों का इस बजट में कोई जिक्र नहीं है।
डिजिटल कृषि और एआई (AI): सरकार ने ‘भारत विस्तार’ नामक एक एआई टूल के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी भाषा में सही समय पर सलाह देना है। हालांकि, विशेषज्ञों को चिंता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निजी कंपनियां अपना एजेंडा किसानों पर थोप सकती हैं।
कुल मिलाकर बजट में राशि तो बढ़ी हुई दिखती है, लेकिन जमीनी चुनौतियों और जलवायु आपदाओं (जो जीडीपी को 3% तक नुकसान पहुंचाती हैं) से निपटने के लिए तैयारी अभी भी कमजोर नजर आती है।
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