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कमर्शियल एलपीजी रुकी तो बदला किचन का हिसाब, ठेले और हॉस्टल दबाव में

Video Produced By Pallav Jain

भोपाल के नर्मदापुरम रोड में स्थित शिवा भारत गैस एजेंसी के बाहर इन दिनों लोगों की लंबी कतारें दिख रही हैं। कई लोग सिलेंडर लेने पहुंचे हैं, तो कुछ सिर्फ यह पता करने कि उनकी बुकिंग कब आएगी। सरकार का कहना है कि घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य है और घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जमीन पर छोटे कारोबारियों और हॉस्टल संचालकों की चिंता कुछ और कहानी बता रही है।

हाल की अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बाद गैस सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (strait of hormuz) से गुजरने वाली गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके बाद भारत सरकार ने 9 मार्च 2026 को “नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर 2026” लागू किया। इस आदेश के तहत गैस वितरण को प्राथमिकता के आधार पर बांटा जा रहा है। घरेलू एलपीजी, सीएनजी और घरों में पाइप से मिलने वाली गैस को सबसे ऊपर रखा गया है, जबकि होटल, ढाबा और कैटरिंग जैसे कामों में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल सिलेंडरों की रिफिलिंग फिलहाल रोक दी गई है।

भोपाल की नर्मदापुरम रोड में, शिवा भारत गैस एजेंसी के बाहर दोपहर में सिलेंडर का इंतज़ार करती महिला। फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी

इन फैसलों के बाद जहां एक ओर लोग घरेलू सिलेंडर लेने के लिए कतारों में लग रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुकने के बाद सड़क पर ठेला लगाकर खाने का सामान बेचने वाले स्ट्रीट वेंडर्स का काम ठप्प पड़ गया है। इसके अलावा जल्द ही हॉस्टलों में रहने वाले लोगों को खाने के मेन्यु में कटौती का सामना करना पड़ सकता है।  

ठेले और छोटे कारोबार पर सीधा असर

बागसेवनिया में ठेले पर इडली-डोसा बेचने वाले मुकेश बताते हैं कि पिछले पंद्रह दिनों से उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पाया। गैस खत्म होने के बाद उन्हें अपना मेन्यू ही बदलना पड़ा। 

वह कहते हैं, “रोज करीब तीन हजार रुपये तक का धंधा हो जाता था। अब हालत यह है कि चार सौ रुपये तक भी मुश्किल से पहुंच रहा है। डोसा बनाना बंद करना पड़ा है। सिर्फ इडली बेच रहा हूं। ग्राहक पूछते हैं कि डोसा मिलेगा? मगर क्या जवाब दूं जब गैस ही नहीं है?”

मुकेश के ठेले में डोसा, इडली और बड़े जैसी हर चीज गैस पर बनती है ऐसे में एक सिलेंडर लगभग पंद्रह दिन चलता है।  

गैस सिलिंडर भरवाने के लिए लाईन में लगी महिलाएं, फोटो चंद्र प्रताप, भोपाल
गैस सिलिंडर भरवाने के लिए लाईन में लगी महिलाएं, फोटो चंद्र प्रताप, भोपाल

“होटल लाइन का काम बिना गैस के चल ही नहीं सकता। नींबू पानी या गन्ने का जूस तो बिना गैस के चल सकता है, लेकिन यहां हर चीज गरम बनानी पड़ती है।”

मुकेश की तरह बृजकिशोर साहू भी दाल-बाटी का ठेला लगाते हैं। वह बीते दिनों एक सिलेंडर घर के इस्तेमाल के लिए लेकर गए थे। मगर ठेले का सिलेंडर ख़त्म होने के बाद अब गैस एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। साहू इससे पहले गैरआधिकारिक प्रक्रिया से कॉमर्शियल सिलेंडर लेते थे। उनके अनुसार अब ‘ब्लैक’ में भी सिलेंडर नहीं मिल रहा है। 

बीते 2 दिनों से सिलेंडर न होने के चलते उनकी दुकान बंद है। वह पूछते हैं, “हमारा काम ही खाना बनाकर बेचने का है। इसके अलावा हम क्या करें?” 

