गोपाल सिंह रतलाम जिले के आजमपुर डोडिया गांव में रहते हैं। 15 जुलाई को उनके 8 साल के बेटे को उल्टी-दस्त होना शुरू हो गए। दोपहर तक घरेलू उपचार से भी राहत न मिलने पर गोपाल अपने बच्चे को नज़दीकी दवाखाना ले गए। यहां इंजेक्शन और कुछ दवा लेने के बाद वह घर आ गए। शाम होते तक उनकी 2 भतीजी और अगले दिन उनकी पत्नी बीमार हो गईं। इस तरह परिवार के 10 में से आधे सदस्य एक के बाद एक बीमार होते चले गए। सभी को एक ही शिकायत थी, उल्टी और दस्त।
दैनिक भास्कर में प्रकाशित ख़बर के अनुसार शुक्रवार 17 जुलाई को दूषित पानी पीने के बाद यहां करीब 80 ग्रामीण बीमार हो गए। ‘द हिन्दू’ के अनुसार शनिवार 18 जुलाई तक इनमें से 21 लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हालांकि यहां इलाज होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।
आजमपुर डोडिया के लोग बताते हैं कि गांव में केवल एक कुआं ही पानी का स्रोत है। ग्रामीणों का कहना है कि इसकी नियमित साफ़-सफाई न होने के चलते यह समस्या आई है। हालांकि सरपंच ऐसी लापरवाही से इनकार करते हैं। पंचायत ने घटना के बाद टैंकर से पानी भेजना शुरू किया है। वहीं ज़िला स्तर पर पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। फिर भी ग्रामीणों का मानना है कि उनके गांव के कुएं और तालाब का सही प्रबंधन होने पर ही पुख्ता समाधान हो सकेगा।

साफ़ नहीं होता कुआं
गोपाल के साथ ही नाहर और प्यार सिंह ग्राम सुरक्षा समिति के सदस्य हैं। गोपाल कहते हैं, “हमारा तो काम ही गांव की सुरक्षा करना है। जब गांव के कई लोग बीमार होना शुरू हुए तो हमने खुद के स्तर पर ही इस बारे में पता लगाने का सोचा।” बीमार व्यक्तियों के परिजनों से बात करने पर उन्हें पता चला कि सबकी तबियत कुएं का पानी पीने के बाद ही ख़राब हुई है।
तीनों लोगों ने यह निश्चय किया कि वह कुएं का पानी खाली कर उसके अंदर उतरेंगे।
“हम अंदर गए तो वहां बहुत बदबू आ रही थी।” गोपाल ने बताया। वो कहते हैं कि जब वो गाद निकाल रहे थे तो उसमें चूने से भरी हुई थैलियां मिलीं। प्यार सिंह कहते हैं, “एक थैली 1 किलो और एक इससे ज्यादा की थी।”
34 वर्षीय गोपाल बताते हैं कि उन्होंने अपने बचपन से लेकर अब तक कभी भी इस कुएं की सफाई होते हुए नहीं देखी।
इस घटना के बाद स्थानीय विधायक डॉ राजेंद्र पाण्डेय और अपर कलेक्टर बृजेंद्र रावत भी आजमपुर डोडिया पहुंचे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कुएं के पानी की तत्काल जांच कराने के लिए कहा।
ग्राउंड रिपोर्ट के पास मौजूद एक वीडियो में कुछ लोग विधायक के सामने कुएं से निकली चूने की थैलियां दिखाते हैं। वीडियों में विधायक लापरवाही के लिए वहां मौजूद अधिकारियों पर नाराज़ होते दिखाई देते हैं।
डॉ पाण्डेय द्वारा इस दौरान गांव से 10 किमी दूर स्थित पिपलोदा से ट्यूबवेल के माध्यम से गांव में स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक एवं निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