हॉस्टलों में मेन्यू घटाने की आई नौबत 

भोपाल का महाराणा प्रताप (एमपी) नगर इलाका कोचिंग संस्थानों और निजी हॉस्टलों के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में बाहर से आए छात्र रहते हैं और ज्यादातर हॉस्टलों में मेस की व्यवस्था होती है। एक निजी बॉयज हॉस्टल के संचालक नेतराम सिंह धाकड़ बताते हैं कि गैस आपूर्ति बाधित होने का असर सीधे बच्चों के खाने पर पड़ सकता है।

उनके हॉस्टल में पहले करीब 45 छात्र रहते थे, लेकिन अभी यह संख्या घटकर लगभग 30 रह गई है।

वह कहते हैं, “थोड़ी गैस की समस्या आई तो कुछ बच्चे घर चले गए। मैंने उनसे कहा कि अगर गैस नहीं मिली तो खाना बनाना मुश्किल हो जाएगा। बच्चों के पेपर चल रहे हैं, वे पूछते हैं कि अब क्या होगा?”

धाकड़ के किचन में महीने में तीन से चार कमर्शियल सिलेंडर लगते हैं। जब अखबार और टीवी चैनलों में गैस की कमी की संभावना जताई जा रही थी तब उनके पास 2 सिलेंडर आधे भरे हुए थे। मगर अब वो भी ख़त्म हो चले हैं। वह कहते हैं, “सरकार हमसे कह रही थी कि सब ठीक है कोई कमी नहीं होगी तो हमने पहले से कोई व्यवस्था नहीं की।” वह कहते हैं कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो उन्हें मेन्यू कम करना पड़ सकता है।

भोपाल के एमपी नगर में मारुती बॉयज़ हॉस्टल चलाने वाले नेतराम धाकड़। उनका कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई रुकने से हॉस्टल की रसोई चलाना मुश्किल हो सकता है।फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी

“अभी दाल, चावल, सब्जी, रोटी, अचार, सलाद और रायता देते हैं। अगर संकट लंबा चला तो इनमें से कुछ चीजें हटानी पड़ सकती हैं। तीन वक्त के खाने को दो वक्त करना भी पड़ सकता है।”

वहीं दूसरी ओर एमपी नगर ज़ोन-1 में 50 छात्राओं की क्षमता वाले श्री पैलेस जेम गर्ल्स हॉस्टल की डे वार्डन संगीता पाण्डेय का कहना है कि उन्होंने परिस्थिति का आकलन करके पहले से ही गैस की व्यवस्था कर ली थी। हर महीने उनके हॉस्टल में 6 सिलेंडर लगते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने इस महीने के लिए एडवांस में सिलेंडर मंगा लिए थे, इसलिए उन्हें कोई समस्या नहीं जाएगी। 

“हम स्टाफ से कह रहे हैं कि जिन चीजों में ज्यादा गैस लगती है उन्हें थोड़ा कम बनाया जाए। शाम के नाश्ते में ऐसी चीजें रखने की कोशिश कर रहे हैं जिनमें गैस कम लगे।”

सायकिल पर गैस सिलिंडर बांधकर घर ले जाता उपभोक्ता, भोपाल, मध्य प्रदेश
सायकिल पर गैस सिलिंडर बांधकर घर ले जाता उपभोक्ता, भोपाल, मध्य प्रदेश

धाकड़ अपने हॉस्टल में गैस के विकल्प के रूप में डीजल भट्टी का इस्तेमाल करने का सोच रहे हैं।  हालांकि गैस के विकल्प के रूप में इंडक्शन के इस्तेमाल पर वो सहमत नही हैं। वह कहते हैं, “उससे रोटी नहीं बनेगी।” 

मुकेश ने 4 साल पहले 18000 रूपए खर्च करके अपना ठेला बनवाया था. इसके बाद उन्होंने 4000 की डोसे की भट्टी और सांभर गर्म करने के लिए 1000 रूपए की एक और भट्टी खरीदी थी. इसे ठेले में फिट करने के लिए उन्होंने एक कर्मचारी को 1000 रूपए दिए थे. इस प्रकार उन्हें वर्तमान सेट अप स्थापित करने में लगभग 25000 रु का खर्च आया था. 

अगर अब वह डीजल भट्टी लेंगे तो उनके अनुसार इसके लिए 15000 से 20000 फिर से खर्च करने पड़ेंगे. मुकेश इसके लिए तैयार नही हैं.         

एजेंसी के बाहर लगी कतारें 

A truck carrying cooking gas cylinders parked outside the Shiva Bharat Gas Agency, Bhopal, Madhya Pradesh.
शिवा भारत गैस एजेंसी के बाहर खड़ा रसोई गैस सिलिंडर ट्रक, भोपाल, मध्य प्रदेश

शिवा भारत गैस एजेंसी के संचालक संजय कहते हैं कि कंपनी से घरेलू सिलेंडर की सप्लाई आ रही है और किसी तरह की कमी नहीं है।

“लोगों को लग रहा है कि आगे चलकर सिलेंडर नहीं मिलेगा, इसलिए वे एजेंसी पर आकर लेना चाहते हैं। जबकि गाड़ी उनके घर तक डिलीवरी के लिए निकल चुकी होती है। कई बार हम फोन करके बताते हैं कि आपके घर के सामने गाड़ी खड़ी है, लेकिन लोग फिर भी यहीं से लेने की जिद करते हैं।”

उनका कहना है कि कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई फिलहाल कंपनी ने रोकी हुई है। “जैसे ही कंपनी से कमर्शियल सिलेंडर आने लगेंगे, वैसे ही उनकी सप्लाई भी शुरू हो जाएगी।”

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय भारत सरकार का कहना है कि घरेलू सिलेंडरों की उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वितरण व्यवस्था को नियंत्रित रखने के लिए अब डिजिटल बुकिंग और डिलीवरी सिस्टम को और सख्त किया गया है। उपभोक्ताओं को अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से बुकिंग करनी होगी और सिलेंडर लेते समय ओटीपी देना होगा। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि इससे जमाखोरी और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकेगा । 

भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में अभिषेक भारत गैस एजेंसी के बाहर रखे एलपीजी सिलेंडर। हाल की अनिश्चितता के बीच लोग सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों का रुख कर रहे हैं। फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी

भोपाल में 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर की कीमत मार्च की शुरुआत में बढ़कर करीब 918 रुपये हो गई है, जबकि 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत लगभग 1910 रुपये के आसपास पहुंच गई है।

फिर भी छोटे कारोबारियों का कहना है कि उनके लिए असली चिंता कीमत नहीं बल्कि उपलब्धता है। 13 मार्च को प्रदेश में 11 स्थानों पर कार्यवाही कर 228 सिलेंडर जब्त किये गए तथा 03 प्रकरण पंजीबद्ध किये गए|

हालांकि प्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण मंत्रालय ने कहा कि प्रदेश में गैस सिलेण्डर का पर्याप्त स्टॉक है और  प्रदेश के 11 बाटलिंग प्लांट एवं वितरकों के गोदाम में पर्याप्त सिलेण्डर उपलब्ध है। वहीं भोपाल कलेक्टर ने कहा कि घरेलू सिलेण्डरों को लेकर किसी भी प्रकार की घबराहट की स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि गैस वितरण कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को ऑनलाइन बुकिंग के अनुसार नियमित रूप से सिलेण्डर उपलब्ध कराए जा रहे हैं और इस पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

भोपाल की 6 नंबर चौपाटी पर अपने स्टॉल पर पाव भाजी तैयार करता एक दुकानदार। कमर्शियल गैस सिलेंडर की अनिश्चित सप्लाई के बीच छोटे फूड स्टॉल संचालक भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं। फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी

मुकेश को शुक्रवार को एक घरेलू सिलेंडर तो मिल गया है मगर वह क़ानूनी तौर पर इसका इस्तेमाल अपने ठेले में नहीं कर सकते। वह कहते हैं कि उन्हें सरकार से ज्यादा कुछ नहीं चाहिए, बस इतना कि गैस की सप्लाई जल्द सामान्य हो जाए। हालांकि शनिवार को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (विपणन एवं तेल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा कि कई राज्यों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई फिर से शुरू की जा रही है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार यह कदम होटल, रेस्तरां और अन्य छोटे कारोबारों को राहत देने और गैस आपूर्ति की स्थिति को सामान्य करने के लिए उठाया गया है।

मगर मुकेश ने जब रविवार को स्थानीय एजेंसी से इस बारे में संपर्क किया तो उन्हें कहा गया कि एजेंसी को अभी तक ऐसे निर्देश नहीं मिले हैं। उन्हें कहा गया कि अगर सप्लाई फिर से आना शुरू होगी तो कॉमर्शियल सिलेंडर का वितरण भी किया जाएगा।

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  • Journalist, focused on environmental reporting, exploring the intersections of wildlife, ecology, and social justice. Passionate about highlighting the environmental impacts on marginalized communities, including women, tribal groups, the economically vulnerable, and LGBTQ+ individuals.

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  • Shishir Agrawal is the Hindi Editor of Ground Report. However he identifies himself as a young enthusiast passionate about telling tales of unheard. He covers environment and development affairs from the tribal landscape of central India.

    He has also covered issues related to agrarian crisis, wildlife, water, waste and urban development. He has been a recipient of several fellowships and grant. This includes Gandhi Fellowship, Vikas Samvad Media Fellowship and Earth Journalism Network Grant.

    Apart from having long conversations he indulges himself in reading books, watching theater and gazing at flying objects for leisure. He can be reached at shishiragrawl007@gmail.com.

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