खारे पानी का डर
नाहर सिंह मानते हैं कि चूंकि कुआं बहुत समय से गंदा था इस वजह से लोग बीमार हुए हैं। उन्होंने बताया कि गांव में जल जीवन मिशन के तहत पानी के कनेक्शन तो हैं मगर इससे आने वाला पानी खारा है जिसके कारण लोग केवल घरेलू कामकाज और मवेशियों के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
पीने के पानी के लिए गांव से लगभग 1.5 किमी दूर यह कुआं ही एक मात्र साधन है। इसके अलावा एक तालाब है जिसकी मेड टूटी हुई है।
यह गांव अयाना ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। इसके सरपंच सम्रत मल कहते हैं कि जब डेढ़ महीने पहले लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग ने कुएं के पानी की जांच की थी। उनके अनुसार, “पीएचई वालों ने पानी पीने लायक बताया था और इसकी रिपोर्ट भी हमको दी थी।”
हालांकि रिपोर्टर के बार-बार मांगने पर भी उन्होंने यह रिपोर्ट साझा नहीं की। अब सम्रत मल हमारा कॉल नहीं उठा रहे।
कुएं की सफाई के बारे में पूछने पर वो कहते हैं, “मैंने कई बार ग्रामीणों से इसे साफ़ करवाने के बारे में पूछा मगर उन्हें डर था कि इससे पानी खारा हो जाएगा।”

रतलाम के पीएचई विभाग में कार्यपालक अभियंता एसआर जांगड़े भी ग्रामीणों की इस शिकायत के बारे में बताते हैं। ग्राउंड रिपोर्ट से बात करते हुए उन्होंने बताया कि पिपलोदा के कुछ गांवों में भूजल खारा है जिसके कारण लोग पीने के लिए अन्य स्त्रोतों जैसे कुएं पर निर्भर हैं।”
हालांकि वह ग्रामीणों की आशंका को खारिज़ करते हुए कहते हैं, “कुएं की सफाई करने पर उसमें खारा पानी आने लगेगा यह वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।”
गोविंद बताते हैं कि घटना के बाद से लोग फिलहाल टैंकर का पानी ही इस्तेमाल कर रहे हैं।
कुएं और तालाब की मांग सालों से अधूरी
सम्रतमल ने बताया कि नए पानी की जांच करने पर यह पीने योग्य पाया गया। हालांकि इसकी रिपोर्ट मांगने पर उन्होंने बाद में भेजने का कहा। एक हफ्ते बाद भी रिपोर्टर को यह रिपोर्ट नहीं मिली। पहली बातचीत के बाद अब वो रिपोर्टर के मैसेज और कॉल का जवाब नहीं दे रहे।
कुएं के अलावा 5 साल पहले तक तालाब भी पानी का स्रोत था। गोपाल सिंह ने बताया कि मेड टूटने के कारण कई सालों से इसमें पानी नहीं ठहरता। इसे सुधरवाने के लिए कई बार विधायक और सरपंच से मांग भी की गई मगर आज तक इस पर कुछ नहीं हुआ।
इस मामले पर सम्रत मल कहते हैं, “विधायक जी के पास तालाब बनाने का आवेदन किया है उन्होंने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।”

अभी कैसी स्थिति है?
इस पूरे मामले पर ग्राउंड रिपोर्ट से बात करते हुए रतलाम की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी किरण वाडिया ने बताया कि घटना के बाद कोई भी ग्रामीण गंभीर रूप से बीमार नहीं था। फिर भी कैम्प के पहले दिन (18 जुलाई) 20 मरीजों का इलाज सिविल हॉस्पिटल, पिपलोदा में किया गया। अब तक कुल 23 मरीज़ पिपलोदा अस्पताल में इलाज के लिए आए हैं। सभी डिस्चार्ज कर दिए गए हैं।
वहीं जांगड़े बताते हैं कि फिलहाल ग्रामीणों के लिए एक अन्य गांव से पाइपलाइन लाकर पानी की सप्लाई का प्रबंध किया जा रहा है ताकि इस समस्या को पूरी तरह से हल किया जा सके।
उन्होंने बताया, “कुएं के पानी की जांच में यह संतोषजनक रूप से साफ़ नहीं पाया गया इसलिए पाईपलाइन से ही पीने का जल भेजा जाएगा। ग्रामीणों को कुएं का पानी इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी गई है।”
आजमपुर डोडिया गांव के लोगों के लिए फिलहाल संकट टल चुका है। मगर ग्रामीण अब भी इस बात को दोहराते हैं कि गांव में मीठे पानी के लिए और कुआं एवं तालाब होने चाहिए। गोपाल कहते हैं कि अगर गांव में मौजूद तालाब की मेड बन जाएगी तो ग्रामीण सतही पानी का इस्तेमाल कर सकेंगे।
बैनर ईमेज– कुएं की सफाई के लिए नीचे उतरे गोपाल सिंह एवं अन्य साथी | रतलाम | फ़ोटो: ग्राउंड रिपोर्ट के लिए स्पेशल अरेंजमेंट
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